devar ne choda Archives - Antarvasna https://sexstories.one/tag/devar-ne-choda/ Hindipornstories.org Fri, 05 Nov 2021 08:04:55 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.1 बहन का देवर https://sexstories.one/%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0/ Fri, 05 Nov 2021 08:04:55 +0000 https://sexstories.one/?p=3284 मैं अपना हाथ उसकी पेंट के ऊपर घुमा रही थी. एक कड़क और मोटी लंबी सलाख मेरे हाथ मे आ गयी. यह तो राकेश का लंड था. उसने अपना लंड अपनी पेंट की चैन खोल कर निकाल लिया था और मेरा हाथ जैसे हीवहाँ पहुँचा उसने पॉपकॉर्न के पॅकेट की जगह अपना लंड खड़ा कर रखा था..

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Behan Ka Devar ne choda रजनी दीदी कितनी बदल गयी इन दिनों. मुझे तो यकीन ही नही हो पा रहा था की शादी के तीन साल बाद दीदी को इतने मॉडर्न आउटफिट मे देखूँगी. कहाँ हम दोनो बहने छत्तीसगढ के दुर्ग मे रहने वाली सीधी सादी लड़कियाँ कहाँ आज वेस्टर्न आउटफिट मे बात-बात मे “ओह कहने वाली मेरे से 2 साल बड़ी रजनी दीदी. कपड़े भी क्या थे. छोटा स्कर्ट जिसमे से उसकी जांघें ऊपर तक दिख रही थी. सामने वाले को उसकी पेंटी के दर्शन करने मे शायद ही कोई तकलीफ़ हो. साथ ही टॉप ऐसा की उसके दोनो बोब्स के बीच की घाटी दूर तक जाती हुई दिखाई पड़ रही थी. सामने वाला आदमी तो भोचक्का हुए दीदी को ऊपर से नीचे तक देखता रहे।

मुझे याद है जब रजनी दीदी की शादी मुंबई के उदय शाह के साथ तय हुई थी. रजनी दीदी का रूप ही ऐसा था की हर कुंवारे मर्दो मे होड़ बनी रहती की कैसे इसे पाया जाए. लेकिन मेरे दूर के एक रिश्तेदार ने दीदी की शादी उदय से फिक्स करवा दी. उदय तो दीदी को देखते ही फिदा हो गया और शादी के लिए तुरंत हां कर दी. विवाह 2 महीने बाद होना था. उस समय मैं B.A. के लास्ट इयर मे पढ़ रही थी. वैसे खूबसूरती मैं भी कम नही हूँ. मेरा गोरा बदन और मेरा साँचे मे ढला जिस्म कइयो को रात भर तड़पाता है. ऐसा मेरा नही मेरे बॉय-फ्रेंड राकेश का कहना है. जहाँ दीदी का किसी से प्यार नही था वहाँ मेरा राकेश के साथ अफेर्स एक साल से चल रहा है. हम दोनो के शारीरिक संबंध भी बन गये. मैं दीदी के मुकाबले काफ़ी फास्ट-फॉर्वर्ड हूँ. लेकिन यहाँ आज दीदी को देखकर पता चला की मैं फास्ट-फॉर्वर्ड नही बल्कि स्लो मोशन हूँ।

शादी की दो साल बाद जब जीजाजी उदय ने शेर मार्केट से काफ़ी पैसा बना लिया तो उन्होने यह 3 बेडरूम हॉल का फ्लॅट मुंबई के प्रभादेवी इलाक़े मे खरीदा जो कि यहाँ का काफ़ी पॉश एरिया माना जाता है. दीदी के साथ उसका देवर राकेश भी रहता है. संजोग से मेरे बॉय-फ्रेंड और दीदी के देवर का नाम एक जेसा ही है. मैने दीदी से चहकते हुए पुछा, “दीदी, जीजाजी ने पैसा कमाते हुए तुझे भी कोहिनूर का हीरा जैसा बना दिया… क्या बात है..”तब दीदी ने मुझे सब तसल्ली से बताया की जीजाजी को दीदी का मॉडर्न रूप ही पसंद है।

अब उँची सोसाइटी वालों के साथ उठना बैठना हो गया तो रोज किसी ना किसी पार्टी या क्लब मे जाना पड़ता है.. वहाँ पर सभी वेस्टर्न आउटफिट्स पहने हुए नाचते गाते हुए सारी रात मस्ती करते है और देर रात बाद घर वापस आते है… दीदी ने कहा, “कल्पना, तेरे जीजाजी को यह सब ही पसंद है… अब मुझे भी यही सब अच्छा लगने लगा..” तभी मुझे जीजाजी और उनके भाई राकेश का ध्यान आया. मैने तुरंत ही पूछ लिया, “दीदी, जीजाजी और राकेश नही दिखाई दे रहे है.. कहाँ गये हुए है?” दीदी ने कहा, “तेरे जीजाजी और राकेश बिजनेस के सिलसिले मे कोलकाता गये हुए है… कल दोपहर तक आ जाएँगे… अब तू आराम कर और नहा ले.. काफ़ी थक गयी होगी..” मैं फिर नहाने चली गयी और तेयार होकर फिर से दीदी के बेडरूम मे आ गयी।

फ्लॅट के तीन रूम मे से एक दीदी का बेडरूम, एक मे राकेश और तीसरा गेस्ट रूम है जिसमे अभी मेरा समान पड़ा है. जैसे ही मैं दीदी के रूम घुसी दीदी ने कहा, “मुंबई आई है तो ऐसी ड्रेस तो छोड़ दे… यहाँ तो वेस्टर्न आउटफिट्स पहन कर मजा ले… दुर्ग मे तो तुझे पहनने का मौका मिलेगा नही..” मैं हंसते हुई बोली, “सलवार कमीज़ ठीक नही है क्या?” दीदी ने कहा, “नही.. यह बात नही… यहाँ हम लोग जब पार्टियों मे जाते है तो वेस्टर्न आउटफिट ही पहनते है.. तू भी वही सब पहन…” मैने कहा, “मेरे पास तो वो सब कुछ नही है…” दीदी ने कहा, “तो मेरे वाले पहन ले… एक सी ही फिटिंग है हम दोनो की… कोई तकलीफ़ नही होगी..” मेरा भी वेस्टर्न आउटफिट पहनने का सौक था लेकिन दुर्ग मे नही चलता था।

तभी दीदी ने अपनी अलमारी से अपनी ढेर सारी ड्रेस निकाली और मुझे दे दी और बोली, “जो पसंद है उससे पहन ले.. साथ ही 5-7 ड्रेस और निकाल ले ताकि रोज-रोज मेरी अलमारी से निकालना ना पड़े..” मैने अपनी पसंद की ड्रेस निकाल ली… ज़्यादातर स्कर्ट और ब्लाउज ही थे. इनमे से एक ड्रेस मैने अपने कमरे में जाकर पहनी. ड्रेस पहने के बाद जब मैने आईने मे देखा तो शरमा गयी. मेरा रूप कुछ ज़्यादा ही खिल पड़ा. साथ ही मेरी शरीर के दर्शन भी कुछ ज़्यादा ही हो गया. मेरी पतली जांघें स्कर्ट के नीचे से अपना पूरा जलवा दिखा रही थी. मेरी नाभि और मेरा पेट शॉर्ट स्कर्ट और शॉर्ट टॉप के बीच चमक रहा था. लो कट टॉप के कारण मेरे बोब्स खिल उठे. मेरे हाथ ने बरबस ही मेरे दोनो बोब्स को थाम लिया. मैं चहक उठी. उफ मेरा सेक्सी बदन…फिर हम दोनो बैठ कर गप-शप करने लगे. लंच और डिनर हम दोनो ने भरपूर बातें करते हुए ही लिया।

रात कब हुई पता ही नही चला. ज़्यादातर मैं ही बोलती रही. दुर्ग की बातों को याद करते रहे. फिर हम दोनो कपड़े चेंज करके सो गये. सुबह उठने के बाद, दीदी तो कहीं चली गयी. मैं घर मे अकेली ही थी. दोपहर के बाद वापस आई तो हम दोनो ने साथ ही लंच लिया. थोड़ी देर बाद जीजाजी और उनका भाई राकेश भी कोलकाता से वापस आ गये. जीजाजी मुझे देखते ही अपनी बाहों मे ले लिया.”कब आई मेरी सालीजी,” जीजाजी ने पूछा.”कल से आई हूँ लेकिन हमारे जीजाजी को फुर्सत ही कहाँ,” मैने बनावटी गुस्सा जताते हुए कहा और हम सब हंस पड़े. तभी दीदी ने अपने देवर राकेश से मिलाया. मैने कहा, “हेल्लो…” राकेश बोला, “ऐसे नही.. अपने जीजाजी से जैसे मिली वैसे ही हमारी बाहों मे..” मैने शरमा गयी और बोली, “धत्त्त..”सब हंस पड़े।

मैने राकेश को अपने जिस्म पर घूरते हुए कई बार पाया. ऐसी मिनी ड्रेस कयामत ही धाती है मर्दो पर. मुझे भी लड़को को सताने मे बड़ा मजा आता है. मेरा साँचे मे ढला जिस्म राकेश का ध्यान मेरी और बार-बार खींच रहा था. तभी जीजाजी दीदी से मुस्कराते हुए बोले, “रजनी आज रात को मिस्स. & मिस्टर. अग्रवाल आ रहे है. रात को उनके यहाँ पार्टी है. वहा जाना पड़ेगा..” यह सुनते ही दीदी का चेहरा खिल उठा. दीदी बोली, “ठीक है मैं रात को 10 बज़े तक तैयार हो जांउगी..” मैने जीजाजी से शिकायत करते हुए कहा, “क्या जीजाजी? हम तो आए है और बाहर रहने की बात करते है.” जीजाजी ने कहा, “एक दो दिन की ही बात है. फिर फ़ुर्सत से तुम्हारे साथ ही रहेंगे.”दीदी ने अपने देवर से कहा, “राकेश, क्यों न तुम कल्पना को यहाँ खुले हुए नये मल्टिप्लेक्स में मूवी दिखा देते.

फिर रात को किसी क्लब मे ले चलना. बोर नही होगी.” राकेश बोला, “ठीक है.. अभी 4 बजे है. कल्पना तुम ठीक 6 बजे रेडी रहना. फिर क्लब चलेंगे…”

शाम 6 बजे मैं और राकेश मूवी देखने पहुँचे. ओंकारा. देशी गालियो से भरी हुई मूवी ले..” आ “रग़ड डाल साली को..” जैसे कॉमेंट धीरे-धीरे पास कर रहा था. एक तो मूवी की गालियाँ और दूसरे राकेश के कमेंट्स फिल्म देखने का मेरा मजा दुगुना कर रहे थे. तभी इंटरवेल हो गया. इंटरवेल मे राकेश पॉपकॉर्न का बड़ा पेक ले आया. वापस आया तो हॉल की हल्की लाइट के बीच मेरे सामने खड़ा हो गया. मैने उसकी नज़रों को अपने दोनो बोब्स की घाटी के बीच पाया. मैने महसूस किया की उसकी पेंट चैन के हिस्से से उठ चुकी थी. वो काफ़ी तनाव मे था. मैं हल्के-हल्के मुस्कुरा उठी।

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तभी मैने जान बुझ कर अपने सिर को आगे किया और उसके तने हुए लंड पर टच कर दिया और बोली, “लो आगे निकलो और बैठो.” लंड पर मेरे सर का टच होते ही उसने अपनी आँखें बंद कर ली. मानो उसको बड़ी रिलीफ मिली हो. मैं जानती थी की यह रिलीफ नही बल्कि उसके लंड को और बेचैन कर देगा. और वही हुआ. हम दोनो पॉपकॉर्न खाने लगे. पॉपकॉर्न का बास्केट राकेश ने अपनी पेंट पर रख रखा था और शायद अपने हाथ से अपने लंड को दबा रहा था. उसके हाथ की हरकत मुझे यह महसूस करवा रही थी. लेकिन उसके मन मे तो कुछ और ही चल रहा था.

अंधेरे मे पॉपकॉर्न खाने के मेरे हाथ बार-बार उसकी पेंट से टकरा रहा था और इससे उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. उसके कमेंट्स आने बंद हो चुके थे. तभी मैने महसूस किया की मेरे हाथ मे यह गर्म-गर्म क्या लग रहा है. अंधेरे मे पॉपकॉर्न के लिए मैं अपना हाथ उसकी पेंट के ऊपर घुमा रही थी. एक कड़क और मोटी लंबी सलाख मेरे हाथ मे आ गयी. यह तो राकेश का लंड था. उसने अपना लंड अपनी पेंट की चैन खोल कर निकाल लिया था और मेरा हाथ जैसे हीवहाँ पहुँचा उसने पॉपकॉर्न के पॅकेट की जगह अपना लंड खड़ा कर रखा था।

मैं चोंक गयी. मुझे गुस्सा भी आ रहा था और मजा भी. गुस्सा इसलिए की उसने मुझे क्या समझ रखा है. एक रांड़. जिसे जब चाहो अपना खिलोना दे दो. मजा इसलिए आ रहा था की कोई लड़का मेरी जवानी के लिए तरस रहा था. लेकिन मैने गुस्से से लेकिन धीरे से कहा, “कोई तमीज नही है तुम मे..?” फिर मुहँ घुमा कर चुप-चाप बैठ गयी. थियेटर मे मैं कोई तमाशा खड़ा करना नही चाहती थी. बाकी की फिल्म हम-दोनो चुप- चाप देखते रहे. जैसे ही मूवी खत्म हुई मैं झट से उठी और बाहर निकालने लगी.

बाहर आते ही राकेश बोला, “i m सॉरी… प्लीज़ माफ़ कर दो…” मैने गुस्से मे बोली, “क्यों माफ़ कर दू ? तुम किसी भी लड़की के साथ ऐसी हरकत कैसे कर सकते हो?”

राकेश ने नज़रें झुकाए बोला, “मैं अपने आपे मे नही रहा… प्लीज़ माफ़ कर दो ना..” मैने तमाशा ना खड़े करते हुए कहा, “ठीक है.. माफ़ किया.. लेकिन आगे से मेरे साथ ऐसा नही करोगे.. समझे..” फिर हम दोनो बगैर क्लब गये घर पर आ गये. डिनर भी नही ले पाए. घर पहुँचा तो पाया दीदी और जीजाजी जा चुके थे. एक्सट्रा चाबी राकेश के पास थी. मैं सीधे अपने रूम मे चली गयी और गुस्से मे बगैर ड्रेस चेंज किए सीधे बिस्तर पर लेट गयी. राकेश हॉल मे बैठा टीवी देख रहा था. टीवी की आवाज़ कुछ देर तो सुनाई दी फिर मुझे नींद आ गयी. भूखी सोई थी।

अचानक उठ बैठी. घड़ी देखी. घड़ी मे सुबह के 4बजे थे. कितना सोई मे वो भी बगैर ड्रेस चेंज किए. उठकर पानी पिया और किचन की तरफ गयी शायद कोई बिस्किट्स वगेरह मिल जाए. हॉल की लाइट जल रही थी. राकेश वही सोफे पर ही सोया हुआ था. उसने कपड़े ज़रूर चेंज कर लिए थे. इस समय उसने केवल बॉक्सर पहन रखा था. बनियान या टी -शर्ट नही पहने हुए था.

राकेश का शरीर बड़ा ही दिलकश दिखाई दे रहा था. चेहरे पर हल्की मुस्कान. सीना नंगा और उस पर काले- काले गहरे बाल. मज़बूत फूली हुए बाहें. हाथ अपने बॉक्सर पर. बॉक्सर का आगे का हिस्सा फुला हुआ. शायद मुझे ही सपने मे देख रहा हो इसीलिए उसका लंड अकड़ा हुआ लग रहा था. अब मेरा ध्यान उसके बॉक्सर पर ही टिक गया. थियेटर मे जब उसने अपना लंड पॉपकॉर्न की जगह मुझे पकड़ाया था वो सब अब मुझे ध्यान आने लगा. उसका लंड बहुत ही गर्म था. काफ़ी लंबा और मोटा लंड था उसका. मैने ध्यान दिया की मेरा हाथ उसको पूरी तरह से पकड़ नही पाया था कारण की उसका लंड काफ़ी मोटा था.

पॉपकॉर्न की तलाश मे मैने उसका पूरा लंड नाप लिया था. काफ़ी लंबा भी था. उसको सोचते ही मैं अब उसके एक दम करीब आकर बॉक्सर को देखने लगी. वाकई मे काफ़ी लंबा और मोटा लंड था उसका. मैने अपने बॉयफ्रेंड का लंड अपने मुहँ और चूत मे लिया था लेकिन राकेश का लंड काफ़ी बड़ा लग रहा था।

मेरी मुहँ से एक सिसकारी निकल पड़ी. फिर मैं किचन की तरफ गयी मगर मुझे कुछ नही मिला. दीदी शायद कहीं और रखती थी स्नॅक्स. लेकिन कहाँ यह मुझे नही मालूम. एक बार सोचा राकेश को उठा कर पुछु मगर मैने इस वक़्त उसे उठाना मुनासिब नही समझा. पेट मे चूहे दौड़ रहे थे लेकिन क्या करती. वापस अपने रूम की तरफ आने लगी. फिर से राकेश के बॉक्सर की तरफ नज़र गयी. राकेश मस्ती मे सोया हुआ था अपने तने हुए लंड को अपने हाथ से पकड़े हुए. मेरी चूत मे इसको देखकर पानी आने लगा. बेकार मे ही उस से गुस्सा कर बैठी.

भूखी भी रही और एक मतवाले दिलवाले सांड़ को छोड़ कर सो गयी मैं. रूम की तरफ जब बढ़ने लगी तो दीदी के बेडरूम का दरवाज़ा बहुत ही हल्का खुला हुआ दिखा. रूम मे लाइट जल रही थी. मेने सोचा शायद जीजाजी और दीदी वापस आ गये है. या शायद अभी ही आए है. यह सोचकर की दरवाज़ा लॉक नही है तो उसे लॉक कर दू. शायद दीदी लॉक करना भूल गयी हो. जब बेडरूम के दरवाजे के पास पहुँची तो मुझे अजीब आवाज़ें सुनाई दी. यह आवाज़ें मुझे हॉल मे नही सुनाई दी थी।

इससे आगे कि कहानी अगले भाग में . . .

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भाभी के गांड पर टिकाया अपना लंड https://sexstories.one/bhabhi-ki-gand-bur-chodi-devar-ne-sex/ Fri, 29 Oct 2021 12:53:22 +0000 https://sexstories.one/?p=3196 मेरा लंड सीधा उनकी गांड पर टच हुआ वो बहुत डर गई और मुझे देखने के लिये पीछे पलटी.. तो में बोला भाभी आप बहुत सेक्सी हो में तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ.. तो वो अपनी आँखे बंद किये हुये कुछ नहीं बोल रही थी। में नज़दीक गया और उनके होठों पर किस किया...

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Bhabhi ki moti gand chodi मेरा नाम राज है और में कर्नाटक से हूँ। में अपनी पहली कहानी आपको बताने जा रहा हूँ। में आशा करता हूँ कि आप सबको ये कहानी पसंद आयेगी। अब में सीधा अपनी कहानी पर आ जाता हूँ। ये स्टोरी मेरी और मेरी भाभी की है। उनका नाम शबाना है और उनकी उम्र 23 साल की है और मेरी उम्र 19 साल की है। मेरे घर में सिर्फ़ में भाभी और माँ रहते है। भाई दुबई में काम करते है और पापा भी हमेशा बेंगलोर में रहते है। तो भाभी की शादी के 4 महीने के बाद भैया दुबई चले गये.. तो उसके बाद में और भाभी बहुत अच्छे दोस्त बन गये।

एक दिन मेरी माँ बाहर गई हुई थी.. तो में भाभी के रूम में गया.. भाभी सो रही थी। मैंने जाकर उनको उठाया.. तो वो बोली की क्या हुआ राज? में बोला की भाभी कहीं बाहर चलते है.. तो भाभी बोली कि नहीं में नहीं आ सकती। में बोला कि प्लीज.. तो वो नहीं मानी। फिर में अकेला ही बाहर चला गया.. लेकिन तुरंत ही वापस आ गया। में सीधा ही भाभी के रूम में गया.. तो भाभी रो रही थी। मैंने पूछा भाभी क्या हुआ क्यों रो रही हो?

भाभी – कुछ नहीं ऐसे ही मन उदास है।

में – प्लीज.. बोलो ना क्या हुआ?

भाभी – तुमसे बोलने में अजीब लग रहा है।

में – में कुछ नहीं बोलूँगा प्लीज.. बोलो।

भाभी – मैंने आज नहाते वक़्त …

में – हाँ भाभी बोलो।

भाभी – में नहाते वक़्त अपने नीचे के बाल साफ़ कर रही थी तो …

में – बोलो क्या हुआ? भाभी

भाभी – वहां पर चोट लग गई.. मुझे बहुत दर्द हो रहा है।

में – बस इतनी सी बात.. में अभी डिटोल लगा देता हूँ।

भाभी – नहीं उससे बहुत जलन होती है।

में – नहीं भाभी, कुछ नहीं होगा.. मैंने बोला ना कि कुछ नहीं होगा।

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भाभी – अगर तुम्हारे भैया होते तो मेरा कितना ख्याल रखते.. में तो अब बिल्कुल अकेली हूँ।

में – क्यों ऐसा बोल रही हो भाभी.. में हूँ ना आपका ख्याल रखने के लिये। में वहां डिटोल लगा दूँगा।

भाभी बहुत मासूम थी। वो दर्द से बहुत तड़प रही थी.. ये देखते हुये में तुरंत उनके नज़दीक गया और उनकी नाईटी को ऊपर किया.. तो वो शरमा रही थी.. लेकिन में बहुत अच्छे दिल से उनकी मदद कर रहा था.. तो जब में उनकी चोट तक पहुँच गया तो मैंने देखा की चोट ब्लेड लगने से नहीं आई थी.. बल्कि उन्होंने कुछ अपनी चूत के अंदर डाला था इसलिये वो चोट आई थी।

में – भाभी आपने अपनी चूत में क्या डाला था?

भाभी – (रोते हुये बोली) सॉरी में आउट ऑफ कंट्रोल हो गई थी।

में – लेकिन.. तुमने आख़िर डाला क्या इसमें?

भाभी – मैंने टूथ ब्रश डाला।

में – लेकिन क्यों भाभी? आप क्यों ऐसा करते हो? ये ग़लत है।

मेरी ये बात सुनते ही वो बहुत उदास हो गई और हल्की सी रोने लगी। मैंने थोड़ा डिटोल उनकी चूत पर लगाया और वहां से निकल गया.. तो दो दिन तक वो बहुत नाराज़ और उदास थी। में सोच रहा था कि भाभी की तकलीफ़ कैसे दूर की जाये.. फिर 3 हफ्ते के बाद मुझे कॉलेज से छुट्टी मिली.. तो में भाभी को उनके गावं लेकर जा रहा था.. उनका गावं 180 किलोमीटर की दूरी पर था.. तो में उनके साथ बस में बैठ गया। थोड़ी देर हमने बातें की और उसके बाद वो मेरे कंधे पर सर रखकर सो गई.. तो उनका हाथ मेरे लंड पर लगा.. फिर मेरा दिमाग़ खराब होने लगा। में बहुत सेक्सी मूड में आ गया.. तो मैंने भाभी की कमर में धीरे से हाथ डाला। वो बुरखे में थी तो हाथ बहुत फिसल रहा था। मैंने उनकी गांड पर धीरे से टच किया और धीरे से दूसरा हाथ बूब्स से टच किया.. तो उसी टाईम बस ने अचानक ब्रेक मारा तो मैंने घबराकर बूब्स प्रेस कर दिया और भाभी नींद से जाग गई।

भाभी – क्या हुआ क्या कर रहे हो?

में – भाभी वो बस अचानक रुक गई तो मेरा हाथ गलती से वहां चल गया.. सॉरी भाभी।

भाभी – कोई बात नहीं।

लेकिन में उन्हे चोदना चाहता था। बस में भीड़ बहुत हो गई। उस वक़्त बारिश का मौसम था और रास्तें में एक संदूर गावं आता है.. वहां पर जंगल जैसा एक बहुत बड़ा पार्क है। मैंने भाभी से पूछा कि हम यहाँ उतरते है और थोड़ा पार्क देखकर गावं जाते है.. तो वो मान गई.. में तारा नगर बस स्टॉप पर उतर गया और ऑटो से पार्क गये और छुट्टियाँ होने के कारण वहां कोई नहीं था। थोड़ा दूर तक चलने के बाद पानी आया तो मैंने भाभी से पूछा कि हम नहाते है यहाँ कोई नहीं है.. तो भाभी बोली कि नहीं। मैंने कहा तुम्हें मेरी कसम.. तो वो मान गई। पहले उन्होंने अपना बुरखा उतार दिया.. फिर में बोला कि भाभी आप साड़ी भी उतार दो.. यहाँ कोई नहीं है। सिर्फ़ ब्रा पेंटी में हो जाओ ना प्लीज.. तो भाभी बोली में नहीं नहा सकती। फिर मेरे बोलने के बाद वो मान गई और अपने कपड़े निकालने लगी। मेरा तो दिमाग़ खराब हो गया.. में भी सिर्फ़ अंडरवेयर में आ गया.. तो हम पानी में चले गये।

थोड़ी देर बाद में भाभी के नज़दीक गया और धीरे से उनके पीछे पीठ को टच किया.. मेरा लंड सीधा उनकी गांड पर टच हुआ वो बहुत डर गई और मुझे देखने के लिये पीछे पलटी.. तो में बोला भाभी आप बहुत सेक्सी हो में तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ.. तो वो अपनी आँखे बंद किये हुये कुछ नहीं बोल रही थी। में नज़दीक गया और उनके होठों पर किस किया और होंठो को चूसे जा रहा था.. तो भाभी ने मुझे गले से लगाया और किस करने लगी.. अभी भी हम पानी में ही थे। फिर में उन्हे गोद में ले कर थोड़ी झाड़ियाँ थी.. वहां ले कर गया और उनकी ब्रा को थोड़ी नीचे किया और बूब्स को किस करने लगा.. वो मौन कर रही थी। फिर में उनकी पूरी छाती को चाटने लगा वो भी बहुत गर्म हो गई। फिर मैंने धीरे से अपना हाथ चूत पर रखा.. तो वो उछल पड़ी और मैंने उनकी पेंटी उतार दी। मैंने उनकी चूत पर हल्का सा किस किया तो वो मेरे सर को अपनी चूत पर दबा रही थी.. में पूरे जोश में उनकी चूत चाट रहा था।

फिर में उठा और बैठ गया और मेरा 7 इंच का लंड बाहर निकाला.. तो भाभी ने उसे धीरे से टच किया और नज़दीक आने लगी। में बहुत तड़प रहा था.. वो धीरे से मेरे लंड को किस करने लगी। थोड़ी देर बाद में उठा और वहीं पर भाभी को लेटा दिया और चूत पर थूक लगाने लगा और उसने मेरे लंड पर थूक लगाया और धीरे से लंड चूत में डाला.. तो वो अंदर नहीं जा रहा था.. क्योंकि मेरा पहला सेक्स था.. तो मैंने फिर ट्राई किया। फिर लंड थोड़ा अंदर गया.. तो मैंने एक जोरदार धक्का मारा.. तो भाभी चिल्ला पड़ी और तड़पने लगी.. इस तरह में उनको जोर से चोदने लगा और 20 मिनट बाद बिना बोले उनकी चूत में अपना पानी छोड़ दिया.. तो वो बोली कि ये तुमने क्या किया? में तो अब प्रेग्नेंट हो जाउंगी। मुझे जल्दी मेडिकल ले जाओ.. वरना बहुत बड़ी प्रोब्लम हो ज़ायेगी.. तो मैंने जल्दी अपने कपड़े पहने और भाभी ने भी अपनी साड़ी पहनी। फिर हम पार्क से सीधा सिटी में गये और आई-पिल खरीदी और भाभी को खिलाई। उसके बाद हमने गावं जाकर बहुत मस्ती और खूब सेक्स किया ।।

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बहन का देवर – पार्ट ३ https://sexstories.one/behan-ka-devar/ Sun, 17 Oct 2021 09:27:23 +0000 https://sexstories.one/?p=3025 राकेश ने अपने मुहँ को और नीचे किया और मेरी नाभि का चाटने लगा. यह सब मेरे बर्दाश्त से बाहर हो रहा था. मैं आँखें बंद किए शावर के ठंडे पानी से भीगती हुई ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रही थी. राकेश ने अपनी एक हथेली मेरी पेंटी पर रख दी और…मेरी चूत को रगड़ने लगा.

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मैं उत्सुकता के कारण दरवाजे के पास खड़ी हो गयी और दरवाज़ेके करीब अपना कान लगा दिया. यह क्या? उम्म्म.. हाआअँ… उफफफ्फ़… जैसी सिसकारियाँ सुनाई दे रही थी. यह लोग क्या टीवी पर ब्लू फिल्म देख रहे है? सोचते ही मन मे और देखने की तमन्ना जाग उठी. दीदी के बेडरूम का टीवी रूम के दरवाजे से सॉफ दिखता था. मैं भी क्यों ना इस ब्लू फिल्म को देखु यह सोचकर दरवाजे को थोडा और खोल दिया. देखते ही मैं सकते मे आ गयी. desi incest sex

यहाँ टीवी पर ब्लू फिल्म नही बल्कि लाइव टेलीकास्ट चल रहा था. बेड पर दो नही बल्कि चार जने थे. ग्रूप चुदाई चल रही थी. क्या है यह सब? कौन है यह लोग? दिल मे कई प्रश्न थे. गौर से देखा तो मालूम पड़ा की नीचे कोई एक मर्द लेटा हुआ अपने ऊपर रजनी दीदी को लेटा रखा था और अपना लंड दीदी की चूत मे डाल रखा था. दीदी की पीठ पर जीजाजी सोए हुए थे और अपना लंड दीदी की गांड मे डाल रखा था।

तीनो के सामने एक लड़की पलंग के ऊपर बैठी हुई थी. उसकी चूत को नीचे सोया हुआ आदमी अपनी जीभ से चाट रहा था और दीदी उसके एक बोब्स को अपने मुहँ मे ले रखा था. दूसरा बोब्स लड़की ने आँखे बंद किए हुए पकड़ रखा था. मेरे जीजाजी दीदी की गांड, मारते हुए उस लड़की का होंठ और चेहरा चूम रहे थे. उफ़फ्फ़! दीदी और जीजाजी ऐसी हालत मे. मेरा दिमाग ही घूमने लगा. मेरी आँखें ही बंद होने लगी. दीदी इतनी मॉडर्न हो गयी. कल तक की एक छोटे शहर की सीधी-सादी लड़की आज ब्लू फ़िल्मो की हिरोईन्स को भी मात दे रही थी. वाकई मे कोई कितना जल्दी बदल जाता है. अब मैने फिर से आँखें खोली और उनको हैरत से देखती रही. एक धक्का नीचे से लगा रहा था तभी दूसरा धक्का ऊपर से जीजाजी गांड मे मार रहे थे. आवाजे अब साफ सुनाई दे रही थी।

Desi incest sex झांट वाली सेक्सी बड़े चुके वाली बीवी के पिक्स

सब लोग उफ़फ्फ़..हाइईइ.. ह.. करते हुए सिसकारियाँ ले रहे थे. आवाज़ें धड़ल्ले से आ रही थी. तभी दीदी बोली, “अग्रवाल.. स्टॉप…”अब मुझे समझ मे आया की यह कौन है. दोपहर मे जब जीजाजी ने कहा की मिस्स. & मिस्टर. अग्रवाल आ रहे है और दीदी का चेहरा खिल उठा था. यानी यह ग्रूप मे चुदाई के लिए एकत्रित हुए थे. उनकी चुदाई देखते हुए मैं मस्त हो गयी. मेरा हाथ मेरी मिनी स्कर्ट के अंदर चला गया और भीगी हुई चूत को सहलाने लगा. दूसरा हाथ मेरे टॉप के ऊपर से ही अपने बोब्स को दबाने लगा. मेरे मुहँ से सिसकारियाँ निकल रही रही थी. बेड रूम मे से कोई बाहर आने वाला नही था. सिवाय अग्रवाल के किसी की नज़र मुझ पर नही पड़नी थी. और मिस्स. अग्रवाल का चेहरा जीजाजी ने ढ्ख रखा था उसका चुंबन लेने के लिए।

मैं बेकौफ़ होकर अपनी चूत मे पेंटी को साइड कर अपनी अंगुली डाल दी. लाइव टेलीकास्ट के साथ मैं भी चुदसी हो गयी. कोई मुझे भी अपनी बाहों मे ले. कोई मेरे भी बोब्स चूसे. कोई मुझे भी चोदे. मैं आँखें बंद किए हुए अपनी चूत को अपनी अंगुली से रग़ड और छोड़ रही थी. मेरी सिसकारियों की आवाज़ तेज हो रही थी की अचानक किसी ने मुझे अपनी बाहों मे ले लिया. और मेरे होंठो को चूमने लगा. मैं घबरा कर अपनी आँख खोली. यह तो राकेश था. मैने उस से अपने से अलग करना चाहा और कुछ बोलने लगी ही थी की राकेश ने अपने होंठ पर एक अंगुली रख कर मुझे चुप रहने का इशारा किया. फिर मुझे उसने अपनी बाहों मे उठा लिया.

मैं विरोध करने की परिस्थिति मे नही थी. मेरे पूरे बदन मे सामूहिक चुदाई को देखते हुए वासना की लहरें उठ रही थी. मेरी साँसे गर्म हो चुकी थी. मेरे बोब्स उन गहरी सांसो के साथ काफ़ी ऊपर-नीचे हो रहे थे. राकेश के नंगे सीने पर हाथ रख कर मैं और मतवाली हो गयी. तभी राकेश ने मुझे कोई विरोध ना करते हुए देख मुझे बाहों मे लिए मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए. मैं तड़प उठी. उसकी बाहों मेरा तन-बदन मचल उठा. उसने अपनी गिरफ़्त बढ़ा दी और अपनी जीभ मेरे मुहँ मे डाल दी. राकेश के बेडरूम मे पहुँचते ही मैं उसकी बाहों से उतर गयी लेकिन राकेश ने मुझे अपनी बाहों से आज़ाद नही किया और ना ही मेरे सुलगते होंठो को छोड़ा. उसने अपने आलिग्न मे मुझे कस कर जकड़ लिया और मेरे सुर्ख गुलाबी होंठो को चूमता जा रहा था. मुझे ऐसी दीवानगी ही पसंद थी।

मैं चाह भी रही थी की राकेश मेरे होंठो का सारा रस पी ले. तभी राकेश ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे बदन पर चढ़ गया. उसने अपने बदन से मेरे बदन को मसलते हुए मेरे गाल, मेरे कान और मेरी गर्दन को चूमता रहा. अपने गरमा-गर्म चुंबनो की छाप छोड़ता रहा. मैं सुलग उठी. मुझ से रहा नही जा रहा था. अब मैं भी उसके चुंबनो का जवाब अपने गर्माते चुंबनो से देने लगी. उसके कान और उसकी गर्दन बेतहासा चूमने लगी. उसे चूमते हुए मेरा दिल धड़क रहा था. और मन मे ही यह शायरी आ गयी: चूम लू होंठ तेरे, दिल की यह ख्वाइश है! यह ख्वाइश हमारी नही, यह तो दिल की फरमाइश है! काफ़ी देर की चुम्मा चाटी के बाद हम दोनो की साँसे उखड़ने लगी थी. तभी राकेश खड़ा हो गया और मुझे फिर अपनी बाहों मे उठा कर बाथरूम की और ले चला. बाथरूम मे पहुँचते ही उसने शावर चालू कर दिया. मैं और राकेश आपस मे चिपके हुए शावर के नीचे भीगने लगे।

सुबह-सुबह का ठंडा पानी पड़ते ही मैं और राकेश दोनो काँपने लगे. लेकिन दोनो के चिपके हुए जिस्म आपस मे एक दूसरे को गर्मी भी दे रहे थे. मेरे टॉप मे से अब मेरी ब्रा झाँकने लगी. राकेश ने अपने मुहँ को मेरी गर्दन से नीचे लाते हुए मेरे दोनो बोब्स के बीच की घाटी मे अपनी जीभ डालने लगा. उसने अपने दांतो से मेरे टॉप के बटन को खोलने लगा. दो-तीन मिनट की कोशिश के अंदर ही मेरा टॉप नीचे उतर गया. अब मेरी ब्रा मे से मेरे बोब्स की गोलाई और निप्पल का कलर दिखाई पढ़ रहा था. राकेश ने अपने हाथ आगे बढाते हुए मेरे दोनो बोब्स को चोली के साथ ही थाम लिया और अपनी अंगुलियों से दबाने लगा. मैं सिहर उठी. उत्तेजना के मारे मुहँ से सिसकारियाँ निकल रही थी।

Ghar me chudai रिश्तेदार के भाई की बेटी – भाग २

मैने राकेश की कमर को कश कर जकड़ लिया और उसकी जांघों के बीच अपनी जांघें घुसाने लगी. इधर राकेश ने मेरी चोली के ऊपर से ही मेरे दोनो बोब्स को बारी-बारी से अपने गाल से रगड़ने लगा. अब मुझ से रहा नही जा रहा था. मैने सिसकारी भरते हुए कहा, “राकेश.. निकाल फेंको मेरी चोली को और मेरे दोनो क़ैद कबूतरो को आज़ाद कर दो… इनको अपने मुहँ मे लेकर चाटो… राकेश..” मेरी बात को सुनकर राकेश ने अपने हाथ से मुझे दीवार की और धकेल दिया और मुझे पलट दिया. अब मेरी पीठ राकेश के सामने थी. राकेश ने अपनी जीभ से मेरी पूरी पीठ को चाटने लगा. जिससे मेरे पूरे जिस्म मे वासना की लहरे और ज़ोर मारने लगी. मैं काँप रही थी. इस बार पानी के ठण्डेपन से नही बल्कि उसकी हरकतो के कारण।

मैने सिसकारी लेते हुए अपना चेहरा ऊपर उठाया और शवर के पानी को अपने चेहरे पर पड़ने दिया. तभी राकेश ने अपने दाँत से मेरी चोली का हुक खोल दिया और मुझे पलट कर अपनी बाहों मे जकड़ लिया. अब मेरे दोनो कबूतर चोली से आज़ाद होकर राकेश के सीने से सट गये. मैं सेक्स के हिलोरे लेते हुए अपने दोनो बोब्स को उसके सख़्त सीने से रगड़ने लगी. ऐसा करते देख राकेश ने मेरे होंठो को फिर अपने होंठो की गिरफ़्त मे ले लिया और लगा मेरे मादक होंठो का रस पीने. मुझसे रहा नही जा रहा था. मैने राकेश के दोनो हाथो को पकड़ा और अपने दोनो बोब्स उसकी हथेली की गिरफ़्त मे दे दिए. और बोली, “राकेश.. अब रहा नही जा रहा है. पकड़ के रग़ड दो इन शैतानो को… मुझे अपनी बाहों मे लेकर मेरे दोनो बोब्स (बोब्स) को मसल दो. इन्हे अपने मुहँ मे लेकर चूसो राकेश.. “राकेश ने अब अपने दोनो हाथो से मेरे भरे हुए सख़्त बोब्स को जकड़ लिया और लगा उन्हे मसलने।

मसलने के साथ ही मेरी सिसकारियाँ बढ़ गयी. मैं झूम उठी. मैं पानी से भीगते हुए राकेश की हरकतो का मजा ले रही थी. राकेश मेरे दोनो कबूतरो को मसलते हुए चूम रहा था. मेरे दोनो निपल्स उसके मुहँ मे बारी- बारी से जा रहे थे. साथ ही मैं उसके सिर को पकड़ कर मेरे सीने पर ज़्यादा से ज़्यादा दबाने मे लगी हुई थी. अब राकेश ने अपने एक हाथ से मेरी स्कर्ट की ज़िप खोल दी. मेरे स्कर्ट मेरे टागो से चिपकती हुई नीचे गिरने लगी।

राकेश ने अपने मुहँ को और नीचे किया और मेरी नाभि का चाटने लगा. यह सब मेरे बर्दाश्त से बाहर हो रहा था. मैं आँखें बंद किए शावर के ठंडे पानी से भीगती हुई ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रही थी. राकेश ने अपनी एक हथेली मेरी पेंटी पर रख दी और…मेरी चूत को रगड़ने लगा. हाईईईई… मेरी तो जान ही अटक गयी. एक तो राकेश की थियेटर की हरकत और दूसरी दीदी के रूम मे चल रही सामूहिक चुदाई ने मुझे वासना से भर कर रख दिया था. अब राकेश की भरपूर हरकतो ने मुझे उतावला कर दिया. राकेश ने अपने दूसरे हाथ से मेरी पेंटी को नीचे उतार दिया और मैं एकदम मर्दजात नंगी उसके सामने भीगती हुई खड़ी थी. राकेश अब थोड़ी दूर होकर मुझे निहारने लगा. मेरे जिस्म की शराब को अपनी आँखों से पीने लगा. तभी तो किसी शायर ने क्या खूब कहा है:.”हुस्न पर जब मस्ती छाती है, शायरी पर बहार आती है.., पी कर महबूब के बदन की शराब, जिंदगी झूम-झूम जाती है…”ऐसा ही हाल उसके लंड का था जो बॉक्सर के अंदर झूम रहा था।

मेरे बदन की शराब का नशा मैं उसके लंड पर देख रही थी जोकि बॉक्सर के बटन के बीच अटका हुआ था. उसका लंड मेरे हुस्न का दीदार करने को उतावला हो चुका था. यह कमीना बॉक्सर ही उसके आड़े आ रहा था. उसका लंड बॉक्सर के बटन्स के बीच से चीख-चीख कर कह रहा था: पलट के देख ज़ालिम, तमन्ना हम भी रखते हैं, हुस्न तुम रखती हो तो जवानी हम भी रखते हैं.. गहराई तुम रखती हो तो लंबाई हम भी रखते हैं…अब मुझसे रहा नही जा रहा था. दिल तड़फ़ रहा था लाइट के उजाले उसे भरपूर देखने के लिए।

इससे आगे कि कहानी अगले भाग में . .

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