hindisex Archives - Antarvasna https://sexstories.one/tag/hindisex/ Hindipornstories.org Wed, 29 Jun 2022 14:17:16 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.1 मम्मी की दोस्त की चूत और हमारी अन्तर्वासना https://sexstories.one/mummy-ki-saheli-ki-chut-ki-antervasna/ Wed, 29 Jun 2022 14:16:34 +0000 https://sexstories.one/?p=6172 आंटी के साइड बूब्स मुझसे टच हो रहे थे और मेरा लंड खड़ा हो गया | मैंने कहा आप इनती मस्त हैं की आपको देखके समझदारी अपने आप निकल जाती है | मुम्मी ने कहा ऋतू मैं थोड़ी देर में आती हूँ बगल वाले के घर से..

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हेल्लो मेरे प्यारे दोस्तों कैसे हैं आप सब मैंने सोचा आज आपसे कुछ शेयर कर लेता हूँ क्यूंकि मुझे चुप नहीं रहा जाता | तो दोस्तों आज की कहानी में चुदाई तो है ही पर मुझे आपको ये बताना है की मैंने एक चुदाई नहीं की है | मैंने कई चुदाई की है और मुझे ये बताना है कि मैंने अपनी मैडम से लेके अपनी कुतिया तक चोदा है | हाँ ये अजीब बात है पर मेरी सेक्स की चाहत इतनी है कि मैं खुद को रोक नहीं पाता |

इसलिए मैने जो सामने आए उसको चोद डाला | अब मैं आपको एक एक करके बताऊंगा मैंने कैसे चुदाई की और किस किस को पेला मैंने तबीअत से | इसलिए तैयार हो जाइए चुदाई की कहानी सुनने के लिए | मैं हूँ मनीष और मैं रहता हूँ पुराने कंचनपुर में | इमली के पेड़ के पास मेरा घर है | मुझे ब्लू फिल्म देखने का बहुत शौक है | और मैं पहेलवान भी हूँ तो मेरे अन्दर गर्मी बहुत है | अब मुझे अपनी कहानी सुनाने में आना चाहिए क्यूंकि मैंने अपने बारे में आपको सब बता दिया और अब आप कहानी का मज़ा लीजिये | चलिए अब आरम्भ होती है मेरी चुदाई क्रिया और ये रहा आपके सामने पहला दृश्य |

आप सब तो जानते हैं हर मम्मी की कोई न कोई दोस्त होती है मेरी मम्मी की भी है | उनको मैं बड़े प्यार से ऋतू आंटी बोलता हूँ | मैंने पहली बार उनको एक पार्टी में देखा था जहाँ वो एक सलवार सूट में आई थीं | कमाल लग रही थी पता ही नहीं चल रहा था कि वो ४० साल की हैं | मैंने उनको देखते ही मन में सोचा कास ऐसी बीवी मुझे मिल जाए कभी किसी को चोदने का मन नहीं करेगा बस इसकी चूत में ही लंड डाल के रखूँगा जिंदगी भर | पहले जब उन्होंने मुझे देखा तो कहा अरे तनु तेरा बेटा कितना बड़ा हो गया है | उन्होंने मेरे कंधे पे हाथ रखा और कहा मनीष बेटा मुझे पहचानता है |

मैंने कहा नहीं तो उन्होंने कहा बेटा जब तू छोटा था न तू मेरी गोद में ही रहता था हमेशा | मेरे ऊपर कितनी बार पेशाब की है तू जानता है न | अब कोई और होता तो इस बात पे शर्मा जाता पर मैं सोच रहा था बचपन में मैं इस माल के ऊपर रहता था | कितना हसीन होगा वो मंज़र जब ये मुझे सीने से लगाती होगी और इतना देखके ही मेरी नज़र उसके दूध पर पड़ गई | मस्त बड़े बड़े थे और उसके बीच की नाली साफ दिख रही थी | मैंने सोचा मम्मी की इतनी अच्छी दोस्त मुझसे आज तक क्यूँ नहीं मिली | फिर मम्मी और वो बात करने लगे | मैं अहि खड़ा था तो मुझे पता चला उनके पति ने उनको छोड़ दिया है और उनके बच्चे भी नहीं है | मैंने सोचा कि ऐसा मौका तो किस्मत वालों को ही मिलता है | बस फिर क्या था मैंने इंतज़ार शुरू कर दिया उनके घर आने का |

मैंने सोचा क्या होगा अगर मैंने इसके साथ जबरदस्ती कर दी तो | पर मैं ये नहीं चाहता था क्यूंकि इससे हर तरफ ढिंढोरा पिट जाता | इसलिए मैंने विगोरा की गोली लाके रख ली और बस करने लगा इंतज़ार | सब्र का फल मीठा होता है ये बस सुना था मैंने पर इस बार मेरा सपना सच हो गया | पर मुझे एक बात समझ नहीं आई की आंटी मुझसे चिपक बहुर रही थी पर फिर भी मैंने सोचा की दवाई का पूर्ण इस्तमाल करूँगा | जैसे ही आंटी घर आई मुम्मी ने कहा मनीष बेटा आंटी को पानी दे | मैंने आंटी के पानी में दवाई मिला दी और उनको पिला दिया | आंटी ने मुझे पास बैठाया और गले में हाथ डालके कहा क्यों बच्चे इतने समझदार हो गए तुम |

आंटी के साइड बूब्स मुझसे टच हो रहे थे और मेरा लंड खड़ा हो गया | मैंने कहा आप इनती मस्त हैं की आपको देखके समझदारी अपने आप निकल जाती है | मुम्मी ने कहा ऋतू मैं थोड़ी देर में आती हूँ बगल वाले के घर से आज रात तो तू वैसे भी यहीं रुकेगी तो आराम से चली जाना | मैंने सोचा वाह लाटरी लग गयी | आंटी को दवाई का असर होने लगा और मुझसे थोडा दूर होक बैठ गयी | आंटी का हाथ मेने फिर से अपने गले में डाला और कहा आप बताओ न क्या चल रहा है | आंटी ने बताना शुरू किया और मेरे गले पे हाथ फिराने लगी | मैंने भी हलके से आंटी के साइड बूब्स पे हाथ फेरने लगा |

फिर एक दम से हटा लिया आंटी ने कहा कर लो बड़े तो हो ही गए कार्लो जो कर रहे थे | अब तो मेरा हौसला आसमान के ऊपर था और मैंने तुरंत आंटी के बूब्स को सामने से दबाना चालु कर दिया | अब आंटी ने अपने बूब्स बाहर निकाले ब्रा से और कहा अच्छे से करो | मैंने थोड़ी देर तक उनके बूब्स को दबाया और निपल्स को भी मसला फिर उन्होंने मेरा मुह अपने निप्प्लस पे लगाके कहा चूसो इनको | मैंने चूसते हुए उनके निप्प्लस को कड़क कर दिया और वो आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः करने लगी | मैंने कई बार उनसे कहा आंटी थोडा धीरे करो पर वो सुन ही नहीं रही थी |

फिर उन्होंने अपना पूरा सूट उतार दिया अब उन्होंने मेरा एक हाथ अपनी चूत पे रखवा दिया और खुद ही रगड़ने को बोलने लगी | मैंने उनकी चोट को अपनी बीच की उन्ग्लू से रगड़ना चालु किया और वो आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः करती रही | फिर मैंने अपनी ऊँगली से ही उनको चोदना चालु कर दिया |

उसके बाद उन्होंने मेरा लंड खोला और मुझे सामने बुलाया और कहा इसको डालो अन्दर | मैंने अपना लंड डाला तो मुझे गरम गरम लगा | मैं आगे पीछे हो रहा था और वो आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः कर रही थी |

करीब आधे घंटे तक चुदने के बाद जैसे ही मम्मी ने आवाज़ लगायी उन्होंने मेरा लंड निकला और अपने मुह के ऊपर हिलाने लगी | मैंने आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः कर ज़ोरदार मुठ की बारिश उनके मुह पे कर दी |

पर अब मुझे और चुदाई की तलब लगने लगी और आंटी भी दवाई के नशे से बाहर आ गयी | मुझे तो लगा बस अब तो सारा मज़ा किरकिरा हो गया | मैं रात को खाना खाने के बाद अपने रूम में गया और आंटी और मम्मी गप्पे मार रही थी | रात के 12 बजे मैंने अपना निकाल के उसको हिलाना चालु कि तभी मेरा दरवाज़ा खुला और आंटी आ गयी | वो मेरा लंड पकड़ के चूसने लगी और मेरे मुह से आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः की आवाज़ निकलने लगी | इन्होने मेरा लंड मस्त चूसा और मुझे झडवा भी दिया | उसके बाद वो अपनी छोट मेरे लंड पे रगड़ने लगी और उसके बाद मेरे मुह के पास अपनी चूत लेके आई और कहा इसको चाटो | मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू किया |

उनकी बड़ी बड़ी गांड मेरे मुह से टकरा रही थी तो मैंने एक ऊँगली उनकी गांड के छेद में डाल दी और उसको चोदने लगा | आंटी आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः आआहाआह ऊउन्न् आहाहाह ऊउम्म्म ऊनंह अआहा आअह्ह्हाअ अहहहः अहहाआअ ऊउन्न ऊउम्म्ह आआनाहा ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहाहाहा ऊनंह ऊउम्ह आहाहहा ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह अहहहः ही कर रही थी | फिर थोड़ी देर बाद मैंने उनकी चोट को चाटना बंद किया और उनके छेद में अपना लंड डाला पर इस बार गांड के छेद में डाला | मैंने उन्हें घोड़ी बना के चोदा और वो बस अपनी चूत को रगड़ते हुए सिस्कारियां ले रही थी | इतना मज़ा आया उनको चोदने में कि क्या बताऊँ मैं आपको | पूरी रात की चुदाई के बाद आंटी ने कहा अब मैं यही बाजू वाले घर में रहने आ गयी हूँ तो तु कभी भी आ जाना |

मेरी तो सच में लाटरी लग गयी और मम्मी भी खुश अपनी दोस्त से और लड़का भी खुश मम्मी की दोस्त की चूत से |

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समाज सेवा के साथ चूत सेवा https://sexstories.one/office-me-manager-ko-choda/ Mon, 24 Jan 2022 07:18:59 +0000 https://sexstories.one/?p=5113 उसके बाद फिर से हम थोड़ी देर के लिए चुप हो गए. लेकिन दोनों ही समझ चुके थे कि हम एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हैं. इंतजार सिर्फ इस बात का है की पहल कौन करता है. मेरे तन बदन में गुदगुदी सी हो रही थी.

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Office me Choda – मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूं. एक अधिकारी के माध्यम से मेरी पहचान बैंक की असिस्टेंट मैनेजर से हुई. वो अविवाहित थी. हम दोनों की दोस्ती हुई और बात चुदाई तक पहुँच गयी. दोस्तो, मेरा नाम दीप है यह मेरी पहली कहानी है. पिछले कई वर्षों से मैं सेक्स कहानियां पढ़ रहा हूं लेकिन कभी कहानी लिखने का मौका नहीं मिला.

आज मैं आपसे कुछ महीनों पहले अपने साथ हुई एक हसीन घटना शेयर करूँगा.

पहले मैं आपको अपने बारे में बताता हूं. मैं एक सामाजिक संगठन का सदस्य हूँ और हिमाचल के मंडी जिले में रहता हूँ. मेरी उम्र 28 साल है. बॉडी फिट है और लंड का साइज़ भी काफी मोटा है.

यह कहानी मेरी और कँगना की है. कँगना बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत है. हालांकि कँगना उम्र में मुझसे बड़ी है वो लगभग 32 वर्षीय एक अविवाहित लड़की है और एक सोसाइटी में फ्लैट लेकर अकेली रहती है.

कँगना दिखने में काफ़ी सुंदर है. उसका फ़िगर 34-30-36 का होगा. रंग गोरा है और आंखें गहरी और नीली हैं.

कँगना से मेरी पहचान एक मेरे परिचित पुलिस अधिकारी के माध्यम से हुई. क्योंकि मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूं और कई अधिकारियों के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं.

उस पुलिस अधिकारी ने एक दिन बातों बातों में मुझसे कहा- मेरी एक दूर की रिश्तेदार कँगना यहां बैंक में कार्यरत है. और उसके घर वालों ने उसकी शादी के लिए लड़का ढूंढने की जिम्मेदारी मुझे दी है.

उन्होंने मुझसे कहा- अगर तुम्हारी नजर में कोई लड़का हो तो तुम जरूर बताना. और तुम एक बार कँगना से बात कर लो.

और उन्होंने मुझे कँगना का नंबर व्हाट्सएप पर सेंड कर दिया.

उस समय मैंने बात को इतनी गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन कुछ दिनों बाद उनके फिर से जिक्र करने पर मैंने कँगना को कॉल किया.

फोन पर कँगना की आवाज़ में एक मुझे एक मस्ती सुनाई दी.

मैंने उसे बताया कि आपके रिलेटिव पुलिस अधिकारी ने मुझे आपका नंबर दिया है.

वो बहुत फ्रैंकली मुझसे बात कर रही थी. उस समय हम दोनों में थोड़ी बात हुई और बाद में बात करना तय हुआ.

दो दिन बाद उसका फोन आया और उसने काफी देर तक मुझसे बात की.

इस दौरान मैंने उससे पूछा- शादी के लिए तुम्हें किस तरह का लड़का चाहिए?

तो उसने मुझे अपनी पसंद बताई.

बातों बातों में कँगना ने कहा- कभी समय मिले तो मुझसे मिलने आना.

मैंने पूछा- कहाँ पर?

तो उसने कहा- बैंक में भी आ सकते हो और घर पर भी.

मैंने कहा- ठीक है.

लगभग दो सप्ताह बाद मैंने कँगना को वाट्सएप पर मैसेज किया कि मुझे बैंक का कुछ काम है और आपसे मिलना है.

तो उसने कहा कि परसों रविवार को मैं घर पर आ जाऊँ और उसने मुझे अपना एड्रेस सेंड कर दिया.

उस समय तक मैं नहीं जानता था कि कँगना फ्लैट में अकेली रहती है.

रविवार को मैं कँगना के घर पहुंचा. कँगना ने दरवाज़ा खोला और मेरा स्वागत किया.

थोड़ी देर बैठने के बाद मैंने पूछा- घर में और कोई नहीं है?

तो कँगना ने बताया- नहीं, यहां मैं अकेली ही रहती हूँ और छुट्टियों में अपने घर जाती हूँ.

तब मुझे लगा कि कँगना काफी खुले विचारों की और फ्रेंक लड़की है. तभी तो एक अंजान को घर पर बुला लिया.

हम दोनों में उस दिन बहुत सारी बातें और हंसी मज़ाक हुआ.

उस दिन के बाद कँगना से मेरी मैसेज और फोन से आये दिन बातें होने लगी. मेरे मन में हर वक्त कँगना का ख्याल रहने लगा और उसका भी शायद यही हाल था.

पता ही नहीं चला कि मैं कब कँगना के प्रति सेक्सुअली आकर्षित हो गया. अब मैं हर वक्त कँगना को चोदने के बारे में सोचता रहता था लेकिन अपनी तरफ से कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता था.

एक दिन कँगना का फ़ोन आया और हमारी सामान्य बातचीत हुई बातों ही बातों में उसने मुझे मिलने के लिए बुलाया.

इस बार मैं कँगना से मिलने के लिए उत्साहित था. मैं चाहता था कि बात किसी भी तरह से आगे बढ़े.

कँगना ने उस दिन हरे रंग का टाइट शर्ट और लेगी पहनी हुई थी. इन कपड़ों में उसके सभी अंगों का उभार और आकार साफ देखा जा सकता था. उसका सेक्सी फ़िगर देखकर मेरी साँसें तेज़ हो गई.
उस दिन कँगना के चेहरे पर एक खास चमक थी.

हमने चाय नाश्ता किया और बातें करने लगे.

मैंने देखा कि कँगना मुझसे बात करने वक्त अपनी आंखें नहीं मिला रही थी. तो मैंने पूछा- आंखें क्यों नहीं मिला रही हो?

तो वो और ज्यादा शर्मा गई और नीचे की तरफ देखने लगी.

मैं समझ गया कि बेचैनी उसके मन में भी है.

मैंने उससे दोबारा जोर देकर पूछा तो उसने शर्माते हुए कहा- पता नहीं क्यों तुमसे नजरें नहीं मिला पाती हूं. तुम जब मेरी तरफ देखते हो तो कुछ कुछ होता है.

मैंने पूछा- क्या होता है?

तो वह चुप हो गई और दूसरी तरफ देखने लगी.

मैंने मौके का फायदा उठाते हुए कहा- मैं जानता हूं कि क्या होता है. और जो तुम्हें होता है वह मुझे भी होता है.

इसके बाद हम दोनों थोड़ी देर के लिए शांत हो गए और मंद मंद मुस्कुराते रहे.

थोड़ी देर बाद मैंने उससे पूछा- अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात पूछूं?

उसने कहा- पूछो.

मैंने कहा- तुम इतनी पढ़ी लिखी हो, सेल्फ डिपेंड हो. और घर से बाहर अकेली रहती हो. क्या तुमने कभी सेक्स किया है?

तो उसने मुस्कुराते हुए बोला- नहीं! हालांकि मैं अकेली रहती हूं और खुले विचारों की भी हूं. इसलिए इस बात पर तुम्हारे लिए यकीन करना मुश्किल होगा लेकिन मैंने आज तक कभी सेक्स नहीं किया.

फिर उसने मुझसे पूछा- क्या तुमने किया है?

तो मैंने कहा- हां, मैंने आज तक तीन बार सेक्स किया है.

उसके बाद फिर से हम थोड़ी देर के लिए चुप हो गए. लेकिन दोनों ही समझ चुके थे कि हम एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हैं. इंतजार सिर्फ इस बात का है की पहल कौन करता है.

मेरे तन बदन में गुदगुदी सी हो रही थी. मुझे पूरा माहौल अनुकूल लग रहा था और मैं इस मौके को छोड़ना भी नहीं चाहता था इसलिए मैंने कँगना से स्पष्ट कह दिया.

मैंने उससे कहा- तुम मुझ पर पूरी तरह भरोसा कर सकती हो. मैं तुम्हें किसी भी हाल में नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा. तुम मुझे अच्छी लगती हो मैं तुम्हारे प्रति आकर्षित हूं और तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता हूं. अगर तुम्हें ये सब बुरा लगा हो तो तुम मुझसे साफ-साफ कह सकती हो. आगे से मैं कभी भी इस तरह की बात नहीं करूंगा.

उसने कहा- नहीं, मुझे बुरा नहीं लगा.

इतना कहकर वह रुक गई और मुस्कुराने लगी.

अब मैं समझ गया कि ग्रीन सिगनल मिल चुका है. मैंने उठकर कँगना का हाथ पकड़ लिया. उसने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश नहीं की तो मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया. वह भी मुझसे लिपट गई.

थोड़ी देर बाद हम दोनों अलग हुए और कँगना मेरा हाथ पकड़ के मुझे बेडरूम की तरफ ले गई.

बेडरूम में लाइट काफी कम थी.

मैंने अपने जूते उतारे और बेड पर लेटते ही कँगना को अपनी ओर खींच लिया. कँगना भी पूरी तरह से मुझसे लिपट कर लेट गई. थोड़ी देर बाद मैं कँगना के ऊपर लेट गया और उसके होठों को चूमने लगा.

कँगना ने भी मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया. कँगना के अंदाज से साफ पता चल रहा था कि वह भी वासना की आग में जल रही थी.

मैंने कँगना के होंठों को चूसते हुए नीचे से उसके शर्ट के अंदर हाथ डाल दिया. कँगना के मुँह से आह निकल गई.

हम दोनों की गर्म साँसें एक दूसरे से टकरा रही थी.

मैंने कँगना के कपड़े उतारने शुरू कर दिए. पहले मैंने उसका कमीज उतारा और फिर नीचे से उसकी पजामी को भी उतार दिया.

अब वह सिर्फ पेंटी और ब्रा में मेरे सामने लेटी हुई थी. शर्म की वजह से उसने अपने चेहरे को हाथों से ढक लिया.

उसका गोरा बदन देखकर मेरा लंड भी सख्त हो गया.

Officesex मम्मी ने मुझे सेक्स करना सिखाया

मैंने ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाना शुरू किया और उसके पूरे गोरे बदन पर हाथ फिराया. चूची, पेट से लेकर जांघों तक हाथ फिराने से मेरा लंड लोहे की रॉड की तरह सख्त हो गया था.

मेरे सामने अर्धनग्न लेटी हुई कँगना किसी मछली की तरह मचल रही थी. मचलते हुए कँगना ने दूसरी ओर करवट बदल ली और मेरी तरफ अपनी पीठ कर ली.

मैंने अपनी शर्ट और जीन्स उतारी और कँगना के शरीर से सटकर लेट गया. फिर पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोलने लगा. नीचे से मेरा लंड कँगना की गांड से लग रहा था. तब तक मैंने अपना अंडरवियर नहीं उतारा था. मेरा लंड अंडरवियर के अंदर से ही उसके चूतड़ों के बीच में घुसने को तैयार था.

शायद अपनी गांड पर मेरे लंड का स्पर्श पाकर कँगना को भी अच्छा लग रहा था. इसीलिए वो भी अपने चूतड़ों को मेरे लंड पर दबा रही थी.

अब मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसके स्तनों को आजाद कर दिया. मैं पीछे से ही उसकी दोनों चूचियों को सहलाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा. नीचे से अपने लंड को उसकी गांड पर रगड़ना भी जारी था. इस अवस्था में दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था.

फिर ना जाने कब कँगना का हाथ आकर मेरे लंड पर रखा गया. पहले उसने लंड पर हाथ रखा और फिर उसने अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया.

मैंने भी अपना हाथ उसके स्तनों से हटा कर उसकी चूत पर रख दिया.

उसकी चूत पर मेरे हाथ पहुंचते ही कँगना ने लंड को मुट्ठी में भर लिया. मैं कँगना को सामने से नंगी देखना चाहता था इसलिए मैंने उसे सीधा लेटने के लिए हाथ से जोर दिया.

कँगना सीधी मेरे सामने लेट गई. कँगना के बदन पर सिर्फ पेंटी थी.

उसके गोरे और मोटे स्तनों को देखकर मैंने तुरंत उन्हें चूसना शुरू कर दिया. स्तन का निप्पल मेरे मुँह में जाते ही कँगना आह आह की आवाज़ कर रही थी.

स्तनों को चूसते हुए मैंने उंगलियों से उसकी पेंटी को नीचे खिसकाया और कँगना ने पेंटी को अपने जिस्म से अलग कर दिया. अब वो पूरी तरह नंगी हो चुकी थी.

मैंने उसकी चूत पर हाथ रख कर उसे सहलाना शुरू किया. उसकी चूत बिल्कुल चिकनी थी शायद चुदने का मन होने की वजह से कँगना ने चूत के बाल साफ किये थे. मैंने कँगना की चूत में उंगली घुसाई तो कँगना ने दोनों टांगों को आपस में भींच लिया.

कँगना ने मेरा अंडरवियर नीचे की तरफ खींच कर उसे उतारने का इशारा किया. मैंने देर ना करते हुए अपना अंडरवियर और बनियान उतार दिया. अब हम दोनों ही पूरी तरह नंगे हो गए. मैंने कँगना की टांगें फैलाई और उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया.

अब चुदाई का खेल शुरू होने वाला था.

पहली बार मैंने सामने से कँगना की चूत देखी. कँगना की चूत एकदम कसी हुई थी और चूत की फांकें एकदम गुलाबी थी. गुलाबी फांकें देख कर मुझसे रुक नहीं गया और मैंने कँगना की चूत को चाटना शुरू कर दिया.

मेरी जीभ का चूत पर स्पर्श पाकर कँगना के मुँह से तेज़ सिसकारी निकल गई. मैं लगातार चूत को चाटता रहा.

फिर मैं रुक कर इस तरह लेट गया कि मेरा लंड कँगना के मुँह की तरफ आ गया और मेरा मुँह कँगना की चूत के पास. जिसे 69 की पोजिशन भी कहते हैं.

मैं देखना चाहता था कि क्या कँगना भी मेरा लंड चूसना चाहती है.

मैं फिर से उसकी चूत को चाटने लगा.

कँगना ने भी देर नहीं कि पहले उसने मेरे लंड को पकड़कर सहलाया और फिर उस पर अपनी जीभ फिराने लगी. कँगना की जीभ और होंठों को लंड से छूने पर मेरे अंदर करंट सा दौड़ गया और मैंने भी अपनी जीभ कँगना की चूत के छेद में अंदर तक घुसा दी.

मेरी जीभ चूत में अंदर जाते ही कँगना जोश से भर गई और मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी. कँगना की मुँह की गर्मी को मैं अपने लंड पर महसूस कर रहा था. मैं भी उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था. करीब पांच मिनट तक चूसने और चाटने का सिलसिला चलता रहा. हम आपस में बात नहीं कर रहे थे लेकिन चुदाई के खेल में दोनों एकदूसरे का भरपूर साथ दे रहे थे.

अब मैं उठा और कँगना की दोनों टांगों के बीच में जाकर उसकी चूत पर अपना लंड रखा और बिना रुके धीरे से धक्का लगाया.

लंड पर थूक लगा होने के कारण लंड सीधा कँगना की चूत में प्रवेश कर गया. कँगना को हल्का दर्द हुआ तो उसके मुख से निकला- उम्म्ह… अहह… हय… याह… उसने दोनों हाथों से बैड की चादर को पकड़ लिया.

अब मैं पोजिशन बदलते हुए पूरी तरह कँगना के ऊपर लेट गया और धक्के लगाने शुरू कर दिए. धक्कों के साथ कँगना की चूचियाँ भी फुदक रहीं थीं.

एक हाथ को बैड पर टिकाकर मैंने कँगना की चूची को भी दूसरे हाथ से जकड़ लिया और उसे मसलते हुए कँगना की चुदाई करने लगा. हम दोनों के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही और तेज धक्के लगातार जारी थे.

थोड़ी देर ऊपर लेट कर चोदने के बाद मैंने लंड निकाला और साइड में लेट गया.

कँगना समझ गई कि मैं क्या चाहता हूं. वो उठी और मेरे ऊपर आकर बैठ गई. उसने मेरे लंड को हाथ से पकड़कर चूत के छेद को लंड के सामने किया और चूत को लंड पर दबा दिया जिससे पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.

अब उसने लंड पर बैठकर ऊपर नीचे होना शुरू कर दिया. मैं अपने दोनों हाथों से उसके स्तनों को दबाने लगा. करीब दस मिनट तक ऐसे ही चुदने के बाद कँगना पूरी तरह मेरे ऊपर लेट गई और मेरे होंठों को चूसने लगी.

मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है. मैंने भी नीचे लेटकर ही तेज़ तेज़ धक्के लगाने शुरू कर दिए.

उसकी चूत से आ रही फचक फचक की आवाज के बीच हम दोनों एक साथ झड़ने लगे. झड़ते वक्त कँगना मेरे बालों को पकड़ लिया और मैंने भी उसके स्तनों को मसल डाला.

थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे और उसके बाद कँगना ऊपर से हटकर बराबर में लेट गई और हमें गहरी नींद आ गई. करीब आधे घंटे बाद हम उठे और कपड़े पहनने लगे.

कपड़े पहनते हुए मैंने कँगना से पूछा- कैसे लगा?

उसने मुस्कुराते हुए कहा- अच्छा लगा.

फिर मैंने कँगना के गाल को चूमा और वहां से निकल गया.

उसके बाद भी कई बार मैंने कँगना की चुदाई की.

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दोस्त की बीवी गैर मर्द की दीवानी https://sexstories.one/dost-ki-biwi-gair-mard-ki-deewani/ Sun, 24 Oct 2021 12:11:43 +0000 https://sexstories.one/?p=3110 अब भाभी ने उसके लंड को कसकर पकड़ा और कहा कि सिर्फ़ पेटीकोट ही उतारना, उसने अब अपना अंडरवियर भी उतारा और पूरा नंगा हो गया। अब वो उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगी, इस बीच उसने भाभी की मेक्सी को और पेटीकोट दोनों ऊपर उठाए....

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Dost Ki Biwi Gair Mard Ki Deewani मेरा नाम सन्नी है। मेरा एक दोस्त है जिसका नाम आकाश है और वो सरकारी विभाग में एक अच्छे पद पर है। मेरा उसके घर पर हमेशा आना जाना रहता है और उसकी बीवी का नाम दीपा है। उसकी उम्र लगभग 40, एकदम दूध जैसी गोरी है। वो दिखने में सुंदर, सुशील, एकदम सीधी है और किसी को भी उन्हें देखकर ऐसा नहीं लगता है कि वो औरत एक नंबर की चुदक्कड़ है। में उसे भाभी कह कर बुलाता हूँ और वो मेरे साथ बहुत खुलकर रहती है, फिर भी मुझे एक दिन भी उन्हें देखकर ऐसा नहीं लगा कि इस औरत ने कई लोगो के लंड से जी भरकर खेला है।

एक दिन मेरे एक दोस्त ने मुझसे कहा कि तू तेरे दोस्त आकाश के घर पर ज़्यादा मत जाया कर तो मैंने पूछा कि ऐसा क्यों? तब उसने मुझे बताया कि उसकी औरत बहुत चालू है और अब तक कई लोगो ने उसे ठोका है और उनमे से ऐसे लोग भी है जो बुरा काम करते है जैसे कि गुंडे और बदमाश के साथ उसके गलत संबध है और वो चुदाई के लिए कुछ भी कर सकती है। दोस्तों मुझे उसकी इस बात पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हुआ, लेकिन अब मेरे मन में एक शक सा पैदा हुआ और मैंने उससे पूछा कि तुम यह सब कुछ कैसे जानते हो? तो उसने मुझे बताया कि में कई बार उसे चुदते हुए और कई बार उसकी खिड़की के बाहर से रात भर यह सब कुछ देख चुका हूँ और उसे नये नये लड़को को पटाकर चुदवाना बहुत अच्छा लगता है और अगर तुझे विश्वास नहीं है तो उसका पति जब भी अपने घर से बाहर जाता है तो तू देखना उसके घर पर कोई ना कोई नया आदमी रहता है और वो उससे जमकर चुदवाती है और उसे भी मज़ा देती है और वो मुझसे इतना कहकर वो चला गया।

दोस्तों उसकी यह बात सुनकर मुझे भी कुछ कुछ याद आने लगा कि जब भी में उनके घर पर जाता था तो उसके मोबाईल पर बहुत बार कॉल आते थे और भाभी उससे बाद में बात करती हूँ यह कहकर काट देती थी और कई बार जब हम बाहर बैठकर बातें करती थी तो उसकी नज़र हमेशा बाहर आने जाने वाले पर टिकी रहती और कई बार वो मेरी तरफ देखकर भी मुझे कुछ इशारे करती थी। उस वक़्त में उन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था, लेकिन अब मेरे दोस्त की बातें सुनकर मुझे भाभी पर शक़ हुआ और अब मैंने कैसे भी करके मेरे शक़ को दूर करने की ठान ली और सही मौके का इंतजार करने लगा। एक दिन ऐसा मौका आ गया। मुझे पता चला कि आकाश अपने यूनियन के काम से दो दिन के लिए बैंगलोर जा रहा है। में उस दिन शाम को करीब 7 बजे उसके घर पर चला गया।

आकाश उस वक़्त घर पर था और जाने की तैयारी कर रहा था। उसकी गाड़ी 8.00 बजे थी और हमे बातें करते करते 7.30 बज गये थे। उतने में आकाश के ऑफिस से कुछ दोस्त आए और आकाश को अपने साथ लेकर चले गये। फिर में और भाभी दोनों बातें करते रहे कि तभी मैंने गौर किया कि कुछ देर बाद भाभी का फोन बजा और भाभी ने फोन उठाया और फिर दूसरे कमरे के अंदर जाकर उन्होंने आहिस्ते से बात करनी शुरू कर दी। मुझे ठीक से सुनाई नहीं दिया, लेकिन इतना जरूर सुना कि में कुछ देर में अपको फोन करूँगी तैयार रहना और वो फोन काटकर फिर उसी जगह आकर मेरे पास आकर बैठ गई जहाँ पर पहले वो बैठी हुई थी।

वो अब मुझसे इधर उधर की बातें करने लगी, लेकिन में समझ गया कि यह मुझे जल्द से जल्द यहाँ से भगाना चाहती है और इसलिए में भी उनसे भाभी में अब जाता हूँ कहकर वहां से रवाना होने का नाटक करके थोड़ा दूर रुककर उसके घर की तरफ नज़र रखने लगा और जैसे ही वो अंदर गई तो में जल्द से जाकर उनके घर के पीछे की खड़की के पास जाकर बैठकर अंदर देखने लगा। तभी मुझे फोन पर बात करने की आवाज़ सुनाई दी और मैंने उसे किसी से बातें करते हुए सुना, वो कह रही थी जल्दी आ जाओ में तुम्हारा ही इंतजार कर रही हूँ।

तभी उधर से किसी से कुछ कहने पर वो फिर से बोली कि ज़रा इधर उधर नज़र डालकर आना वैसे तो इस समय सभी लोग अपने घर पर ही रहते है और हमारे आस पास में कोई भी नहीं रहता है। फिर वो उधर से और कुछ सुनकर बोली कि ठीक है, लेकिन थोड़ा जल्दी आ जाना में बाहर खड़ी रहती हूँ जब में अंदर आ जाऊं तो तुम घर में आ जाना और उन्होंने ठीक है कहकर फोन रख दिया और बाथरूम जाकर फ्रेश होकर बेडरूम में जाकर एक नीले रंग की चूड़ीदार सलवार पहनकर तैयार होकर बाहर आकर अब उसका इंतजार करने लगी। फिर कुछ देर बाद मैंने देखा कि एक हट्टाकट्टा सा आदमी उसके घर के सामने रुककर इधर उधर देख रहा है, लेकिन बाहर अंधेरा बहुत था इसलिए मुझे उसका चेहरा ठीक से दिखाई नहीं दिया और देखते ही देखते वो भाभी का इशारा पाकर अंदर चला आया और भाभी ने बाहर आकर दरवाजे के पास रुककर इधर उधर देखकर दरवाजे को लगाया और अंदर चली आई में तुरंत उनकी खिड़की के पास जाकर उसके आगे का नजारा देखना लगा। वो आदमी देखने में एकदम काला सांड जैसा था, लेकिन बहुत हट्टाकट्टा था। उसे देखते ही लगता था कि वो कोई गुंडे किस्म का इंसान है और मैंने अब तक उसे अपने शहर में कभी नहीं देखा था और भाभी उसके सामने वाली सीट पर बैठ गई।

फिर उसने कहा कि क्या मेडम घर तो बहुत अच्छा सज़ा रखा है बिल्कुल आपकी तरह एकदम सुंदर तो भाभी ने कहा कि धन्यवाद। तो उस बात पर उसने कहा कि इसमे धन्यवाद की क्या बात है? आप तो वैसे ही बहुत सुंदर हो तो भाभी ने कहा कि आप मेरी बिना वजह तारीफ कर रही हो। फिर उसने अपने साथ लाए हुए बेग से एक छोटी सी पुड़िया निकली और भाभी के हाथ में देते हुए कहा कि हमारे मिलन की खुशी में आपको मेरा पहला तोफा। भाभी ने कहा कि इसकी क्या ज़रूरत थी? वैसे भी तो आपके मेरे ऊपर बहुत सारे अहसान है, आपने मुझे जब भी में कहती हूँ पैसे दिए है और में आपकी वो उधारी चुकाने की कोशिश कर रही हूँ। यह बात कहकर वो उठकर अंदर चली गई और अंदर से एक विस्की की बॉटल और एक ग्लास और साथ में कुछ स्नेक्स लेकर आई और उसके सामने वाली टेबल पर रख दिए।

यह सब देखकर उसने बोला कि क्या जल्दी भेजने का प्लान है क्या? अभी तो में आया हूँ। इस पर भाभी ने कहा कि नहीं नहीं आप ग़लत मत समझना, मुझे तो आपका यहाँ पर आना बहुत अच्छा लगा रहा है और आपका जब जी करेगा तब चले जाना। मुझे दिल से कोई ऐतराज़ नहीं है। अब उसने कहा कि आप इतना दूर क्यों बैठी हो? थोड़ा नज़दीक बैठो ना। फिर भाभी उठकर उसके पास दीवान पर बैठ गई, तब उसने विस्की की बॉटल को खोला और एक पेग बना दिया और भाभी से कहा कि आप भी लो ना। फिर भाभी ने कहा कि मुझे इसकी आदत नहीं है, तो उसने कहा कि मेरे खातिर एक सीप लो ना प्लीज, में तुम्हारा झूठा पीना चाहता हूँ। तो भाभी ने उस ग्लास को मुहं से लगाकर एक सीप लिया और फिर उसे पीने को कहा। उसने एक ही झटके में पूरा ग्लास खाली कर दिया। फिर भाभी ने और एक पेग बनाया और खुद ने एक सीप लगाई और उसे दे दिया। उसने अब आहिस्ते आहिस्ते पीना शुरू कर दिया और कुछ देर तक ऐसा ही चलता रहा।

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फिर उसने भाभी से कहा कि इतने दिन हमारी सिर्फ़ फोन पर ही बात होती थी, लेकिन आज तुमने मुझे अकेले में मिलने का मौका दिया, क्यों तुम खुश हो ना मेडम? तो भाभी ने कहा कि मौका मैंने नहीं दिया बल्कि आपने खुद बनाया है, में इसकी अहसान मंद हूँ और में भी चाहती थी एक ऐसा इंसान जो मुझे केवल देखकर ही मेरे शौक पूरे करवाता रहे और मुझे खुश रखता रहे। में ऐसे आदमी को एक बार मेरे साथ खुलकर रहने का मौका नहीं दे दूँ तो मेरे जैसी मतलबी इंसान कोई नहीं होगी। तब उसने धन्यवाद मेडम कहा। तो यह बात सुनकर भाभी बोली कि मुझे मेडम मत कहा करो, मुझे मेरे नाम से पुकारा करो ठीक है। फिर उसने कहा कि ठीक है दीपा और फिर इस बीच उसने वो पेग भी खाली कर दिया था और भाभी से कहा कि आखरी टाईम तुमने साड़ी लेने के लिए पैसे लिए थे ना तो साड़ी ली क्या?

फिर भाभी ने कहा कि हाँ अरे वो तो में बातों ही बातों में आपको दिखना ही भूल गई, में अभी दिखाती हूँ और हाँ बोलकर वो बेडरूम में चली गई और साड़ी लेकर आ गई। उसके हाथ में देकर पूछा कि कैसी है? वो साड़ी एक नीली रंग की थी और उस पर छोटी छोटी डिज़ाईन थी और वो दिखने में बहुत महंगी थी। वो साड़ी देखकर बोला कि बहुत अच्छी है और तुम पर खूब जमेगी और जब तुम इसे पहनोगी तो बिल्कुल परी जैसी लगोगी। तब भाभी ने कहा कि अच्छा तो में इसे पहनकर अभी आती हूँ। मैंने इसे अभी तक नहीं पहनी थी और सोचा था कि जब हम पहली बार मिलेंगे तब में इसे पहनूंगी, यह कहकर वो उठाने लगी। तभी उसने भाभी का हाथ पकड़ा और उसे अपने सामने बैठाकर उससे कहा कि तुम अगर बुरा ना मनोगी तो में एक बात कहूँ? तो भाभी ने कहा कि मुझे आपकी कोई बात बुरी नहीं लगती है, कहो ना। तब उसने कहा कि तुम बहुत सुंदर हो और मैंने पहली बार जब आपको देखा था तो आपके बहुत नज़दीक आने की ठान ली थी। मुझे आपको देखकर ना जाने क्या हो जाता है? में आपसे बहुत प्यार करता हूँ प्लीज ना मत करना।

तब भाभी बोली कि में सच कहूँ तो में अपने पति को बहुत चाहती हूँ और मैंने उनके अलावा आज तक किसी और को नहीं देखा, लेकिन मुझे जो भी पति से नहीं मिला वो आपने मुझे दे दिया। इससे में कुछ परेशानी में हूँ कि में हाँ कहूँ या ना, लेकिन एक बात है आप मुझे पसंद हो बस और कुछ नहीं। तब उसने कहा कि बस इतना बहुत है मेरे लिए, लेकिन क्या में तुमसे हाँ सुनकर ही रहूँगा। तब भाभी बोली कि में भी चाहती हूँ, लेकिन मेरी मजबूरी है कि में शादीशुदा हूँ और अगर किसी को पता चला तो मेरी और मेरे परिवार की बहुत बदनामी होगी। फिर वो बोला कि में किसी को खबर नहीं होने दूँगा और जब तुम कहोगी तब ही आपसे मिलूँगा, कोई ज़बरदस्ती नहीं करूँगा, अब तो बोलो प्लीज़। तभी भाभी ने कहा कि मुझे सोचने दो, लेकिन अब नहीं अभी में आपकी बहुत सेवा करना चाहती हूँ क्यों ठीक है? तब उसने कहा की ठीक है जैसी आपकी मर्ज़ी, लेकिन क्या मेरी एक बात तो मनोगी? तो भाभी ने पूछा कि कहो कौन सी बात? तब उसने कहा कि जो यह साड़ी है, में इस साड़ी को तुम्हे मेरे हाथों से पहनाना चाहता हूँ?

अब भाभी बोली कि मुझे बहुत शर्म आती है, तभी उसने कहा कि क्या तुम मेरे लिए इतना भी नहीं करोगी? तो भाभी ने कहा कि ठीक है, लेकिन सिर्फ साड़ी ही बाकी सब में पहनूंगी। फिर उसने कहा कि ठीक है और भाभी उठकर अंदर चली गई। उससे कहा कि तुम इधर ही बैठना में बाकी सब पहनकर आती हूँ और यह कहकर वो बेडरूम में चली गई और थोड़ी देर में भाभी नीले कलर का ब्लाउज और उसी कलर का पेटीकोट पहनकर उसके सामने आकर खड़ी हो गई और वो भाभी को देखता ही रहा। यह देखकर भाभी ने कहा कि जल्दी से मुझे साड़ी पहनाओ मुझे अब बहुत शर्म आ रही है और फिर उसने साड़ी उठाई तो भाभी ने उसके एक पल्लू को अपने पेटीकोट में घुसाकर गोल गोल घूमने लगी और इस बीच उसने दो तीन बार भाभी के जिस्म को छूकर महसूस किया, लेकिन भाभी ने इसका कोई विरोध ना करते देख पूरी साड़ी पहनाने के बाद उसने भाभी के दोनों कंधो पर हाथ रखकर भाभी को दीवार के सहारे चिपकाकर खड़ा करके देखने लगा। भाभी बोली कि क्यों घूर रहे हो, क्या कभी कोई औरत नहीं देखी?

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फिर उसने कहा कि हाँ देखी जरुर है, लेकिन तुम्हारे जैसी नहीं, तुम बहुत सुंदर लग रही हो और अब भाभी मुस्कुराकर अपना मुहं नीचे करके खड़ी हो गई। फिर उसने धीरे से भाभी के कंधो से हाथ नीचे सरकाते हुए भाभी की कमर तक लाकर धीरे से कमर को पकड़कर धीरे से दबाया और भाभी के मुहं से आहह्ह्ह उह्ह्ह्हह् की आवाज़ निकली और भाभी ने कहा कि यह क्या कर रहे हो? तो उसने कहा कि में एक सुंदर औरत को जी भरकर देख रहा हूँ, क्या तुम्हे कोई ऐतराज़ है? अब भाभी ने कहा कि नहीं और फिर उसने भाभी को उठाया और दीवाना पर लाकर लेटा दिया। भाभी एकदम सीधा लेट गई और उसके आगे की हरक़त का इंतज़ार करने लगी और अब उन्हें देखकर लगता था कि भाभी जल्द से जल्द उससे चुदवाना चाहती थी, लेकिन नाटक कर रही थी और इस बीच वो भाभी के पास आकर लेट गया और लेटे लेटे ही उसने एक और पेग बनाया और भाभी से उसे पीने को कहा तो भाभी बैठ गयी और ग्लास पकड़कर एक सीप पीकर उसे दे दिया और फिर से उसी पोज़िशन में लेट गई और तब उसे भी अंदाजा लग गया कि यह भी वही चाहती है जो में चाहता हूँ।

फिर उसने वो सारी विस्की एक ही बार में खाली कर दी और ग्लास को टेबल पर रखकर भाभी के साथ लेट गया और भाभी से पूछा कि मेरे साथ सोकर तुम्हे कैसा लग रहा है? तो भाभी बोली कि मैंने कभी भी ऐसा नहीं सोचा था कि में तुम्हारे साथ ऐसे अकेले में एक बिस्तर पर सो जाउंगी, लेकिन जो कुछ भी हो रहा है मुझे वो बहुत अच्छा लग रहा है और तुमने मुझे इतना प्यार किया कि में अब पागल हो रही हूँ। तब उसने धीरे से भाभी का पेट सहलाया और कहा कि में तुम्हारी मर्ज़ी के बगैर कुछ भी नहीं करूँगा, क्योंकि मुझे तुम बहुत अच्छी लगती हो। फिर भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा कि में तुम्हारी इसी बात के ऊपर फिदा हो गई हूँ।

फिर उसने धीरे से भाभी का पल्लू थोड़ा साईड में किया और भाभी से कहा कि में तुम्हे किस करना चाहता हूँ तो भाभी ने कहा कि हाँ मेरा भी मन कर रहा है, लेकिन में मजबूर हूँ क्योंकि में एक शादीशुदा औरत हूँ, अगर मैंने ऐसा किया तो यह बिल्कुल ग़लत होगा। तब उसने कहा कि कुछ भी गलत नहीं होगा, जो कुछ भी होगा हम दोनों के बीच होगा और यहाँ पर तो कोई भी नहीं है। अब भाभी ने कहा कि लेकिन फिर भी मुझे बहुत शरम आ रही है और अब उसने भाभी को अपनी गोद में उठाया और सीधे दीवार पर सेट किया और कहा कि ठीक है अगर तुम्हे शर्म आ रही है तो एक काम करो। तुम यह साड़ी निकालो में तुम्हे उसी पोज़िशन में देखन चाहता हूँ। तो भाभी ने कहा कि आप ही ने पहनाई थी तो आप ही उतार दो। उसने ठीक है कहा और भाभी की साड़ी की गाँठ को खोल दिया और भाभी की साड़ी को उससे अलग कर दिया। अब भाभी पेटीकोट और ब्लाउज में थी और उसने भाभी को अपनी बाहों में ले लिया और ज़ोर से कसकर पकड़ा और अब भाभी के मुहं से आह्ह्हह्ह्ह उह्ह्ह्ह बस आईईईइ बस में उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ पागल हो जाउंगी।

अब उसने भाभी से पूछा कि कैसा लग रहा है? भाभी ने कहा कि बहुत अच्छा लग रहा है और कसकर पकड़ो तब उसने भाभी को और कसकर पकड़ा और भाभी से कहा कि में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ जान और फिर भाभी के मुहं से निकला हाँ बस मुझे ऐसे ही प्यार करना। भाभी के मुहं से यह बात सुनकर उसका जोश और भी बड़ गया और उसने भाभी से पूछा कि क्या तुम मेरे साथ एक बार फिर से बेड पर आ सकती हो? भाभी ने कहा कि क्यों नहीं? आज में आपकी एक बात भी नहीं ठुकराउंगी, तो यह बात सुनकर उसकी हिम्मत दुगनी हो गई और उसने अपनी पेंट और शर्ट को उतार दिया। अब भाभी ने पूछा कि तुम यह क्या कर रहे हो? तब उसने कहा कि तुम्हे गर्मी चाहिए और अगर में कपड़े पहनूं तो कैसे गरम होगी? भाभी ने कहा कि मेरे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है तुम क्या करना चाहते हो?

फिर वो बेड पर आकर लेट गई और वो भी भाभी के पास में आकर लेट गया और भाभी की कमर को पकड़कर आगे खींच लिया और कहा कि तुम बहुत सुंदर हो इतना ही नहीं तुम्हारा फिगर भी बहुत तगड़ा है। अब भाभी ने कहा कि आप भी बहुत हट्टेकट्टे हो और मुझे पहली बार ऐसा लग रहा है कि में किसी असली मर्द के साथ बिस्तर पर हूँ और भाभी ने उसे कसकर पकड़कर कहा कि तुम मुझे किस करना चाहते हो ना, लो तुम्हारी इच्छा पूरी कर लो, यह कहकर भाभी ने भी उसे कसकर पकड़ा और होंठो पर किस करने लगी। तो उसने भी भाभी को और कसकर पकड़ा ज़ोर ज़ोर से किस करने लगा और इस बीच उसने भाभी के सारे बदन को कपड़ो के ऊपर से सूंघ लिया और भाभी की नंगी गर्दन को और पेट को मसलने लगा और भाभी की गांड को कपड़ो के ऊपर से दबाता रहा था और अब भाभी के बड़े बड़े बूब्स ब्लाउज के ऊपर से खड़े होकर बाहर आने को तड़प रहे थे और इस तरह 10-15 मिनट किस करने के बाद भाभी ने कहा कि अब टाईम बहुत हो रहा है।

फिर उसने कहा कि क्यों तुम इतना जल्दी मुझे भेजना चाहती हो? भाभी ने कहा कि अरे नहीं मेरे राजा, में तो खाना खाने की बात कर रही थी। फिर उसने कहा कि नहीं अभी मेरा खाना खाने का मूड नहीं है, मुझे ऐसा लग रहा है कि में बस तुम्हे ऐसे ही किस करता रहूँ। भाभी ने कहा कि अरे बाबा खाना भी खा लो, फिर हम वापिस करेंगे। तब उसने टाइम देखा और कहा कि अभी तो सिर्फ़ 9.45 हुये है और हम 10.30 बजे खाना खाएँगे, क्यों ठीक है? भाभी ने कहा कि ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी, लेकिन मुझे एक बार बाहर देखकर आने दो और फिर उसने कहा कि ठीक है और भाभी उठ गई और बेडरूम जाकर अपने ऊपर मेक्सी डालकर दरवाजा खोलकर बाहर गई और कुछ देर खड़े रहकर देखा कि आस पड़ोस में कोई नहीं दिखा तो वो अंदर चली आई और उससे कहा कि अब कोई चिंता नहीं है, तुम रात भर मेरे साथ रुक सकते हो, यह बात कहकर वो अब उसके पास में आकर लेट गई। उसने भाभी से कहा कि तुम पहले जब लेटी थी तब मेक्सी नहीं थी, भाभी ने कहा कि वो मुझे पता है और बात यह कहते हुए भाभी अपनी मेक्सी उतार रही थी। तभी उसने भाभी का हाथ पकड़ाकर कहा कि तुम इतना कष्ट क्यों ले रही हो? में हूँ ना कहकर उसने धीरे से कहा कि इसे अब रहने दो में इसके बदले तुम्हारा पेटीकोट उतार देता हूँ।

फिर भाभी ने कहा कि नहीं नहीं प्लीज मुझे शर्म आती है। उसने कहा कि तुम्हे शर्म आती है, लेकिन तुम उतारना चाहती हो ना? भाभी ने कुछ नहीं बोला और अपनी आखों से इशारा किया कि हाँ तो उसने भाभी का हाथ अपने अंडरवियर पर रखकर कहा कि तुम इसे छू लो तुम्हारी सब शर्म दूर हो जाएगी। दोस्तों पहले तो भाभी ने मना किया, लेकिन फिर भाभी ने धीरे से अपना हाथ उस पर रखा और कहा कि अरे बाप रे यह क्या है? तो उसने कहा कि इसे लंड कहते है तो भाभी ने कहा कि वो तो मुझे भी मालूम है, लेकिन इतना बड़ा और फिर कहा कि प्लीज मुझे कुछ मत करना।

अब भाभी ने उसके लंड को कसकर पकड़ा और कहा कि सिर्फ़ पेटीकोट ही उतारना, उसने अब अपना अंडरवियर भी उतारा और पूरा नंगा हो गया। अब वो उसके लंड को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगी, इस बीच उसने भाभी की मेक्सी को और पेटीकोट दोनों ऊपर उठाए और ज़ोर ज़ोर से भाभी की जांघे मसलने लगा और फिर भाभी के पेटीकोट का नाड़ा खोला और एक ही झटके में भाभी का पेटीकोट अलग करके फेंक दिया और उसकी जांघो को पागलों की तरह चाटता रहा चूमता रहा।

अब ऐसे ही करीब 10-15 मिनट लगातार करने के बाद भाभी बोली कि अरे बस नीचे ही करते रहोगे या ऊपर भी करोगे। फिर वो ऊपर आ गया और उसने भाभी के बूब्स को ज़ोर दबाया भाभी अहहहहह चिल्लाई और कहने लगी कि हाँ बहुत मज़ा आ रहा है। अब उसने भाभी की ब्रा का हुक खोल दिया और भाभी ने उसे निकालकर फेंक दिया और फिर उसने एक बूब्स को अपने मुहं में ले लिया और दूसरे को दोनों हाथों से दबाने लगा और भाभी उसका लंड चूसने लगी। वो लंड चूसने का तरीका देखाकर हैरान होकर बोला तुम लंड चूसने ने माहिर हो या तुम्हे ऐसा लंड कभी भी नहीं मिला?

तो भाभी बोली कि हाँ तुम सच कह रहे हो मेरे राजा मुझे बहुत मज़ा आ रहा है, बस अब रुका नहीं जाता, अब में पूरी तरह से तुम्हारी हो गई हूँ, अब में आपको नहीं रोकूंगी कहकर उन्होंने अपनी दोनों जांघे चौड़ी कर दी और कहा कि अब और मत तड़पाओ जल्दी से एक धक्का मारो प्लीज़। फिर उससे भाभी की चूत में दो उँगलियाँ घुसा दी और ऊपर से चूत को चाटने लगा। इसी तरह 5-10 मिनट चलाने के बाद उसने भाभी के दोनों पैरों को और भी चौड़ा किया और अपने लंड को भाभी की चूत पर सेट किया और दबाने लगा। फिर एक ही झटके में पूरा लंड अंदर चला गया और भाभी के मुहं से अहहह्ह्ह्हह सीईईईईई क्या मर्द का लंड है आईईए अब रूको मत, जल्दी से अपनी गाड़ी चलाओ।

फिर उसने पहले दो चार झटके हल्के से लगाए और थोड़ी देर बाद उसने रफ्तार पकड़ ली और धन धना धन चोदने लगा। भाभी उसका अपनी गांड उठा उठाकर साथ दे रही थी और ज़ोर ज़ोर से आहहाह ऊओ उफुफूफूफुफ अहहहह्ह्ह्ह वाह कितना तगड़ा है रे तुम्हारा यह लंड, मेरी बहुत दिन की तमन्ना थी तेरे जैसे लंड से चुदने की और वो भी ज़ोर ज़ोर से धक्के लगता रहा और कहने लगा कि तू भी तो मस्त माल है लगता है कि तुझे जमकर चोदूं। फिर इस तरह 10-12 मिनट धक्के मारने के बाद उसने कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ। तो भाभी ने कहा कि कोई समस्या नहीं है, अंदर ही डाल दो तो उसने सारा वीर्य भाभी के अंदर ही छोड़ दिया और वो भाभी के पास में लेट गया।

फिर भाभी ने कहा कि में तैयार हूँ जितना चाहे चोद लो और अब भाभी उठी और उसका लंड मुहं में लेकर थोड़ी देर चूसकर उसे साफ कर दिया और फिर उसने धीरे से भाभी को घोड़ी बनाया और भाभी की गांड को सूंघने लगा और थोड़ी देर बाद उसने अपना लंड निकाला और भाभी की गांड पर सेट किया और हल्के से एक धक्का मारा तो उसका लंड अंदर नहीं गया। फिर भाभी ने अपनी गांड को और भी चौड़ा कर दिया और उससे कहा कि अब धक्का मारो। तो उसने फिर से अपना लंड सेट किया और धीरे से धक्का दिया तो उसका आधा लंड अंदर चला गया और भाभी के मुहं से अहहहहह आईईईईई की चीख निकली।

फिर उसने भाभी को धक्का देना शुरू कर दिया और भाभी भी अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए उसका साथ देने लगी और यह सब देखकर उसने बोला कि तू गांड मरवाने में एक्सपर्ट है और भाभी मुहं से अचानक निकला पड़ा कि बहुत दिन के बाद ऐसा तगड़ा लंड मिला है। तो वो मन में हंसा और उसने अपनी स्पीड को बड़ा दिया। करीब 15-20 मिनट में उसने भाभी के अंदर ही अपना वीर्य छोड़ दिया और दोनों एक दूसरे को लिपटकर सो गये। थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद भाभी ने कहा कि तुम बहुत अच्छी तरह से चोदते हो मुझे तुमसे चुदवाना अच्छा लग रहा है।

यह बात हुए भाभी ने उसे एक किस किया और अब उसके लंड को मसलने लगी। तो उसने कहा कि तुम भी मस्त माल हो बहुत मज़ा देती हो में चाहता हूँ कि रोज़ तुम्हारी चुदाई करता रहूँ। अब भाभी ने कहा कि में भी चाहती हूँ, लेकिन में मजबूर हूँ, लेकिन एक बात कहती हूँ इसके बाद जब भी मुझे मौका मिलेगा में तुम्हे ज़रूर बुलाउगी मेरे राजा।उसने भाभी को चार बार आगे से और दो बार पीछे से चोदा।

इस तरह उन दोनों ने रात भर चुदाई की और बहुत मज़े किए ।।

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चूत की बिछ गयी है बिसात https://sexstories.one/mohini-ki-chut/ Wed, 20 Oct 2021 06:26:05 +0000 https://sexstories.one/?p=3098 मैं मोहनी के साथ ही मिलकर काम करने लगा। मोहनी काफी अच्छे से काम करती थी। वह अपने काम में काफी ध्यान देती थी और अपना हर काम पर अच्छे से करती थी। जिससे मुझे वह काफी अच्छी लगती थी। मैं कभी भी कोई भी समस्या होती थी तो मै मोहनी को पूछ लेता था...

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sex stories in hindi mohini ki chut मेरा नाम सनी है। मैंने अभी-अभी अपना पोस्ट ग्रेजुएशन इसी वर्ष पूरा किया है और अब मैं नौकरी की तलाश में हूं। मैंने कई जगह पर अपनी नौकरियों के लिए बायोडाटा भेजा हुआ है। मुझे कई जगह से ऑफर आ रहे थे। लेकिन मेरा कहीं अच्छी जगह पर नहीं हो पा रहा था। कहीं पर वह लोग सैलरी कम देते तो कहीं पर टाइम ज्यादा था।

ऐसे ही एक दिन मुझे एक कंपनी से ऑफर आया। मैं वहां पर इंटरव्यू देने गया मैंने जैसा अपने इंटरव्यू दिया वहां पर मेरी जो बॉस की लड़की थी। वह भी मेरा इंटरव्यू ले रही थी। उसने बहुत ही अच्छे से इंटरव्यू लिया। मैंने उसको अपना इंटरव्यू दिया मेरा इंटरव्यू क्लियर होने के बाद उन्होंने मुझे एक सैलरी ऑफर कि मैंने उस सैलरी पर वहां ज्वाइन करने का फैसला किया। अब मैं उस कंपनी में ज्वाइन हो गया मेरी बॉस के लड़की का नाम मोहिनी था। वह दिखने में काफी हॉट थी। मुझे उसे देखकर बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन वह मेरी बॉस की लड़की थी इसलिए मुझे लिमिट क्रॉस नहीं करनी थी।

मैंने अगले दिन से ऑफिस ज्वाइन किया और पहले मेरा पहला दिन ऑफिस का था। मुझे वहां पर सब लोगों से मिलवाया गया। सब लोगों से मुलाकात हुई और मुझे मेरा काम सिखाया गया। एक हफ्ते तक तो मेरी ट्रेनिंग चली। मुझे सारी जानकारी दी गई कि ऑफिस में किस तरीके से काम करना है और कहां पर क्या चीजें हैं। सारी चीजें मुझे एक हफ्ते में बताई कि एक हफ्ते बाद मुझे पूरे काम की जिम्मेदारी सौंपी गई।

मैंने अपना कार्य करना शुरू कर दिया मेरे काम में कभी भी कोई शिकायत नहीं आती थी और सब लोग मुझसे खुश ही रहते थे।

एक दिन मेरी वजह से हमारी कंपनी को बहुत बड़ा प्रोजेक्ट मिल गया। जिससे खुश होकर मेरे बॉस ने एक पार्टी ऑर्गेनाइज कर दी पार्टी में सब लोगों को बुलाया गया जितने भी हमारे दफ्तर के लोग थे। वह सब लोग वहां आए तो मेरे बॉस ने मेरी काफी तारीफ की मेरी वहां पर और मुझे प्रमोशन भी मिला। प्रमोशन मिलने से मैं काफी खुश हो गया। अब और ज्यादा मैं काम करने लगा। काम करते करते ऐसे कई प्रोजेक्ट मेरे द्वारा मेरी कंपनी को मिलते गए और मेरा प्रमोशन होता गया।

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मैं मोहनी के साथ ही मिलकर काम करने लगा। मोहनी काफी अच्छे से काम करती थी। वह अपने काम में काफी ध्यान देती थी और अपना हर काम पर अच्छे से करती थी। जिससे मुझे वह काफी अच्छी लगती थी। मैं कभी भी कोई भी समस्या होती थी तो मै मोहनी को पूछ लेता था। उसका एक्सपीरियंस मुझसे ज्यादा था और वह उसकी कंपनी ही थी। वह काम अच्छे से करती थी। तो वह मेरी हेल्प कर दिया करती थी।

एक दिन लंच टाइम में हम लोग बैठे हुए थे। हम लोग आपस में काफी बातें करने लगे। वह मेरे बारे में पूछने लगी मैंने उसे अपने बारे में सारी जानकारियां दी। मैंने अपनी पढ़ाई कहां से पूरी की मेरे घर में कितने लोग ।हैं इस तरीके से मैंने उसे सारी जानकारी दी अब वह भी मेरी तरफ काफी आकर्षित हो गई थी। मैं मन लगाकर काम किया करता था। उसे मेरे काम काफी अच्छा लगता था। अब हम दोनों एक ही कैबिन में बैठने लगे थे। तो उसे जब भी कुछ आवश्यकता होती। वह मुझे बोल देती कि मुझे इस चीज की जरूरत है तो तुम मेरा यह काम करवा दो मैं उसके काम के लिए कभी मना नहीं करता था।

एक दिन वह ऑफिस में आई उसने वाइट कलर की शर्ट पहनी हुई थी। उसके अंदर उसकी ब्रा साफ साफ दिखाई दे रही थी। अब वह मेरे पास आकर बैठ गई। और मुझे उसकी ब्रा दिखाई दे रही थी। मैं थोड़ा अनकंफर्टेबल महसूस कर रहा था पहले तो उसे भी पता नहीं चला। लेकिन बाद में किसी ने शायद उसे बता दिया। उसने मुझसे पूछ लिया कि तुम मेरी  ब्रा देख कर थोड़ा अनकंफर्टेबल कर रहे हो। मैंने उसे कहा हां यही बात है। वह मुझसे बात करने लगी कि इसमें बुराई क्या है। इसमें कोई बुराई नहीं है।

यह कहते कहते उसने अपनी शर्ट उतार दी और अपनी ब्रा मुझे दिखाने लगी। मेरा लंड खड़ा हो गया और मेरा मूड पूरा खराब हो चुका था। मुझे भी ऐसा लग रहा था जैसे कुछ भी नहीं हुआ लेकिन मेरे लिए तो यहां बहुत कुछ हो चुका था। मैंने उसे समझाया कि यह सब ठीक नहीं है। आप अपनी शर्ट पहन लो लेकिन उससे भी शर्ट नहीं पहनी। मैं उसके पास गया और मैंने उसे कसकर पकड़ लिया। वह मुझे कहने लगी मुझे छोड़ो मैंने उसे छोड़ा ही नहीं मैंने उसे कहा जब मैं आपको मना कर रहा था तो आप मेरी बात नहीं मान रही थी। अब मैं आपको छोड़ने वाला नहीं हूं।

अब मैं तुम्हारी चूत मारूंगा। मैंने उसके बालों को पकड़ा अपनी पैंट की जिप खोलता ही अपने लंड को बाहर निकाल लिया। पहले वह मुझे मना कर रही थी। मैं नहीं करूंगी ओरल सेक्स लेकिन मैंने जबरदस्ती उसके मुंह में अपना लंड दे दिया जैसे ही मैंने उसके मुंह में लंड दिया तो उसे भी अच्छा लगने लगा।

मैं अंदर बाहर करने लगा जैसे-जैसे मैं उसके मुंह के अंदर बाहर करता जाता तो उससे  अच्छा लगता। मैंने उसके मुंह के पूरे अंदर तक लंड डाल दिया था। मेरे अंडकोष उसके मुंह पर लग रहे थे लेकिन उसे अच्छा लग रहा था। उसके बाद मैं कुर्सी पर बैठ गया। और मोहनी को मैंने अपनी गोद में बैठा लिया। जैसे ही मैंने उसे अपनी गोद में बैठाया तो मैंने उसकी पैंट को खोलना शुरू किया जैसे ही मैंने उसकी पैंट को खोला तो मैंने देखा उसने नेट वाली पैंटी पहनी हुई है। उसकी पैंटी बहुत ही सुंदर लग रही थी। जैसे ही मैंने उसकी पैंटी को हाथ लगाया तो वह काफी सॉफ्ट थी।

मैंने उसकी पैंटी को बीच में से पकड़ा और मैंने उसकी पैंटी फाड़ डाली। जैसे ही मैंने मोहनी की पैंटी फाड़ी। वैसे ही मुझे उसकी चिकनी योनि दिखाई पडी। वह काफी मुलायम और नरम थी। यह देख कर तो मेरा और मन खराब हो गया। मैंने कुर्सी में बैठे बैठे ही उसकी योनि में अपना लंड डाल दिया और उसे ऊपर नीचे करने लगा उसकी गांड मेरे लंड से टकराती और मैं उसकी योनि को अच्छे से चोदता जाता। अब उससे भी अच्छा लगने लगा था। तो वह भी ऊपर नीचे हो रही थी। वह काफी देर से ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि वह मेरे ऊपर ही बैठी हुई थी। इसलिए मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मुझे उसकी गांड से उसकी चूत साफ साफ दिखाई दे रही थी। जैसे ही उसकी चूत में लंड बाहर निकलता तो मुझे साफ साफ दिखाई देता कि मेरा लंड़ बाहर निकल रहा है। वह उसके ऊपर बैठ जाती मुझे काफी अच्छा लगा ऐसा देखते हुए।

मै ऐसे में ही खड़ा हुआ और उसने टेबल पर उसके दोनों हाथों को रखते हुए। उसके चूतड़ों को पकड़कर धक्का मारने लगा जैसे ही मै तेज तेज धक्के मारता। तो उसकी चुतड़ और तेज तेज हिलती। जिसे देख कर मुझे काफी अच्छा लग रहा था। ऐसा करते-करते काफी देर बाद मेरा गिरने को हो गया। मेरा गिरने वाला था। तो मैंने अपने लंड को बाहर निकाला और उसके मुंह से ओरल सेक्स कराने लगा जैसे ही मोहनी ओरल सेक्स कर रही थी तो मेरा माल गिर गया उसके मुंह के अंदर ही और उसने पूरा ही वीर्य अपने अंदर ले लिया।

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मोहनी मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लगा जो तुमने मेरे साथ सेक्स किया। मेरा एक बार और करने का मन हो रहा है। जैसे ही उसने यह कहा तो मैंने उसक चूत को चाटना शुरू कर दिया। जैसे जैसे मैं उसके स्तनों को चाटता जाता तो वह पागल होती जाती। अब मैंने उसकी चिकनी योनि में दोबारा से अपना लंड डाल लिया और धक्के मारने शुरू कर दिऐ लेकिन उसकी योनि अभी बहुत टाइट लग रही थी। मुझे मालूम नहीं पड़ रहा था कि इसकी योनि क्यों अभी तक ढिली नहीं हुई है लेकिन मुझे काफी अच्छा लग रहा था।

ऐसे ही में आधे घंटे तक उससे चोदता।  इस बार मेरा दोबारा वीर्य पतन होने वाला था तो मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि में ही डाल दिया। जिससे उसे काफी अच्छा लगा। अब हम दोनों ने अपने कपड़े पहनने लगे तो वह मुझे कहने लगे तुमने मेरी पैंटी की फाड़ दीया है। तो मुझे पैंटी कौन देगा मैंने उसे कहा मै तुम्हें पैंट ला कर दूंगा कल मैं तुम्हारे लिए नई पैंटी ले आऊंगा। उसको दोबारा फाड़ दूंगा यह सुनकर वह मुस्कुराने लगी और वह मुस्कुराते मुस्कुराते बाथरूम की तरफ चली गई।

जब वह बाथरुम से लौटी तो वह अपना मेकअप कर कर वापस आई। जिससे कि वह बहुत सेक्सी लग रही थी।

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शादी का सुख – पार्ट २ https://sexstories.one/shadi-ka-sukh-xxx-storiez/ Wed, 20 Oct 2021 06:13:59 +0000 https://sexstories.one/?p=3079 उफ़्फ़ ! जब उसने अपनी जीभ मेरी चूत के दाने पर फेरी तो मेरे तो बदन में जैसे बिजलियाँ दौड़ गई। मैंने अपनी दोनों जांघों में उसका सर दबा लिया और अपने दोनों हाथ उसकी पीठ पर फिराने लगी। गर्मी तो पहले ही मेरे दिमाग में चढ़ी पड़ी थी, सो दो मिनट में ही मैं तो झड़ गई...

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Shadi Ka Sukh – Shaadi sex मेरे लिए तो यही बहुत था, मैंने हाँ कह दी। करीब दो दिन बाद मौका भी मिल गया, भाभी अपने मायके गई और भाई भी उसके साथ गया था, तो घर में रात को कोई नहीं था, मैंने वीरू को सब बता दिया था। सो उस रात वो करीब 11 बजे मेरे घर आया। मैंने दरवाजा खोल कर उसे अंदर बुला लिया और भाई के कमरे में बैठा दिया। फिर जाकर देखा तो माँ सो चुकी थी। मैं फिर से भाई के कमरे में वापिस आ गई।

वीरू ने आते ही मुझे पकड़ लिया- इधर आ साली मोटी भैंस, इतना बड़ा जिस्म किसके लिए संभाल के रखा है?

मैंने भी कह दिया- सिर्फ तुम्हारे लिए !

बस यह सुनते ही वीरू ने मुझे बेड पर गिराया और मेरे ऊपर लेट गया। मेरी आखों में देखा और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये। होंठ चूसते चूसते एक दूसरे के जीभें भी चूसने लगे। मैंने वीरू को अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपनी टांगों को उसकी कमर के गिर्द जकड़ लिया। वो अभी आराम से लेटा था पर पर मैं नीचे से कमर उठा उठा कर अपनी चूत को उसके लण्ड पर रगड़ रही थी।

शायद मेरी बेकरारी वो समझ गया था, ‘करें?’ उसने पूछा, मैंने एक स्माइल से उसको इजाज़त दे दी।

तो वो मेरे ऊपर से उठा और उसने अपने सारे कपड़े उतार दिये, सिर्फ चड्डी छोड़ कर। उसकी चड्डी में से उसका खड़ा हुआ ल

Shaadi sex सेक्सी बीवी को नशे ने चोदा दोस्त ने

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और साथ में यह भी सुखद अहसास था कि आज कोई मेरा अपना बॉय फ्रेंड मुझे चोदेगा।

खैर छतियों को चूसने के बाद वो अपने हाथों और चेहरे से मेरे पेट और कमर को सहलाता हुआ, नीचे को गया और मेरी चूत के आस पास जांघों को सहलाता चूमता मेरे घुटनों तक गया और फिर वापिस आया और मेरी छाती पर बैठ गया।

उसका तना हुआ लण्ड मेरे सामने था, ‘चूस अपने यार को !’ उसने कहा तो मैंने उसका लण्ड अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। वो भी अपनी कमर हिला हिला कर मुझसे मुख मैथुन का आनन्द ले रहा था।

मैंने कहा- क्या तुम मेरी चाट सकते हो, मैंने आज तक कभी नहीं चटवाई, उस दिन मैंने देखा था जब तुम भाभी की भी चाट रहे थे।

वो मुस्कुराया और मेरे ऊपर उल्टा घूम गया, उसने मेरी दोनों टांगे चौड़ी की और अपना मुँह मेरी चूत से लगा दिया, मैंने भी उसका लण्ड पकड़ा और अपने मुँह में ले लिया।

उफ़्फ़ ! जब उसने अपनी जीभ मेरी चूत के दाने पर फेरी तो मेरे तो बदन में जैसे बिजलियाँ दौड़ गई। मैंने अपनी दोनों जांघों में उसका सर दबा लिया और अपने दोनों हाथ उसकी पीठ पर फिराने लगी। गर्मी तो पहले ही मेरे दिमाग में चढ़ी पड़ी थी, सो दो मिनट में ही मैं तो झड़ गई।

मेरी चूत का पानी वो चाट गया, मेरा बदन अकड़ गया, मैंने तो उसका लण्ड दातों से काट लिया। जब मैं थोड़ी ढीली पड़ी तो वो उठा और मेरी टांगे चौड़ी करके उनके बीच बैठ गया, ‘मज़ा आया?’ उसने पूछा।

“हाँ, बहुत !” मैं बोली।

‘तो लो अब और मज़ा लो, असली मज़ा !’ यह कह कर वो मेरे ऊपर लेट गया, तो मैंने उसका लण्ड पकड़ के अपनी चूत पर रखा। उसने धक्का मारा तो लण्ड अंदर नहीं गया, वो बोला- अरे टाइट मत करो, आराम से इसे अंदर लेने की कोशिश करो।

मैंने अपना जिस्म ढीला छोड़ दिया, जब उसने दोबारा धक्का मारा तो उसके लण्ड का सुपाड़ा मेरी चूत में घुस गया, मुझे दर्द हुआ, मेरे मुँह से हल्की सी चीख निकल गई, थी भी तो मैं सिर्फ 18-19 साल की।

उसने मेरे दोनों हाथों की उँगलियों में अपनी उँगलियाँ फंसाई और मेरे दोनों हाथ खींच के बिल्कुल ऊपर ले गया, मैंने अपनी टाँगों को उसकी कमर के गिर्द लपेट लिया, उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रखे, अपना लण्ड थोड़ा पीछे किया और दूसरा धक्का मारा, अबकि बार लण्ड थोड़ा और मेरे अंदर घुसा, मेरी दूसरी चीख मेरे मुँह से उसके मुँह में ही रह गई।

उसने फिर वैसे ही किया और इस तरह 4-5 घस्सों में उसने अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में उतार दिया। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने लकड़ी का कीला ठोक कर मेरे पेशाब करने की जगह को ही बंद कर दिया हो। मेरी आँखों के दोनों किनारों से आंसू निकल आए, पर उसने कोई परवाह नहीं की।”तेरी चूत बहुत टाइट है, आज तक इतनी टाइट चूत नहीं देखी।”

मैंने भी कहा- तुम पहले इंसान हो जिसने मेरी सील तोड़ी है, आज से पहले इसमे सिर्फ मेरी उंगली या पैन वगैरह ही गए हैं।

यह सुन कर वो बहुत खुश हुआ- वाह, तो आज तो कच्ची फाड़ दी, शुक्रिया भगवान !

यह कह कर वो हँसा और फिर तो चल सो चल, वो आगे पीछे करता रहा। जब मैंने भी फिर से पानी छोड़ना शुरू कर दिया तो वो अपना पूरा लण्ड मेरी चूत के आखरी सिरे तक लेजा कर मुझे चोद रहा था। बेशक मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था पर फिर भी मज़ा आ रहा था। जितना वो ऊपर से ज़ोर लगा रहा था, उतना मैं नीचे से कमर उठा उठा कर उसका साथ दे रही थी।

हम दोनों के बदन पसीने से भीग रहे थे, पर संभोग की गाड़ी पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी।

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करीब 8-10 मिनट की चुदाई के बाद उसने अपनी मर्दांगी का सारा रस मेरी चूत में उड़ेल दिया। वो थक कर मेरे ऊपर ही लेट गया। जब उसका लण्ड ढीला पड़ा तो अपने अपने आप मेरी चूत से बाहर निकल गया और उसके साथ उसका वीर्य भी मेरी चूत से बाहर चू गया।

मैं इस बात को लेकर बहुत खुश थी के चलो जो भी सही पर आज कोई है जिसने मेरा कौमार्य भंग कर दिया।

कुछ देर हम लेटे रहे, फिर उसने कहा- मैं तुम्हें फिर से चोदना चाहता हूँ, एक बार फिर से करें?

मैंने बड़ी खुशी से हाँ कही। उस सारी रात हम सोये नहीं, और पूरी रात में उसने 4 बार मेरे साथ सेक्स किया, मेरी फ़ुद्दी रगड़ी।

सुबह करीब 5 बजे वो चुपचाप से मेरे घर से निकाल गया। लेकिन उसके बाद कभी ऐसा मौका नहीं मिला। वीरू फिर भी हमारे घर आता था, पर भाभी ने उसे कभी मेरे लिए नहीं छोड़ा, जब भी वो आता तो भाभी ही उस से मज़े लेती, मुझ तक तो पहुँचने ही नहीं देती।

फिर वीरू भी बाहर चला गया। मेरी पढ़ाई पूरी हो गई, एम ए बी एड करके मैं फिर अपने ही स्कूल में टीचर लग गई, पर न तो मेरी शादी हुई, और न ही चुदाई।

भाभी आज भी मज़े ले रही है, और आज भी मैं अपनी काम-पिपासा बैंगन, खीरा जैसी चीजों से शांत करती हूँ।

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सेक्सी गाँववाली भाभी https://sexstories.one/bhabhi-ne-maja-diya-gaon-mein/ Mon, 06 Sep 2021 09:46:31 +0000 https://sexstories.one/?p=4244 में सेंडी मेरी उम्र 22 साल है मे मुंबई (दादर) मे रहता हूँ मेने इसकी सारी कहानियां पढ़ी है आज मे अपनी एक कहानी लिख रहा हूँ पसंद आये तो रिप्लाई ज़रूर करना यह बात ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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में सेंडी मेरी उम्र 22 साल है मे मुंबई (दादर) मे रहता हूँ मेने इसकी सारी कहानियां पढ़ी है आज मे अपनी एक कहानी लिख रहा हूँ पसंद आये तो रिप्लाई ज़रूर करना यह बात पुरानी है क्रिसमस की छुट्टी थी और मेरे दोस्त (रवि) के घरवाले उनके गावं मुझे भी ले गये थे मुझे गावं मे अच्छा लगता है तो हम रात की गाड़ी बेठे और दोपहर को उनके छोटे से गावं मे पहुँच गये हम सिर्फ़ 3 लोग ही गये थे मे रवि की माँ और पापा उनके गावं के घर मे सिर्फ़ उनका चचेरा बेटा और उसकी वाइफ ही रहती थी उनकी उम्र करीब 35-38 साल होगी और क्या गजब का फिगर था 40-39-42 उनके बूब्स तो बड़े बड़े मुझे तो ऐसा लग रहा था की अभी जाकर उनके बूब्स ज़ोर ज़ोर से दबाऊँ और चूस चूस के उनका सारा रस पी जाऊं भाभी काफ़ी फ्रेंकली थी.

मेरी उनसे झट से दोस्ती हो गई मे अब उनके साथ खेत मे भी काम करने जाता था एक दिन मे और भाभी अकेले ही खेत पर काम कर रहे थे तब भाभी काम मे इतनी व्यस्त थी की उनको पता नही था की उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा है और उनके बूब्स जैसे ब्लाउज फाड़कर बाहर आना चाहते है मेरा सारा ध्यान उनके बूब्स पर था कुछ देर बाद भाभी ने मेरी नज़र को समझा की में उन्हें देख रहा हूँ और उन्होने कुछ नही कहा और ऐसे ही काम कर रही थी फिर हम दोपहर को खाना खा रहे थे.

तब भाभी ने जानबुझ कर अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिराया और मुझे अपने बूब्स दिखा रही थी मेरा तो लंड अब जागने लगा था और मेरी हाफ पेन्ट में से साफ दिख रहा था और भाभी भी मेरे खड़े लंड को चोरी से देख रही थी खाना खाने के बाद भाभी ने मुझे कहा की मेरी कमर मे ज़रा दर्द हो रहा है की तुम दबा दोगे क्या?’ मेने हाँ क़ह दी और भाभी को लेटने को कहा भाभी लेट गई और मे उनके बाजू मे बेठ कर उनकी आधी नंगी पीठ और कमर पर दबाने लगा मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था अब मे सोचने लगा की कैसे भाभी को चोदू फिर भाभी बोली ज़रा ठीक से दबाओ ना अब मे उनके उपर बेठा और कमर को दबाने लगा.

ऐसा करने से मेरा लंड उनकी गांड को टच हो रहा था और मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और भाभी भी मज़ा ले रही थी और अपनी आँखे बंद करके अपना निचला होठ दांतों मे दबा रही थी अब मेरा लंड पूरा उनकी गांड मे रगड़ लगा रहा था और भाभी भी अब गर्म हो गई थी मेने अब धीरे धीरे अपना हाथ उनकी कमर से होते हुये पीठ पर ले गया और पीठ को दबाने लगा और नीचे उनके बूब्स मेरी उंगलियों को टच हो रहे थे अब भाभी पूरी गर्म हो गई थी और मे भी फिर मेने हिम्मत करके उनके बूब्स को ज़ोर से दबाया भाभी के मुँह से सिसकारी निकली आआआहह ज़रा आराम से दबाओ ना? अब मे समझ गया की भाभी भी चुदवाना चाहती है तब मेने उनको सीधा किया और उनके बूब्स को दबाने लगा और उनके लिप पर किस करने लगा उनको किस नही आ रहा था पर मे फिर भी किस कर रहा था.

थोड़ी देर बाद मेने उनका ब्लाउज निकाल दिया और उनके बड़े बड़े बूब्स मेरे सामने आज़ाद हो गये मे पागलो की तरह उन्हे देख रहा था और भाभी बोली सिर्फ़ देखोगे या इनका रस भी पीओगे कहते ही मेरे सर को अपने बूब्स पर दबाने लगी मे अब उनकी एक बूब्स को मुँह मे लेकर चूसने लगा और दूसरे को एक हाथ से दबाने लगा क्या मस्त स्वाद था ऐसा लग रहा था की छोड़ मत इन्हें और भाभी तडपती और कहती हाहहआ और ज़ोर से चूस राजा बड़ा मजा आ रहा है हाईईईई हाँ और मेरे सर को और ज़ोर से अपने बूब्स पर दबाने लगी करीब 10 मिनिट से में उनके बूब्स को चूस रहा था इस दोरान मेने उनकी साड़ी निकाल दी और अब वो मेरे सामने पेटीकोट मे थी और मे उनके पेटीकोट के उपर से ही उनकी चूत को चोदने लगा.

अब उनकी चूत पूरी तरह गीली हो गई थी अब मेने उनको पूरा नंगा कर दिया और उनको खड़ा कर दिया अब भाभी की चूत मेरे सामने थी मेने चूत पर किस की तो उन्होंने आहे भरी और बोली ये क्या कर रहे हो राजा अब मे उनके दाने को दातो से दबाने लगा और एक उंगली उनकी चूत मे डालने लगा उनकी चूत पानी छोड़ रही थी और भाभी हाह्ह्ह्ह मेरी जान क्या कर रहे हो पागल करेगा क्या हाईईइ बड़ा मजा आ रहा है मेरे लाल और चूसो मेरी चूत को हाआअ और जोर से मेरा पानी निकलने वाला है हाँ और हाह्ह्हआ मे आईईईईई बल्ल्लम और कहते ही झड़ गई और हाफ़ने लगी और मुझे उपर खीच के बोली हाईईईई इतना मज़ा तो मुझे पहली रात मे भी नही आया था कहा से सीखा.

कहते ही मेरे लंड को पेन्ट के उपर से ही सहलाने लगी और मुझे झट से नंगा कर दिया भाभी अभी झड़ी थी इस वजह से अब मेने उनको फिर से गर्म करने के लिये उनकी चूत को सहलाने लगा और बूब्स को चूसने लगा अब भाभी भी गर्म हो गई थी मेने उनको मेरे लंड को चूसने कहा तो उन्होने मना कर दिया मेने कोई जबरदस्ती नही की और उनके खड़े होते ही अपना लंड उनकी चूत के दरवाजे पर रखा और रगड़ने लगा भाभी बोली अब डाल भी दो क्यो तडपा रहे हो और खुद ही मेरे लंड को पकड़ के चूत पर रखा और मुझे धक्का देने को कहा मेने एक ज़ोरदार शॉट मारा और मेरा आधे से ज्यादा लंड उनकी चूत मे चला गया और वो बोली हाईईइ क्या धक्का मारा है.

ऐसे ही धक्के मारो मेरे लाल और मेने दूसरा धक्का और तेजी से मारा और मेरा पूरा का पूरा लंड उनकी चूत मे चला गया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा करीब 7 मिनिट के बाद भाभी को और मज़ा आने लगा और वो बोल रही थी हाह्ह्हअ जोर ज़ोर से मेरे राजा मार और मार मिटा दे इस रानी की खुजली हाँ मारे जा क्या मस्त चोदता है तु ऐसा तो कभी मेरे पति ने भी नहीं चोदा मुझे हाँ मेरे लाल मार अपनी दोस्त की भाभी की चूत हाँ मेरे लाल में झड़ने वाली हूँ हाँ और जोर से कहते ही झड़ गई पर मे झड़ा नही था मेने उनको घोड़ी बनने को कहा और अपने लंड को उनकी गांड के छेद पर रखा और ज़ोरदार शॉट मारा की भाभी चीख निकल गई हरामी क्या गांड फाड़ेगा मेरी आराम से मार हाईईई दया मुझे तो मारररर ही डाला रे.

अब मे उनकी गांड को ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा मेरा अब निकलने वाला था तो मेने उनको पूछा की कहा निकालु तो वो बोली मेरी गांड में ही निकालो और जो दर्द हो रहा है वो मिट जायेगा और मे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा करीब 2 मिनिट के बाद मे उनकी गांड मे झड़ा और ऐसे ही उनके उपर लेटे रहा 10 मिनिट के बाद हम अलग हुये और भाभी बोली की आज जैसा मज़ा मुझे कभी नही मिला और मुझे किस करने लगी फिर हमने कपड़े पहने और घर आये उसके बाद मेने उनके 3 बार चोदा बड़ा मज़ा आया.

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हमारी किरायेदार https://sexstories.one/%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%87%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0-hindi-sex-stories/ Fri, 07 Aug 2020 09:37:23 +0000 https://sexstories.one/?p=44 मेरा नाम राहुल है, बीस साल का हूँ, मैं महाराष्ट्र में कोल्हापुर में रहता हूँ और सांगली के कॉलेज में पढ़ता हूँ। यह मेरा पहला यौन अनुभव है जिसे मुझे आप सबके साथ बांटने में ख़ुशी ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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मेरा नाम राहुल है, बीस साल का हूँ, मैं महाराष्ट्र में कोल्हापुर में रहता हूँ और सांगली के कॉलेज में पढ़ता हूँ। यह मेरा पहला यौन अनुभव है जिसे मुझे आप सबके साथ बांटने में ख़ुशी होगी। हमारे घर का ऊपर का माला हमने किराये पर दिया है जिसमें एक खूबसरत आंटी और उसका पति रहता है, उनकी शादी को कुछ 2-3 साल हुए हैं पर अभी तक उन्हें कोई बच्चा नहीं है। आंटी बहुत खूबसूरत और सेक्सी हैं। desi sex chudai

वो जबसे हमारे यहाँ रहने आये थे तब से ही मुझे उस आंटी के साथ सेक्स करने की ख्वाहिश थी और मेरी हरकतों से वो यह जान गई थी। उसका बदन ही ऐसा है कि कोई भी उस पर फ़िदा हो जाये, गोरा बदन, लम्बे बाल बड़े-बड़े भरे हुए स्तन, वो जब चलती है तो उसकी गांड क्या मस्त दिखती है ! उसका आकार होगा 38″…

जब भी मौका मिलता, मैं उसके बदन को छूता और वो कुछ नहीं कहती थी। ऐसा बहुत दिन तक चलता रहा। अब मैंने उसके साथ सेक्स करने की योजना बनाई।

एक दिन मेरे घर वाले एक शादी में जाने वाले थे। तब मैंने “मेरी तबीयत ख़राब है !” यह कह कर जाने को टाल दिया…

Daily chudai story – पारुल की वर्जिन चुत

जब सब चले गए तो मैं उस आंटी के कमरे में चला गया। उसका पति भी दफ़्तर गया हुआ था और रात को आठ बजे के बाद आने वाला था। अब पूरे घर में हम अकेले ही थे। मैंने पहले तो उससे यहाँ-वहाँ की बातें शुरु की, फिर उसके काम में हाथ बंटाने लगा और इसी बहाने उसे बार-बार छूने लगा और जब मुझे पूरा यकीन हो गया कि उसे कोई एतराज नहीं है तो मैंने अचानक उसका हाथ पकड़ लिया।

उसने कहा- यह क्या कर रहे हो? desi sex

मैं डर गया लेकिन और थोड़ी हिम्मत कर के मैंने कहा- आज कुछ मत बोलो !

और उसे अपनी तरफ खींच लिया। तब वो मुझसे अलग होने की झूठी कोशिश करने लगी, फिर मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूमने लगा। कुछ देर बाद वो भी गर्म होने लगी और मेरा साथ देने लगी।

फिर मैंने उसकी चुनरी हटा दी और उसके पूरे शरीर पर हाथ फिराने लगा। मैंने उसकी कमीज़ की ज़िप खोल दी और अन्दर हाथ डालकर उसकी पीठ पर हाथ घुमाने लगा। फिर मैं उसके गले पर, उसकी पीठ पर चूमता रहा। फिर मैंने उसकी कमीज़ पूरी उतार दी, जिससे उसका गोरा बदन, उसकी गुलाबी रंग की ब्रा मेरे सामने आ गई। यह सब देख कर मेरा लंड फटा जा रहा था। फिर मैंने उसके स्तनों को ब्रा के ऊपर से ही चूसना शुरु किया और अपने हाथों से उसकी ब्रा खोल दी। जैसे ही मैंने ब्रा खोली, वो दो बड़े-बड़े स्तन छलांग लगा कर मेरे सामने आ गए। मैंने हल्के से उन्हें अपने हाथों में पकड़ा और जोर से दबा दिया और साथ मैं अपने दांतों से उसके चुचूकों को काटने लगा, जिसकी वजह से उसकी मुँह से आह की जोर से आवाज निकली…

फिर बहुत देर तक मैं उसके स्तन चूसता रहा… desi sex

फिर मैंने उसकी सलवार निकाल दी, उसने गुलाबी रंग की पैंटी पहनी थी जो अब आगे से भीग चुकी थी। मैं उसे बिस्तर पर ले गया और अपनी टी-शर्ट और जींस उतारकर उसके ऊपर आ गया। मैंने उसे बहुत चूमा उसके स्तनों को बहुत चूसा और नीचे की तरफ बढ़ा…

पहले तो मैंने उसकी पैंटी के आसपास अपनी जीभ घुमाई और फिर पैंटी के ऊपर जीभ घुमाने लगा। उसे बहुत अच्छा लग रहा था और वो मुँह से आह उम् ऊह्ह की आवाजें निकाल रही थी।

फिर मैंने अपने दांतों से पकड़ कर उसकी पैंटी निकाल दी और उसकी गीली गोरी चूत को देख कर पागल हो गया, मैंने अपनी जीभ जैसे ही उसकी चूत पर लगाई उसने मेरे बालों को खींच कर मुझे अपनी चूत के ऊपर दबा दिया और मुँह से सेक्सी आवाजें निकालने लगी।

मैंने बहुत बार ब्लू फिल्म में चूत को चाटते हुए देखा है लेकिन तब पहली बार ऐसा किया … मैं उसकी चूत को बहुत देर तक चूसता रहा। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में भी डाली और वो सेक्सी आवाजें निकालती गई…

फिर वो उठ गई और मेरा लंड बाहर निकाला और बिना हाथ लगाये सीधे मुँह में ले लिया। इतना अच्छा मुझे कभी नहीं लगा था…

वो मेरे लण्ड को मुँह में लेकर वो अपने मुँह को ऊपर नीचे करने लगी …. यह मेरा पहला ही सेक्स अनुभव था इसलिए दो मिनट में मैंने उसका मुँह अपने माल से भर दिया और वो उसे ऐसे पी गई जैसे पानी हो…

Office sex kahani – ऑफिस में माया की सामूहिक चुदाई

गजब की बात तो मुझे यह लगी कि मेरा माल निकलने के बाद भी मेरा लंड खड़ा का खड़ा था और वो उसे चूसे जा रही थी। फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए और मैं उसकी चूत और वो मेरा लंड चूसने लगी और दूसरी बार मेरा माल उसने अपने मुँह में भर लिया।

उसने कहा- अब मुझसे और सहा नहीं जा रहा, जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो ! desi sex

और यह कहते हुए वो बिस्तर पर लेट गई और अपने पैर फैला दिए। उसकी चूत को देख कर मैं उसके ऊपर आ गया और उसने अपने हाथों से मेरा लंड अपनी चूत पर रख लिया। फिर मैं अपना लंड उसकी चूत पर थोड़ी देर रगड़ता रहा और अचानक ही उसकी चूत में घुसा दिया जिससे वो चीख उठी, मेरा अभी आधा लंड ही उसकी चूत में था, मैंने और जोर लगाया और उसकी चूत में पूरा घुसा दिया, जैसे ही पूरा अन्दर गया उसने मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गड़ा दिए.. फिर मैं उसे उस अवस्था में तब तक चोदता रहा जब तक मेरा माल नहीं निकल गया।

उस बीच मैंने उसके होंठों को बहुत चूसा और उसे भी यह बहुत अच्छा लगता था तो वो मेरा पूरा साथ दे रही थी।

चोदते-चोदते मैं उसके स्तन और चुचूक भी जोर से दबा रहा था लेकिन चुम्बन की वजह से वो चीख भी नहीं पा रही थी बस मुँह में ही आवाज निकाल रही थी। कुछ देर बाद वो मुझे जोर से चोदने को कहने लगी तो मुझे पता चल गया कि वो पानी छोड़ने वाली है।

मैं उसे जोर से चोदता रहा और उसने अपनी सांस रोक कर पानी छोड़ दिया, कुछ देर बाद मैंने भी अपना माल निकाल दिया।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा और पीछे से उसकी चूत चाटने लगा। पीछे से उसकी गांड क्या खूब लग रही थी, कुछ देर चूत चाटने के बाद मैं उसकी गांड भी चाटने लग गया और उसकी गांड गीली कर दी। फिर मैंने अपनी एक ऊँगली उसके मुँह में चाटने के लिए दी और उसकी गांड में घुसा दी। उसकी गांड कुँवारी थी तो उसे दर्द होने लगा और वो निकालने के लिए बोलने लगी। फिर दो मिनट बाद मैंने उंगली निकाल ली और अपना लंड उसकी गांड के ऊपर रख दिया।

वो मुझे कहने लगी- गांड मत मारो ! desi sex

लेकिन मैंने उसकी एक नहीं सुनी, कब से मैं उसकी गांड को देख-देख कर मुठ मारता था और आज मौका मिला तो कैसे जाने देता…

फिर मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी गांड में डालने की कोशिश की, लेकिन नहीं गया। फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी गांड को बाहर की तरफ खींच दिया और फिर बहुत जोर से अपने लंड को धक्का दिया। तब सिर्फ आगे का हिस्सा ही अन्दर गया और वो- आह मर गई इसे बाहर निकालो…आह …. करके चीखने लगी …

लेकिन मैंने और एक धक्का दिया तब आधा अन्दर गया और जब तीसरी बार कोशिश की तो पूरा का पूरा उसकी गांड में फिट बैठ गया… वो बहुत चीख रही थी, उसे बहुत दर्द भी हो रहा था… फिर मैं थोड़ी देर ऐसे ही चुप रहा और नीचे से मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाल दी और हिलाने लगा। तब उसे थोड़ा अच्छा लगने लगा।

फिर धीरे धीरे मैं अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा और उसकी चूत में भी ऊँगली डालता रहा। कुछ देर बाद उसे भी मजा आने लगा और मैं जोर से उसकी गांड मारने लगा…

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मैं जब उसकी गांड मार रहा था तो उसके स्तन बहुत जोर जोर से हिल रहे थे… desi sex

कुछ देर बाद मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी तो उसे दर्द होने लगा और वो मुँह से सेक्सी आवाजें निकालने लगी। जिससे मुझे और अच्छा लग रहा था।

और दो मिनट बाद मैंने अपना सारा माल उसकी गांड में निकाल दिया। जैसे ही मैंने लंड बाहर निकाला, मेरा माल उसकी गांड के बाहर आने लगा।

उसके बाद हमने आराम किया और कुछ देर बाद मैंने उसकी चूत और गांड फिर से मारी…

यह मेरा पहला सेक्स अनुभव है आपको मेरी कहानी कैसी लगी, यह जरूर बताइए..

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खट्टी मीठी चुत की चुदाई https://sexstories.one/story-in-hindi-chut-ki-chudai/ Thu, 06 Aug 2020 20:52:17 +0000 https://sexstories.one/?p=733 मेरे भैया की शादी मेरे कॉलेज में आने के कुछ ही दिनों बाद तय हो गई और कुछ ही दिनों बाद शादी भी हो गई। मैं कॉलेज परीक्षा के कारण शादी में नहीं जा सका। शादी के ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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मेरे भैया की शादी मेरे कॉलेज में आने के कुछ ही दिनों बाद तय हो गई और कुछ ही दिनों बाद शादी भी हो गई। मैं कॉलेज परीक्षा के कारण शादी में नहीं जा सका। शादी के अगले दिन भैया का फ़ोन आया और उन्होंने मेरी भाभी से बात कराई। story in hindi

फिर एक दिन उन्होंने भाभी की एक फोटो मुझे ईमेल की।

फोटो में भाभी क्या माल लग रही थी।

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मैंने पहली बार में ही फोटो देख कर रूम में मूठ मार ली।

फिर धीरे धीरे भाभी से फ़ोन पर बात होने लगी।

मैंने इशारों ही इशारों में भाभी को बताया कि मैं जवान हो चुका हूँ और मुझे लड़की की जरूरत है।

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भाभी बार बार कहती- लड़की के साथ क्या करोगे?

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इसी तरह जब एक दिन उन्होंने कहा तो मैंने बोल दिया- जो आप भैया के साथ करती हो…

तो उन्होंने कहा- तुम बिगड़ गए हो।

ऐसे ही भाभी के संग गर्म और खट्टी मीठी बातें करते करते मेरी परीक्षा ख़त्म हुई और मैं घर आ गया।

जब मैंने भाभी को पहली बार देखा तो वो लाल रंग की साड़ी पहने हुए थी, गहरे गले के ब्लाउज में उनके नितम्ब मानो बाहर आने को बेताब हो रहे थे।

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मेरा लौड़ा तुरंत खड़ा हो गया और मैंने किसी तरह उसे संभाला और बाथरूम जाकर मूठ मारी।

अब मैं हर समय इस ताक में रहता कि कब भाभी के संग कुछ करने का मौका मिले।

भाभी भी मुझे सबकी नजरों से बच कर कभी आँख मारती तो कभी मेरे खड़े लंड की ओर इशारा करती।

इसी तरह छः दिन बीत गये।

एक दिन अचानक भैया को किसी काम से बाहर जाना पड़ा।

मैंने सोचा कि मौका अच्छा है अब जल्द ही कुछ करना पड़ेगा।

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गर्मियों के दिन थे तो रात को सब नहा कर सोते थे।

उस दिन जब रात को भाभी के नहाने का समय हुआ तो मैं जान बूझ के बाथरूम में चला गया और नंगा होकर नहाने लगा।

मैंने जानकर दरवाज़ा बंद नहीं किया था।

थोड़ी देर बाद भाभी आई और बाथरूम में घुसी।

जब मैंने उनको देखा तो लंड छुपाने का नाटक करते हुए सॉरी बोलने लगा।

मगर उन्होंने कहा- मैं भी तो देखूँ, तुम्हारा कैसा है और जो तुम्हारे भैया मेरे साथ करते हैं वो तुम कर पाओगे या नहीं?

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तो मैंने हाथ हटाए और मेरा सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा लंड सामने आ गया।

भाभी मेरे नजदीक आई और लंड सहलाते हुए बोली- वाह देवर जी, यह तो तैयार है।

तो मैंने मौका ना खोते हुए बोला- तो करने दो न मुझे भी?

इस पर वो बोली- अभी मम्मी पापा जगे हुए हैं थोड़ी देर बाद वो सो जायेंगे तब तक मैं नहा कर आती हूँ।

फिर भी मैंने जिद की- कम से कम इसे सुला तो दो!

तो उन्होंने मेरे लंड को मुख में लेकर चूसना शुरु किया और पांच मिनट में मैं उनके मुँह में ही झड़ गया।

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फिर मैं अपने कमरे में आकर सो गया।

थोड़ी देर बाद मुझे शरीर पर कुछ रेंगता हुआ लगा।

मैं पलटा तो देखा कि भाभी काले रंग की साड़ी पहने मुझे सहला रही हैं।

मैं तुरंत उनको किस करने लगा तो उन्होंने कहा- देवर जी इतनी क्या जल्दी है, अभी चार दिन हमारे हैं। आपके भैया चार दिन बाद आयेंगे!

कहते हुए वो मेरी हाथ पकड़ कर मुझे अपने कमरे में ले गई।

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अन्दर जाने के साथ मैं उन्हें किस करने लगा।

अब वो भी मुझे एक हवसी की तरह चूमे जा रही थी।

दस मिनट तक चूमने के बाद मैंने उसके कपड़े उतारने शुरु किये।

वो भी मुझे नंगा कर रही थी।

अब वो सिर्फ काले रंग की ब्रा और पैंटी में थी।

उफ़ क्या लग रही थी वो…

मेरा लंड तो अंडरवियर फाड़ कर बाहर आने को आतुर हो रहा था।

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फिर मैंने भाभी की ब्रा हटा कर उनके चूचे दबाने शुरु कर दिये, वो भी धीरे धीरे मेरा लंड सहलाने लगी।

अब हम दोनों पूरी तरह नंगे हो चुके थे और मैं अपनी भाभी की चिकनी चूत चाटने लगा।

पता नहीं कैसा खट्टा मीठा नमकीन सा स्वाद था भाभी की गर्म और गीली चूत का !

फिर 69 में आकर हम दोनों ने आठ मिनट तक एक दूसरे को चूम-चाट कर मज़ा दिया।

अब वो पूरी तरह गर्म हो चुकी थी और बोलने लगी- जल्दी से चोद दो मुझे…

तो मैंने अपना लंड चूत से रगड़ते हुए एक ही झटके में आधा अन्दर डाल दिया।

वो बोली- आराम से डालो… दर्द होता है।

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थोड़ी देर रुकने के बाद मैंने दूसरा झटका लगाया और पूरा लंड अन्दर डाल दिया।

अब मैं धीरे धीरे लंड अन्दर बाहर करने लगा।

करीब दस मिनट तक चोदने के बाद मैं उनकी बुर में ही झड़ गया।

इस तरह मैंने अगले चार दिन तक दिन रात 9 बार अपनी भाभी को चोदा।

फिर भैया भी आ गए और मेरी छुट्टियाँ भी ख़त्म हो गई।

अब मैंने कैसे भाभी की बहन को चोदा, वो अगली कहानी में…

मेरी कहानी कैसी लगी, जरूर बताइयेगा।

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खेत में माँ की चुदाई देखी https://sexstories.one/hindisex-khet-me-maa-ki-chudai/ Thu, 06 Aug 2020 20:17:17 +0000 https://sexstories.one/?p=708 मेरा नाम राज है हमांरे परिवार में मैं, माँ और पापा हैं। मेरे पापा सेल्समैन हैं, वो कई कई दिनो तक बाहर रहते हैं…।वैसे भी हमांरे सारे सम्बन्धी गांव में रहते हैं, हम साल में ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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मेरा नाम राज है हमांरे परिवार में मैं, माँ और पापा हैं। मेरे पापा सेल्समैन हैं, वो कई कई दिनो तक बाहर रहते हैं…।वैसे भी हमांरे सारे सम्बन्धी गांव में रहते हैं, हम साल में दो या तीन बार जाते हैं। वहाँ हमांरे ताऊ जी रहते हैं, उनकि पत्नी की मौत के बाद वो अकेले ही रहते हैं। हम नवरात्रि में गाँव जाने वाले थे। hindisex

पापा भी आने वाले थे लेकिन उनको कुछ काम आ गया तब उन्होंने हम दोनों को गांव जाने के लिये कहा।

माँ ने कहा- ठीक है।

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तब मैंने देखा कि माँ खुश थी और पैकिंग करने लगी। हम लोग सुबह की ट्रेन से गाँव पहुँच गये। वहाँ ताऊ जी हमें लेने के लिये आये हुये थे। माँ उनको देख कर खुश हो गई और ताऊ जी भी खुश हुए, उन्होंने पूछा- परिमल नहीं आया?माँ ने कहा- उनको कुछ काम आ पड़ा है, वो दो तीन दिन बाद आयेंगे।

और ताऊ जी माँ को देखते रहे और माँ भी उनको देखते रही। मुझे कुछ दाल में काला नजर आया…हम लोग बैलगाड़ी में बैठे और ताऊ जी ने मुझे कहा- तुम चलाओ।मैंने कहा- ठीक है।

माँ और ताऊ जी पीछे बैठ गये। थोड़ी दूर चलने के बाद मैंने माँ की आवाज़ सुनी, पीछे देखा तो ताऊ जी का पैर माँ के साये में था और माँ ने मुझ से कहा कि सामने देख कर चलो।

हमें लोग घर पहुंचे तब माँ बाथरूम में चली गई और थोड़ी देर बाद बाहर आई…ताऊ जी ने कहा- चलो, तुमको खेत में ले चलता हूँ।माँ मुस्कुराते हुए बोली- हाँ चलिये।मैं भी साथ था।

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हम लोग खेत में पहुँचे तो मैंने ताऊ को जी माँ की गाण्ड पर हाथ फिराते हुए देखा।तब माँ ने कहा- लड़का इधर है, वो देख लेगा।उनको पता नहीं था कि मैंने देख लिया था।

तब ताऊ जी ने मुझसे कहा- बेटा, तुम दूर जा कर खेलो। मुझे तुम्हारी माँ से बातें करनी हैं।

तो मैंने माँ को देखा तो माँ ताऊ जी के सामने देख कर मुस्कुरा रही थी और मुझे कहा कि तुम यहाँ से जाओ…मैं वहाँ से चलने लगा और माँ-ताऊ जी भी खेत के अन्दर दूर जाने लगे। मुझे दाल में काला नज़र आया।

मैं भी उनके पीछे पीछे गया तो देखा कि ताऊ जी माँ की दोनों एक पेड़ की आड़ में चले गये और माँ पेड़ से लग कर खड़ी हो गई।

अब ताऊ जी अपना हाथ माँ के साये में डालने लगे और माँ भी अपना साया उठा कर उनका साथ देने लगी। लेकिन मुझे उनकी कोई भी बातें सुनाई नहीं दे रही थी, इसलिये मैं और नज़दीक गया और सुनने लगा।

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तब वो दोनों पापा की बातें कर रहे थे।माँ कह रही थी- कितने दिन बाद मुझे यह तगड़ा लौड़ा मिल रहा है, वरना परिमल का लौड़ा तो बेकार है।अब माँ के बुर को दोनों हाथ से फैलाया।

माँ थोड़ा सा विरोध कर रही थी लेकिन उनके विरोध में उनकी हामी साफ दिख रहा थी। इसके बाद ताऊ जी माँ के बुर पर लण्ड सटा कर हलका सा कमर को धक्का लगाया। माँ के मुँह से अह्हहह की आवाज निकल गई।मैं समझ गया कि माँ के बुर में ताऊ जी का लण्ड चला गया है।

ताऊ जी ने कमर को झटका देना शुरू किया। ताऊ जी जब जब जोर से झटका लगाते थे माँ के मुँह से आआअहह की आवाज सुनाई पड़ती थी। कुछ देर के बाद जब ताऊ जी ने माँ की चूचियों को मसलना शुरु किया तो उनका जोश और भी बढ़ गया।

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एक तरफ़ ताऊ जी बुर में जोर से झटके लगाने लगे तो दूसरी तरफ़ माँ के चूचियों को जोर जोर से मसलने लगे।अब माँ की बुर में लण्ड जब आधे से ज्यादा चला गया तो माँ के मुंह से आआहह्ह नहीं आआ आह्हह की आवाज आने लगी।

ताऊ जी ने माँ के होठों को चूसना शुरु कर दिया। लगभग आधे घण्टे चोदने के बाद ताऊ जी का बीज माँ की चूत में गिरा। माँ भी बहुत ही खुश थी। कुछ देर के बाद ताऊ जी ने लण्ड निकल लिया। माँ पांच मिनट तक लेटी रही।माँ तब उठ कर जाना चाहती थी।

ताऊ जी ने उनको रोक लिया, उन्होंने माँ से कहा- कहाँ जा रही हो?

तब माँ ने कहा- आज के लिये इतना बस!

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ताऊ जी ने कहा- अभी तो और चुदाई बाकी है, रुक जाओ तुम।तब ताऊ जी ने माँ के पीछे जा कर माँ की गाण्ड पर लण्ड रखा और कमर को पकड़ कर एक जोरदार झटका मारा। माँ के मुँह से आआ आअह्हह हह्ह की आवाज निकलते ही मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में लण्ड चला गया। अब ताऊ जी ने अपनी कमर को हिलाना शुरू किया और कुछ ही देर में पूरा लण्ड को माँ के गाण्ड में घुसा दिया।

ताऊ जी माँ के गाण्ड को लगभद दस मिनट तक मारने के बाद जब धीरे धीरे शान्त पड़ गये तो मैं समझ गया कि माँ की गाण्ड में बीज गिर गया है।

ताऊ जी ने लण्ड को निकाल लिया तब माँ के पैर को थोड़ा सा फैला दिया क्योंकि माँ ने दोनों पैरों को पूरा सटा रखा था। ताऊ जी ने माँ की बुर को देखा, माँ से पूछा- पेशाब नहीं करोगी?माँ ने गरदन हिला कर कहा- नहीं।

अब ताऊ जी ने जैसे ही लण्ड को माँ की बुर के ऊपर सटाया माँ ने अपने दोनों हाथों से अपनी बुर को फैला दिया। ताऊ जी ने लण्ड के अगले भाग को माँ की बुर में डाल दिया और माँ की चूचियों को पकड़ कर एक जोरदार झटके के साथ अपने लण्ड को अन्दर घुसा दिया।

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माँ मुँह से आआह्ह फ़्फ़फ़ईई रीईई धीईई आआह्हह्स इस्सस्स स्सस्हह्हह कर रही थी। ताऊ जी पर उनके इस बात का कोई असर नहीं हो रहा था। वो हर चार पांच छोटे झटके के बाद एक जोर का झटका दे रहे थे।

उनका लण्ड जब आधे से ज्यादा अन्दर चला गया तो माँ ने ताऊ जी से कहा- अब और अन्दर नहीं डालियेगा वरना मेरी बुर फट जायेगी।

ताऊ जी ने कहा- अभी तो आधा बाहर ही है।

माँ ने यह समझ लिया कि आज उनकी गोरी चूत फटने वाली है। माँ की हर कोशिश को नाकाम करते हुए ताऊ जी माँ के चूत में अपने लण्ड को अन्दर ले जा रहे थे।

माँ ने जब देखा कि अब बरदाश्त से बाहर हो रहा है तो उन्होंने ताऊ जी से कहा- मैं आपसे बहुत छोटी हूँ आआह पल्लीईज़ आआह्हह… नहीईई उई आआअह्ह्ह ह्हह…ताऊ जी ने लगातार कई जोरदार झटके मार कर पूरे लण्ड को माँ के बुर में घुसा दिया तथा माँ की चूचियों को मसला।

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अब माँ को भी मजा आने लगा था। शायद माँ को इसी का इन्तजार था। ताऊ जी ने अपने झांट को माँ की झाँट में पूरी तरह से सटा दिया और इस तरह से उन्होंने पूरे बीस मिनट तक माँ की चुदाई की।

इसके बाद माँ और ताऊ जी शान्त पड़ गये तब मैं समझ गया कि माँ की बुर में ताऊ जी का बीज गिर गया है। वो दोनों पूरी तरह से थक चुके थे। अब ताऊ जी ने लण्ड को निकाल दिया और माँ की बगल में लेट गये।

फ़िर दोनों ने कपड़े पहने और वहाँ से चलने लगे। तब मैं भी वहाँ से हट गया ताकि उनको पता ना चले कि मैंने सब कुछ देख लिया है। हम तीनों घर वापस आ गये।ताऊ जी माँ को देख कर मुस्कुराने लगे कि तुम्हारे बेटे को कुछ नहीं पता चला।

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लेकिन मैंने भी उनको ऐसा ही दिखाया कि मुझे कुछ नहीं पता है।

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