meri chut ki chudai Archives - Antarvasna https://sexstories.one/tag/meri-chut-ki-chudai/ Hindipornstories.org Sat, 29 Jan 2022 07:28:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.1 मुझे पता है तुम मुझे चोदोगे https://sexstories.one/tum-meri-bur-chodo/ Sat, 29 Jan 2022 07:28:00 +0000 https://sexstories.one/?p=4534 उसकी चूत से पानी निकलने लगा था और वह मचलने लगी, वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने उसके नाडे को तोड़ दिया और उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा...

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Meri bur Chodo  मेरा दोस्त एक बार मुझे अपने घर लेकर जाता है मैं जयपुर का रहने वाला हूं मेरे दोस्त गौरव का घर अजमेर में है। गौरव मुझसे कहता है की तुम कुछ दिनों के लिए मेरे साथ अजमेर चलो, गौरव और मैं एक साथ एक ही कंपनी में नौकरी करते हैं। गौरव की बात को मैं मना ना कर सका और उसके साथ मैं उसके घर अजमेर चला गया, मैं जब उसके घर गया तो मैंने देखा उसके परिवार में काफी लोग हैं उसका परिवार काफी बड़ा था मैंने गौरव से कहा तुम्हारा परिवार तो बहुत बड़ा है, गौरव कहने लगा हां हम सब लोग एक साथ रहते हैं और हमारे परिवार में कभी भी कोई झगड़ा नहीं होता सब लोग मिलजुल कर एक दूसरे का पूरा साथ देते हैं।

गौरव के पिताजी का व्यवहार भी मुझे बहुत अच्छा लगा और उनके साथ मैं जब भी बात करता तो मुझे अपने पिताजी की याद आ जाती मैं उन्हें कहता कि मैं जब भी आपसे बात करता हूं तो मुझे अपने पिताजी की याद आ जाती है, वह कहने लगे कि बेटा मैं भी तुम्हारे पिताजी की उम्र का हूं और तुम्हें जब भी मेरी जरूरत हो तो तुम मुझे कहना क्योंकि मेरे पिताजी का देहांत कुछ वर्ष पहले हो चुका था और उसके पिताजी मुझे उसी तरीके से समझते थे जिस प्रकार से मेरे पिताजी मुझे समझाया करते थे।

मैं उसके घर पर 4 दिन रहा लेकिन इन 4 दिनों में मुझे ऐसा लगा कि जैसे वह मेरा ही घर हो,  मुझे बहुत अच्छा लगता है जब भी गौरव और मैं साथ में होते हैं, गौरव मुझे हमेशा कहता कि राज तुम एक बहुत अच्छे लड़के हो और जब से मेरी दोस्ती तुमसे हुई है तुमने मुझे कभी भी कोई परेशानी नहीं आने दी, हम लोग जब अजमेर से वापस लौट रहे थे तो बस में ही मुझे एक लड़की दिखी शायद वह भी जयपुर जा रही थी वह हमारे सामने वाली सीट में बैठी हुई थी मैं उसे ही देखे जा रहा था और मैं उसे बड़े ही ध्यान से देखता लेकिन जब वह अपनी बड़ी बड़ी आंखों से मेरी तरफ देखती तो मैं अपनी नजर झुका लेता, मैंने गौरव के कान में कहा यार यह लड़की मुझे बहुत पसंद आ रही है क्या इससे मेरी बात हो सकती है, गौरव मुझे कहने लगा राज तुम एक काम करो उस लड़की को एक चिट्ठी लिखो, मैंने उसे कहा तुम्हारा दिमाग सही है आजकल के जमाने में भला कौन चिट्ठी देता है, वह मुझे कहने लगा तुम ऐसा करो तो सही।

मैंने भी एक पेपर में अपना नाम और उस लड़की के बारे में थोड़ा बहुत लिखा जिससे कि वह लड़की प्रभावित हो सके और मैंने वह पेपर उसकी तरफ फेंक दिया उसने जब वह पेपर खोल कर देखा तो वह मुस्कुराने लगी, मुझे कहां पता था कि वह भी मुझे अपना नंबर दे देगी उसने उसी पेपर के पीछे अपना नंबर लिख कर मेरी तरफ फेंक दिया मुझे जब उसका नंबर मिला तो मैं बहुत खुश हो गया मैंने गौरव से कहा यार तुम्हारा तो कोई जवाब ही नहीं है क्योंकि वह लड़की अपने पिताजी के साथ बैठी हुई थी इसलिए उस वक्त तो उससे बात नहीं हो सकती थी परंतु जब हम लोग जयपुर पहुंच गए तो मैंने अपने घर से उसे फोन किया और उसका नाम पूछा, उसका नाम कविता है।

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मैंने कविता से पूछा तुम क्या करती हो तो वह कहने लगी कि मैं फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही हूं और हम दोनों एक दूसरे से घंटों बात किया करते हैं लेकिन मै कविता से मिल नहीं पाया था और उससे मिलने के बारे में एक दिन मैंने सोची, मैंने गौरव से कहा यार आज मैंने कविता से मिलने की सोची है क्या तुम मेरे साथ चलोगे, गौरव कहने लगा क्यों नहीं उस दिन हमारे ऑफिस की छुट्टी भी थी और हम दोनों अच्छे से बन ठन कर कविता से मिलने के लिए चले गए जब हम दोनों कविता से मिलने गए तो कविता के साथ उसकी एक सहेली भी आई हुई थी और हम लोग जिस जगह बैठे हुए थे वहां पर हम लोग एक दूसरे को देखते रहे मैंने सोचा कि पहले कविता कुछ कहे लेकिन 5 मिनट तक तो हम लोग कुछ भी बात नहीं कर पाए, तब गौरव ने कहा कि तुम लोग तो बिल्कुल ही चुप हो गए क्या एक दूसरे से कोई बात नहीं करोगे? तब जाकर कविता ने मुझसे बात की कविता मुझसे कहने लगी मुझे तुमसे बात करने में थोड़ा अजीब लग रहा है, मैंने कविता से कहा मुझे भी काफी अजीब लग रहा है क्योंकि मैं पहली बार किसी लड़की से बात कर रहा हूं।

अब हम लोगों की बातें शुरू हो चुकी थी और हम सब लोग एक दूसरे की बातों में इतने खो हो गए कि समय का पता ही नहीं चला उस दिन हम लोगों ने एक साथ 4 घंटे साथ में बिताए लेकिन मुझे लगा कि शायद 4 घंटे भी कम है जब गौरव और मैं वापस लौटे तो मैंने कहा यार आज तुम्हारी वजह से मैं कविता से बात कर पाया, गौरव मुझे कहने लगा राज मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं और उसके बाद कविता और मैं एक दूसरे से मिलने लगे, हम दोनों जब एक दूसरे से मिलते तो एक दूसरे को जरूर कोई ना कोई गिफ्ट दिया करते एक दिन मुझे कविता का फोन आया और कहने लगी कि मैं कुछ दिनों के लिए दिल्ली जा रही हूं शायद तुम से मेरी बात ना हो पाए, मैंने कविता से पूछा लेकिन तुम दिल्ली से कब लौटोगी तो कविता कहने लगी कि मैं दिल्ली से एक महीने बाद आऊंगी।

मैंने सोचा कि चलो आज रात मैं कविता से बात कर सकता हूं, मैंने कहा चलो ठीक है हम लोग एक महीने तक बात नहीं करेंगे लेकिन आज पूरी रात मैं तुमसे बात करना चाहता हूं, कविता कहने लगी ठीक है, उस दिन वह चोरी छुपे मुझसे फोन पर बात करने लगी मैंने उससे लगभग सुबह के 4:00 बजे तक बात की और जब मेरी आंख लगी तो मुझे भी पता नहीं चला कि समय क्या हो गया है उस दिन मैं ऑफिस भी नहीं जा पाया क्योंकि 4:00 बजे जब मैं सोया तो मेरी आंखें नहीं खुली जब मैंने अपने फोन को देखा तो मेरे फोन पर गौरव ने 20 बार कॉल किया हुआ था।

मैंने गौरव को कॉल बैक किया और कहा कि आज तो मैं ऑफिस नहीं आ सकता मैंने गौरव को सारी बात बताई गौरव कहने लगा चलो कोई बात नहीं तुम आज आराम करो और मैं उस दिन घर पर ही था लेकिन मुझे अजीब सी बेचैनी होने लगी मेरा मन कविता से बात करने का होने लगा परंतु उससे मेरी बात हो ही नहीं सकती थी और इसी वजह से मुझे टेंशन होने लगी, मैंने जब गौरव को यह बात बताई तो गौरव कहने लगा चलो कोई बात नहीं एक महीने तो ऐसे ही कट जाएगा तुम्हें कुछ पता भी नहीं चलेगा लेकिन मेरा मन तो सिर्फ कविता से बात करने का था और कविता और मेरी सिर्फ मैसेज के द्वारा ही बात हो पाती, कविता मुझसे सिर्फ इतना ही कहती कि मैं ठीक हूं इससे ज्यादा मेरी उससे बात ही नहीं हो पाती, मैंने कविता से कहा कि मैं तुम्हें बहुत मिस कर रहा हूं और तुमसे फोन पर बात करना चाहता हूं लेकिन कविता ने रिप्लाई किया कि अभी यह संभव नहीं हो पाएगा।

मैं हमेशा सोचता कि कब एक महीना कटेगा, धीरे-धीरे समय भी कटता गया और एक दिन मुझे कविता का फोन आया जिस दिन मुझे कविता का फोन आया मैंने उसे कहा कि मुझे तुमसे आज मिलना है, कविता कहने लगी कि आज तो मैं नहीं मिल पाऊंगी क्योंकि आज ही मैं दिल्ली से लौटी हूं कल हम लोग मिल लेते हैं, मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुमसे कल मुलाकात करता हूं, रात भर मैं कविता से बात करता रहा और उसे मैंने बताया कि मैंने उसका इंतजार कितनी बेसब्री से किया। मैं जब अगले ही दिन कविता को मिला तो मैंने उसे देखते ही गले लगा लिया। वह मेरे साथ मेरे घर पर आई हुई थी मैंने कविता के होठों को भी चूमना शुरू किया।

उसके गालों पर मैंने किस किया तो वह मुझे कहने लगी तुम यह सब क्या कर रहे हो मैंने उसे कहा मैं तुम्हारा बेसब्री से इंतजार कर रहा था और इतने दिनों से मैं तुमसे बात नहीं कर पाया तुम्हें पता है मैंने तुम्हें कितना मिस किया। वह कहने लगी मुझे भी मालूम है मैंने भी तुम्हें बहुत मिस किया लेकिन इस बीच मेरी तुमसे बात ही नहीं हो पाई। कविता और मैं एक दूसरे के होठों को चूमते रहे हम दोनों के अंदर गर्मी बढ़ने लगी। मैंने कविता के स्तनों को अपने हाथों से दबाना शुरु किया और कविता के सलवार के अंदर जब मैंने अपने हाथ को डाला तो उसकी चूत को मैं अपने हाथों से सहलाने लगा। उसकी चूत से पानी निकलने लगा था और वह मचलने लगी, वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मैंने उसके नाडे को तोड़ दिया और उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। जब मैंने उसकी चूत को चाटा तो उसे भी बहुत अच्छा महसूस होता, काफी देर तक मैंने उसकी कोमल चूत के मजे लिए। मैंने कविता से कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो, उसे मेरे लंड को अपने मुंह मे लेने मे कोई आपत्ति नहीं जताई और अपने मुंह में ले लिया।

वह लंड को संकिग करने लगी काफी देर तक तो वह मेरे लंड को चुसती रही, मेरे लंड ने भी पूरा पानी बाहर की तरफ को छोड़ना शुरू किया था। मैंने कविता की चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दिया, जैसे ही मेरा मोटा लंड कविता की चूत में प्रवेश हुआ तो वह चिल्लाते हुए मुझे कहने लगी मुझे बहुत मजा आ रहा है। वह अपने दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मुझे कहने लगी मेरी चूत को मजा आने लगा है। उसकी चूत से खून निकलने लगा, मैंने उसे कहा तुमने जैसे पहले कभी सेक्स नहीं किया। वह कहने लगी मैंने पहले कभी भी सेक्स नहीं किया, मैं और कविता एक दूसरे के साथ काफी देर तक सेक्स करते रहे, जब मेरा वीर्य मैंने कविता की योनि में गिराया तो वह मुझे कहने लगी मुझे कोई कपड़ा दे दो। मैंने उसे कपड़ा दिया उसने अपनी चूत को अच्छे से साफ किया और उसने अपने कपड़े पहन लिए। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही ज्यादा खुश थे उसके बाद भी कविता और मेरी हमेशा बात होती रहती। जब भी कविता मुझे फोन करती तो मैं उसे कहता तुम मुझसे मिलने आ जाओ लेकिन वह मुझसे मिलने नहीं आती।

वह कहती यदि मैं तुमसे मिलने आऊंगा तो तुम मेरी चूत मारोगे लेकिन फिर भी मैं उसे अपने पास बुला ही लेता।

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कमरे के लिए लड़के ने मेरी चूत की आग बुझाई https://sexstories.one/meri-pyasi-chut-ki-chudai/ Fri, 26 Nov 2021 07:55:49 +0000 https://sexstories.one/?p=3431 मैं उसकी होठो को ऐसे ही कुछ देर तक चूसने के बाद मैंने उसके कपडे निकाल दिए और उसने मेरे कपडे निकाल दिए | वो मेरे सामने अंडरवियर में आ गया था और मैं उसके सामने ब्रा और पैंटी में थी | वो मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से पकड कर दबाने लगा...

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meri pyasi chut ki chudai हेल्लो दोस्तों मेरा नाम सुमिता है | मैं आज सेक्सी कहानी पढ़ाने वालो के लिए अपनी एक कहानी को लेकर आई हूँ | मैं जो आज कहानी आप लोगो के सामने प्रस्तुत करने जा रही हूँ ये मेरी पहली कहानी है और मेरे जीवन की सच्ची घटना है | मैं अपनी कहानी शुरू करने से पहले अपने बारे में बता देती हूँ | मैं रहने वाली तम्बोर की हूँ और मेरी शादी होने के बाद मैं अपनी पति के घर रहती हूँ | मेरी उम्र 38 साल है | मेरी हाईट 5 फुट 3 इंच है और मेरा रंग गोरा है | मैं दिखने में अभी भी बहुत सेक्सी लगती हूँ और मेरा फिगर अब बहुत ही सेक्सी है |

दोस्तों अब मेरे अन्दर चुदाई की इच्छा कुछ ज्यादा ही जग गयी है और मेरे पति अब मेरी चुदाई की इच्छा को पूरी नही कर पाते हैं | मैं आप लोगो को अपने पति के बारे में बता देती हूँ | उनका नाम हरी प्रशाद है और उनकी उम्र 42 साल है | उनकी उम्र के साथ उनकी जवानी भी ढल गयी | पर मेरे अन्दर चुदाई की इच्छा ज्यादा हो गयी है | अब मेरे पति मेरी चुदाई तो करते हैं पर उनका लंड मेरी चूत की आग को नही संत कर पाता है | दोस्तों मैं जो कहानी आप लोगो के सामने प्रस्तुत करने जा रही हूँ | मैं आप लोगो से आशा करती हूँ की आप लोगो को पसंद आयेगी और इस कहानी को पढ़ने में आप लोगो को मज़ा भी आएगा | अब मैं बिना टाइम को बर्बाद किये सीधे कहानी पर आती हूँ |

ये कहानी 1 साल पहले की है | दोस्तों मेरे पति एक सरकरी जॉब करते हैं और वो जॉब की वजह से घर कभी कबार आते हैं | जब वो घर आते हैं तब मेरी चुदाई करते हैं | पर वो मेरी चुदाई की इच्छा को पूरी नही कर पाते है जिसकी वजह से मेरे अन्दर चुदाई की इच्छा रह जाती है | अब मैं क्या चाहती हूँ की कोई मेरी चुदाई खूब करे और वो जब मेरी चुदाई करते हैं तो 5 मिनट में ही झड़ जाते हैं | फिर सो जायंगे | इसलिए मैंने सोचा की अब ये मेरी चुदाई की इच्छा नही पूरी कर पाएंगे तो मैं अब किसी जवान लकड़े के लंड से चुदना चाहती थी और मैं किसी लकड़े हट्टे कट्टे लड़के की तलास करने लगी |

कुछ दिनों बाद मुझे मेरे मोहल्ले में एक लकड़ा दिखा और मैं उस लकड़े को पहली बार देख रही थी | फिर मैंने पता किया तो मुझे पता चला की वो लकड़ा मेरे घर के सामने वाले घर में कमरा किराए से लेकर रुक रहा है | अब मैं रोज ही उस लड़के को देखती और सोचती की कब इसके मोटे लंड को अपनी चूत में लेकर चुद पाऊँगी | अब मैं प्लान बनाने लगी | कुछ दिन बाद जब वो अपने घर में जा रहा था तो मैंने उसे आवाज दी और कहा बेटा कुछ काम है करा दो | वो बोला रूको सामन रख आता हूँ | फिर वो सामन रख कर आया | मैं उसे अपने बेडरूम में ले गयी और अपने बेडरूम में अलमारी उठवाने लगी | मैं अलमारी उठवा ही रही थी की मैंने चोट लगने का नाटक किया | वो मुझे ऐसे देख रहा था की मैं आप लोगो को क्या बताऊँ | मैं वहीँ जमीन पर बैठ गयी तो उसने मुझे अपनी बाँहों में उठा कर बेड पर लेटा दिया | तब मैंने उससे कहा यार पैर में बहुत दर्द हो रहा है | बाम लगा कर मालिश कर दो | उस लड़के ने पहले तो माना कर दिया |

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फिर कुछ देर तक सोचने के बाद बोला लाओ लगा दूँ | जब उसने ये बाद कहीं तो मैं तुरंत बेड से बाम निकाल कर दिया और बोली लो प्यार से मालिश करना | उसने अपने हाथ में बाम पकड़ा और लगाने लगा | तब मैंने उससे उसका नाम पूछा उसने अपना नाम राकेश बताया | फिर बोला आंटी मैं तुम्हे क्या बोल सकता हूँ | मैंने उससे कहा आंटी क्यूँ बोल रहे हो तुम्हारा जो मन हो बोल सकते हो | मैं उसको सेक्सी नज़रो से देख रही थी | फिर मैंने उससे कहा राकेश तुम यहाँ क्या करते हो | उसने कहा मैं पढाई करता हूँ | वो बोला आंटी आपके के घर में कौन कौन रहता हैं | मैंने उससे कहा मेरे घर में अकेली ही रहती हूँ | मेरे पति तो कभी कभी घर में आते हैं और मेरा एक लकड़ा है जो बाहर जॉब करता है | वो बोला इतने बड़े घर में अकेली कैसे रहती हो आपको अच्छा भी लगता हैं इतने बड़े घर में अकेले |

मैंने उसे कह दिया अगर तुम्हारा मन हो तो तुम मेरे घर में रह सकते हो और मैं कोई किराया नही लुंगी | वो बोला सच में पर क्यूँ नही किराया लोगी | मैंने कहा बस ऐसे ही तुम मुझे अच्छे लगते हो | दोस्तों मैं उसे अपने जाल में धीरे धीरे फांस रही थी और वो फंस रहा था | वो मेरी टांग पर मालिश कर रहा था और मैं अपनी जांघ को धीरे धीरे पुरी खोल दी | वो मेरी गोरी जांघ को घुर घुर कर देखने लगा | जब वो मेरी जांघ को घुर घुर कर देखने लगा तो मैंने अपने ब्लाउज की 2 बदन खोल दी | वो ये देख कर समझ गया था की मैं क्या चाहती हूँ | पर वो करने में डर रहा था | वो मेरी जांघ को जोर जोर से मसल रहा था और मैं मस्त सेक्सी आवाजे करने लगी | वो मेरी ये आवाजे सुनकर मेरे बड़े बड़े बूब्स की तरफ तिरछी नज़रो से देखने लगा | फिर वो कुछ देर बाद बोला मैं जा रहा हूँ |

तब मैंने उससे कहा रुको यार कहाँ जा रहे हो सामने ही हो कुछ देर बाद चले जाना | वो मेरे इशारे को समझ रहा था पर जान कर भी अंजान बनने का नाटक कर रहा था | फिर जब वो मेरे पास बैठ गया तो मैंने उसके एक हाथ को अपने हाथो में पकड लिया और दुसरे हाथ को पकड कर अपनी कमर पर रख दिया | दोस्तों जब मैंने उसके हाथ को अपनी कमर पर रखा तो वो एकदम चौंक गया और बोला ये क्या कर रही हो आप | मैंने भी खोल कर कह दिया यार मैं तुम से चुदना चाहती हूँ | मैं तुमको रोज ही देखती हूँ और तुम मुझे बहत अच्छे लगते हो | अगर तुम मेरी चूत की आग बुझा दो तो मैं तुम्हे घर रहने के लिए दे दूंगी और खाना भी बना कर दूंगी और सब काम तुम्हारे करुँगी | बस तुम मुझे रोज खुश कर दिया करो | उसने कहा अगर तुम्हरे पति ने कुछ कहा तो मैंने कहा तुम उसकी चिंता न करो वो मुझे पास छोड़ दो |

फिर मैंने उसके सर को अपने हाथो में पकड कर उसकी होठो को पर अपनी होठो को रख दिया | वो मेरी कमर में हाथ को डाल कर मेरी होठो को चूसने लगा | वो मेरी होठो को चूस रहा था और मैंने उसकी होठो को चूस रही थी | वो मेरी होठो को अपनी होठो को पकड के खीच खीच कर चूस रहा था और मैं उसकी होठो को मुंह में रख कर चूस रही थी | मैं उसकी होठो को ऐसे ही कुछ देर तक चूसने के बाद मैंने उसके कपडे निकाल दिए और उसने मेरे कपडे निकाल दिए | वो मेरे सामने अंडरवियर में आ गया था और मैं उसके सामने ब्रा और पैंटी में थी | वो मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से पकड कर दबाने लगा | वो मेरे बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाने के साथ मेरी ब्रा को खोल दिया जिससे मेरे बड़े बूब्स उसके सामने आ गए | तब वो मेरे एक दूध को मुंह में रख कर चूसने लगा और दुसरे दूध को हाथ में पकड कर मसलने लगा |

वो मेरे दोनों बूब्स को ऐसे ही कुछ देर तक एक एक करके चूसने के बाद उसने मेरी टांगो को फैला कर मेरी चूत में अपने मुंह को घुसा कर चाटने लगा | वो मेरी चूत में जीभ को घुसा कर मेरी चूत को चाटने लगा | मैं आ आ आ…. ऊ ऊ ऊ… सी सी सी सी…. ह ह ह ह… की सिसकियाँ लेने लगी | वो मेरी चूत को चाटने के साथ मेरी चूत में ऊँगली को घुसा कर जोर जोर से हिलाने लगा | वो मेरी चूत में ऐसे ही 5 -6 मिनट तक करता रहा और मेरी चूत से गर्म पानी की धार निकल गयी | जब मैं झड़ गयी तो उसने अपने लंड को निकाल कर मेरी चूत में घुसा दिया | मेरी चूत गीली थी जिससे उसका लंड मेरी चूत में घुस गया | उसका लंड बड़ा और मोटा होने की वजह से मेरे मुंह से दर्द भरी सिसकियाँ निकल गयी|

वो मेरी चूत में जोरदार धक्को के साथ अन्दर बाहर करते हुए चोदने लगा | मैं जोर जोर से हह हह हह…. ऊ ऊ ऊ ऊ… सी सी सी… आ आ आ…. की सेक्सी आवाजे करती हुई चुदने लगी | वो मेरे दोनों बूब्स को कस के हाथ में पकड कर मेरी चूत में जोरदार धक्के मारने लगा | वो मेरी चूत में जोरदार धक्के मार रहा था और मैं मस्त होकर चुद रही थी | वो मेरी चूत में ऐसे ही जोरदार धक्के कुछ देर तक मारता रहा | फिर उसने मेरी चूत से लंड को निकाल कर मुझे घोड़ी बना दिया | वो मुझे घोड़ी बनाने के बाद मेरी चूत में पीछे से लंड को डाल कर जोरदार धक्को के साथ अन्दर बाहर करते हुए मुझे चोदने लगा |

जोर जोर से सेक्सी आवाजे करती हुई चुद रही थी साथ में अपनी चूत को आगे पीछे करती हुई चुदाई के मज़े ले रही थी | वो मेरी चूत में धक्को की स्पीड इतनी तेज कर दी की धक्को की आवाज गूंजने लगी | कुछ ही देर में मैं दुबरा झड़ गयी और साथ में वो भी झड़ गया | फिर मैंने उसके लंड को चाट चाट कर साफ कर दिया और उसने अपने कपडे पहन लिए और मैंने अपने कपडे पहन लिए |

फिर उसके कुछ दिन बाद वो मेरे घर में रहने लगा और वो मेरी रोज ही मस्त चुदाई करता था |

धन्यवाद…………….

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