desi chudai kahani Archives - Antarvasna https://sexstories.one/tag/desi-chudai-kahani/ Hindipornstories.org Wed, 01 Dec 2021 07:01:41 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.1 रंडी बन गयी दोस्त की बीवी https://sexstories.one/randi-ban-gayi-dost-ki-biwi/ Wed, 01 Dec 2021 07:01:41 +0000 https://sexstories.one/?p=3447 में भी तड़प रहा था उसकी चूत लेने के लिये करीब 15 मिनिट के इस खेल के बाद मैने उसको लेटा दिया और उसके बूब्स दबाने लगा वो बोली की मेरे राजा अब देर मत करो अब मुझ से रहा नही जा रहा है...

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Randi Ban Gayi Dost Ki Biwi हेलो दोस्तो! में गुरनाम, जालंधर से. आज में आपको एक रियल स्टोरी बता रहा हूँ मेरा एक दोस्त है और उसकी वाइफ जो की वो भी जालंधर के ही रहने वाली है में अक्सर अपने दोस्त के घर जाया करता था उसकी वाइफ बड़ी ही सुंदर है फिगर बस ठीक ठाक ही है रंग गोरा बूब्स ज्यादा बड़े नही है पर फिर भी ठीक ही है उसकी स्माइल बड़ी ही कातिलाना है उनका एक बेटा है जो की अभी 7 साल का ही है, मेरे दोस्त के बहुत ज़िद करने पर में उसके बेटे को कोचिंग देने को तैयार हो गया, में दोपहर को उसके घर पर पढ़ाने जाया करता था उस समय मेरा दोस्त अपने काम पर होता था, पर भाभी जिनका नाम सुमन है एक दिन में दोपहर को जब उसके घर पंहुचा तो घर पर कोई नही था सिर्फ़ सुमन थी अकेली आज उनका बेटा अपनी मौसी के घर पर गया हुआ था.

मैने घन्टी बजाई दरवाज़ा खुला दरवाजे पर सुमन थी उसने एक हल्की सी मुस्कान दी और अंदर आने को कहा में अंदर चला गया उस समय उसने नाइटी पहने हुई थी उसके बाल खुले थे उसने मुझे बैठने को कहा और वो अंदर चली गई काफ़ी देर होने के बाद जब वो नही आई तो मे अंदर गया और इधर उधर देखा तो वो बाथरूम मे थी बाथरूम का दरवाज़ा लॉक नही था मैने धीरे से अंदर देखा वो एकदम नंगी थी और नहा रही थी उसके मुँह पर साबुन था इस कारण वो मुझ को शायद देख ना सकी थी में वापस आया और मैंने दरवाजा लॉक कर दिया और में वापस बाथरूम की तरफ गया मेरा लंड खड़ा हो गया था मैं वही पर खड़ा रहा और उसको देखता रहा मैने अपने मोबाइल के कैमरे से उस की क्लिप भी बना ली थी वो बहुत ही सेक्सी थी और बार बार अपने बूब्स को दबा रही थी और अपनी चूत को रगड़ रही थी.

में समझ गया की उसको मेरा दोस्त पूर्ण रूप से संतुष्ट नही कर पाता है और जब वो नहा कर निकल रही थी तो में वापस आ कर उसी जगह बैठ गया कुछ देर बाद वो मेरे लिये चाय बना कर लाई और मेरे पास बैठ गई मेरा लंड अभी भी टाइट था मैने डरते डरते उससे कहा की भाभी में कुछ पूछु आपसे वो मुस्कुरा कर बोली पूछो मैने कहा की पूछना तो नही चाहिये है पर्सनल है पर पूछ रहा हूँ विकी और आप की शादीशुदा लाइफ सुखी है? वो बोली हाँ हम खुश है मैने कहा की नही आप की सेक्स लाइफ तो उसने मेरी तरफ देखा और कुछ देर खामोश रही फिर बोली की तुम्हारे दोस्त मुझको संतुष्ट नही कर पाते है अब मेरी भी हिम्मत बढ़ी और मैने पूछा की आप तो इतनी खूबसूरत हो सेक्सी हो आप पर तो कोई भी फिदा हो जायेगा आप कोई दूसरा रास्ता क्यो नही अपना लेती हो वो बोली कैसा रास्ता.

Mastram Sexy Kahani प्रेमिका के दोस्त के साथ सेक्स – भाग 2

मैने कहा की किसी दुसरे से संपर्क करो वो फिर से बोली की क्या तुम मुझको संतुष्ट करोगे यह सुनते ही मेरे तो जैसे खुशी का ठिकाना ही नही रहा हो मैं तुरंत उठा और सुमन को अपनी बाहों मे भर लिया और उसके होंठो पर एक किस किया और हम दोनो करीब 5 मिनिट तक एक दूसरे को किस करते रहे और वो मुझसे बोली की पहले दरवाज़ा तो बंद कर दो में बोला की वो तो मैने पहले ही बंद कर दिया है उसके बाद हम बेडरूम मे गये और उसने बिना देर लगाये मेरे सारे कपड़े उतार दिये और मेरे लंड को अपने होठों मे ले कर दबाया और चूसने लगी में भी अब अपने होश खोता जा रहा था मैने भी उसका गाऊन खोल दिया उसने अंदर कुछ भी नही पहन रखा था अब वो बिल्कुल नंगी थी हम दोनो बेड पर लेट गये और वो मेरे उपर चड गयी और बोली की कब से मेरे मन मे एक प्लान था की में तुम से चुदवाऊँ आज मेरी इच्छा पूरी हो गई मैं भी बोला भाभी जी में भी आप को चोदना चाहता था.

यह सुन कर वो बोली की मेरे राजा देर किस बात की है आज मैं तुम्हारे पास हूँ जिस तरह से चाहो चोदो मुझ को बड़ी प्यासी है यह चूत मैने उसके टाइट बूब्स को धीरे धीरे दबाना चालू किया अब वो धीरे-धीरे गर्म हो रही थी उसने पीछे हट कर मेरे लंड को मुँह मे लिया और जोर जोर से चूसने लगी.

में भी तड़प रहा था उसकी चूत लेने के लिये करीब 15 मिनिट के इस खेल के बाद मैने उसको लेटा दिया और उसके बूब्स दबाने लगा वो बोली की मेरे राजा अब देर मत करो अब मुझ से रहा नही जा रहा है में उठा और और अपने 6 इंच लंबा और मोटा लंड उसकी चूत के उपर रखा सुमंन एकदम ठीक थी पर उस की चूत काफ़ी टाइट और सूखी थी मैने उस को हांथ से धीरे-धीरे रगड़ा करीब 3 मिनिट के बाद उसकी चूत गीली हो गई फिर मैने अपने लंड को हल्का सा धक्का दिया मेरा आधा लंड उसकी चूत मे था वो बोली जल्दी से पूरा अंदर करो मैंने एक जोर का धक्का दिया वो चिल्ला उठी मार डाला ज़ालिम तुने शायद उसके पति का लंड इतना लंबा और मोटा नही था.

Randi Biwi ki Chudai कर लो अपनी हवस पूरी

कुछ देर बाद वो भी मेरे झटको के साथ खुद भी साथ दे रही थी और कह रही थी की ले लो आज मेरी जम कर लूट लो मैने कितनी बार तुम्हारे दोस्त से चुदवाया है पर वो मजा नहीं आया आज तुम मुझको रियल मे चोदो मेरी जान में भी जोर जोर से झटके मार रहा था करीब 20 मिनिट के इस खेल मे वो 3 बार झड़ चुकी थी अब में भी झड़ने वाला था मैने कहा सुमन में झड़ने वाला हूँ उसने कहा की मेरे अंदर ही झड़ जाओं मैने कहा की अगर कुछ हो गया तो उसने कहा की कुछ नही होगा में गोली खा लूँगी पर तुम अन्दर ही झड़ना में जोर जोर से अपना लंड अंदर बाहर करने लगा कुछ ही देर बाद में उसके अंदर ही झड़ गया और हम बिल्कुल शांत थे किसी तूफान के बाद की शान्ति थी.

हम कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे और फिर में उठा उसको एक लीप किस किया अब 4:30 हो चुके थे वो बोली की अब तुम को चलना चाहिये पर हाँ एक बात ध्यान रहे यह बात बस मेरे और तुम्हारे बीच ही रहे तुम्हारे दोस्त को पता नहीं चलना चाहिये मैने वादा किया और हम दोनो एक दुसरे से लिपट गये फिर में उठा कपड़े पहने वो भी बाथरूम मे थी उसके बाथरूम से निकलने के बाद में वहा से चला आया, पर अब भी जब हम को मौका मिलता है या घर पर कोई नही होता है तो वो मुझको फोन करके बुला लेती है और हम भरपूर सेक्स का मज़ा लेते है।

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कर लो अपनी हवस पूरी https://sexstories.one/desi-ladki-ke-saath-chudai-ki-hawas-poori-ki/ Mon, 29 Nov 2021 06:46:46 +0000 https://sexstories.one/?p=3363 मैंने तुरंत ही उसकी योनि में अपने मोटे लंड को डाल दिया। उसकी योनि  बहुत ज्यादा टाइट थी। मुझे अपने लंड को घुसाने में बहुत ही दिक्कत हो रही थी लेकिन मैंने एक झटके में अपने लंड को उसकी योनि में डाल दिया...

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chudai ki hawas मेरा नाम रमन है और मैं लखनऊ का रहने वाला हूं। मैं एक 24 वर्ष का युवा हूं। मेरे घर में मेरे पिताजी मेरी माता और मेरी बहन गरिमा है। गरिमा और मैं बेकरी का काम चलाते हैं। यह हमारे पिताजी ने शुरू किया था और इस काम को हम बहुत समय से करते हुए आ रहे हैं। मेरे पिताजी को यह काम करते हुए 30 वर्ष से ऊपर हो चुके हैं। अब हमारी दुकान बहुत ही अच्छी चलती है। जितने भी हमारे इलाके में बर्थडे होते हैं सब लोग हमारे से ही केक लेकर जाते हैं। क्योंकि हम लोगों उन्हें फ्रेश केक देते हैं और जितना भी बेकरी का आइटम होता है वह सब हमारे यही से लेकर जाते हैं। जिस वजह से हमारी बेकरी शॉप बहुत ही अच्छे से चल रही है। इसलिए हम दोनों बेकरी शॉप में ही काम देख रहे हैं। वहां पर हमारे कुछ कर्मचारी भी हैं जो कि हमारा काम देखा करते हैं।

वह बेकरी में आइटम तैयार करते हैं। उन्हें भी हमारे यहां काम करते हुए कई वर्ष हो चुके हैं। वह मेरे पिताजी के साथ से काम करते हुए आ रहे हैं। हम लोगों की बेकरी शॉप घर के पास ही है। जिस वजह से जितने भी लोग हमारे मोहल्ले में या आस-पास के एरिया में रहते हैं, उन सब से हम बहुत ही अच्छे से परिचित हैं। वह लोग हमारे पास आते हैं और हम से ही सामान ले जाते हैं। एक दिन हमारे पड़ोस में एक डॉक्टर रहने आई। वह डॉक्टर शादीशुदा नहीं थी और उनकी पढ़ाई अभी कंपलीट हुई थी। इसलिए उनका ट्रांसफर हमारे शहर में हो गया था और वह हमारे पास वाले घर में ही रहती थी। एक दिन जब वह हमारी बेकरी शॉप में आई तो वह मुझसे सामान ले गई और मुझे वह बहुत ही पसंद आई। उन्होंने जिस तरीके से मुझसे बात की और उनका बात करने का अंदाज मुझे बहुत ही अच्छा लगा लेकिन मैं उनका नाम नहीं पूछ पाया और उस दिन कुछ तो मेरी तबीयत थोड़ा खराब होने लगी। मैं घर पर आराम कर रहा था। मैं घर पर ही था तो मेरी बहन दुकान का काम संभाल रही थी और उसने बहुत ही अच्छे से दुकान में काम संभाल लिया था।

गरिमा बहुत ही अच्छे से दुकान में काम संभाल रही थी और कुछ दिनों बाद मेरी तबीयत ठीक हो गई। मैं वापस से दुकान में चला गया। जब मैं अपनी शॉप में अपनी बहन के साथ गया तो वह मुझे कहने लगी, चलो तुम अब शॉप में आ गए हो तो मेरा मन बहला रहेगा। नहीं तो मैं बोर होने लगी थी। मैंने अब दोबारा से अपना काम शुरू कर दिया था और एक दिन वह डॉक्टर हमारी दुकान पर आ गई और वह मेरी बहन से बहुत ही अच्छे से बात कर रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उन दोनों के बीच में दोस्ती हो चुकी है। मुझे बिल्कुल भी पता नहीं चला कि उन दोनों के बीच में दोस्ती हो चुकी है। वह दोनों बहुत ही अच्छे से बात कर रही थी और उसके बाद उसने मुझे डॉक्टर से मिलाया। मेरी बहन ने जब हम दोनों का इंट्रोडक्शन कराया तो उस दिन उनका नाम मुझे पता चला। उसका नाम रेखा था। रेखा बहुत ही सुंदर थी।

Chudai ki kahani मेरी प्रेमिका के साथ पहला सेक्स अनुभव

वह मुझसे बहुत ही अच्छे से बात कर रही थी। वह मुझे उससे बात कर के बहुत ही अच्छा लग रहा था। रेखा से अब मेरी मुलाकात भी हो चुकी थी और मैं अब उससे बात भी करने लगा था। मुझे बहुत ही अच्छा लगता था उससे बात करके। उसका स्वभाव बहुत ही अच्छा था। अब जब भी वह हमारी शॉप में आती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता था और मैं उससे अच्छे से बात किया करता था और वह भी मुझसे बहुत ही अच्छी तरीके से बात किया करती थी। अब हम दोनों के बीच में भी बहुत अच्छी बातचीत होने लगी और मैंने उससे उसका नंबर भी ले लिया। जब मैंने उसका नंबर लिया तो उसके चेहरे पर भी एक मुस्कुराहट सी थी और कभी जब वह हमारी शॉप से आर्डर करवाती तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और मैं दुकान से खुद ही उसके घर पर सामान ले जाता था।

एक दिन उसका बर्थडे था और उसने हमारे शॉप में एक बहुत बड़ा केक आर्डर करवाया और जब उसने वह केक आर्डर करवाया तो उसने मेरी बहन और मुझे फोन करके इनवाइट करा था। अब हम दोनों उस के बर्थडे में गए और बहुत ही अच्छे से रेखा ने अरेंजमेंट करवा रखा था। काफी सारा सामान तो हमारी दुकान से ही  ले गई थी। मैंने उससे उसके पैसे नहीं लिए और कहा कि यह हमारी तरफ से आपके लिए बर्थडे गिफ्ट है। वह बहुत ही खुश हुई और जब हम उसके घर में थे तो हम लोगों ने बहुत ही मौज मस्ती की। अब मैं रेखा से मिलने भी लगा था। मैं उससे फोन पर भी बात करने लगा और हम दोनों के बीच में बहुत ज्यादा नज़दीकियां हो गई।

एक दिन रेखा ने हमारी शॉप में फोन करके पेस्ट्री का आर्डर दिया लेकिन मेरी बहन वह ऑर्डर भूल गई। हम अपने काम में ही बहुत व्यस्त थे थोड़े समय बाद दोबारा से रेखा का फोन आया। तो मेरी बहन कहती है कि तुम जल्दी से रेखा का ऑर्डर दे आओ नहीं तो वह बहुत ही गुस्सा हो जाएगी। मैंने तुरंत ही वह पेस्ट्री पैक करवाई और मैं दौड़ते हुए उसके घर पर चला गया। जैसे ही मैं उसके घर के अंदर पहुंचा तो उसका दरवाजा खुला हुआ था और वह अपने सोफे पर पैंटी और ब्रा में थी। मैंने जैसे ही उसे देखा तो मेरा मन पूरा खराब हो गया उसका शरीर इतना ज्यादा मुलायम और गोरा था कि वह मुझे दूर से ही दिखाई दे रही थी। उसने नीली कलर की पैंटी ब्रा पहनी हुई थी और मैं जैसे ही उसके पास गया तो मैंने उसके बदन को हाथ लगाया वह भी पूरी उत्तेजना में आ गई और बहुत ही ज्यादा खुश हो गई।

उसने तुरंत ही मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया। मैंने वह पेस्ट्री निकालते हुए अपने हाथ से उसे खिलाना शुरू कर दिया और उसके स्तनों पर पेस्ट्री लगा दी। अब मैं  उसके स्तनों को चाटता तो वह पेस्ट्री मेरे मुंह में लग जाती और मुझे बहुत ही मजा आता। मैंने अपने लंड पर भी बहुत पेस्ट्री लगा दी और वह उसे चूसने लगी। उसे बहुत ही मजा आ रहा था वह बहुत अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी। थोड़े समय बाद मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया उसकी योनि से कुछ ज्यादा ही चिपचिपा पदार्थ बाहर निकल रहा था। मैंने उसे अब उसी सोफे पर लेटा दिया।

जैसे ही मैंने उसे उस सोफे पर लेटाया तो उसका शरीर पूरा गरम हो गया था और मैंने तुरंत ही उसकी योनि में अपने मोटे लंड को डाल दिया। उसकी योनि  बहुत ज्यादा टाइट थी। मुझे अपने लंड को घुसाने में बहुत ही दिक्कत हो रही थी लेकिन मैंने एक झटके में अपने लंड को उसकी योनि में डाल दिया। अब मै अपने लंड को अंदर बाहर करता जाता। मैं उसकी योनि से अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। मुझे बड़ा ही मजा आता जब मैं उसकी योनि में अपने लंड को प्रवेश करवा रहा था और मैं उसके स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूस रहा था। उसके स्तन बड़े ही गोल-गोल और अच्छे थे उसके होंठ भी बड़े नाजुक और मुलायम थे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे उसके होठों को मैं हमेशा ही किस करता रहूं। मैं जब भी उसके शरीर को देख रहा था तो मेरा मन  भर ही नही रहा था।

मैं बहुत ही खुश हुआ जा रहा था मुझे इतना अच्छा लग रहा था। मैं सोच रहा था इसे बस चोदता ही रहूं और मैं उसे बड़ी तीव्रता से धक्के दिए जा रहा था। अब वह भी अपने दोनों पैरों को और चौड़ा कर लेती। वह भी उत्तेजना में आ जाती वह कुछ ज्यादा ही खुश हो रही थी और उसे बहुत ही मज़ा आ रहा था। मैं भी उसे बड़ी तीव्रता से धक्के दिया जा रहा था और उसका शरीर अब पूरा गरम हो गया था। हम दोनों पसीने-पसीने होने लगे और एक समय ऐसा आया जब मेरा वीर्य गिरने वाला था। मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके स्तनों पर सारा वीर्य गिरा दिया। वह बहुत ही ज्यादा खुश हो गए और मुझे कहने लगी अब से तुम ही मेरे लिए सामान लाया करो। वह जब मुझसे सामान मंगाती तो मैं डॉक्टर रेखा की चूत जरूर मारता था। वह बहुत ही ज्यादा खुश होती थी और कहती थी कि मुझे बहुत ही मज़ा आता है जब तुम मेरी चूत मारा करते हो। मैं भी बहुत खुश था डॉक्टर रेखा की मुलायम और नरम चूत मारकर क्योंकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं किसी डॉक्टर को कभी चोद पाऊंगा मेरी इच्छा पूरी हो चुकी थी।

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दोस्त की कुंवारी बहन को पेला https://sexstories.one/dost-ki-kunwari-behan-ko-pela/ Thu, 18 Nov 2021 10:12:22 +0000 https://sexstories.one/?p=3357 मैंने कमरे की खिड़की से अंदर झांककर देखा कि वो अब अपनी सलवार में अपना एक हाथ डालकर ऊँगली को चूत के डालकर धीरे धीरे अंदर बाहर करके मज़े ले रही थी और उस समय टीवी पर एक किसिंग का सीन चल रहा था...

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Dost Ki Kunwari Behan Ko Pela – मेरा नाम प्रकाश है और मेरी उम्र 20 साल है। दोस्तों यह बात उन दिनों की है, उस समय मेरा एक बहुत पक्का दोस्त था जिसका नाम ज़ुबेर था और उसकी एक बहन थी जिसका नाम सना था और वो दिखने में बहुत ही सुंदर थी। उसका गोरा रंग उभरे हुए बूब्स, गोरे गाल, गुलाबी होंठ और उसके शरीर का हर एक बाहर से दिखता हुआ अंग मुझे भी बहुत आकर्षक लगता था और उस समय उसके फिगर का आकार 36-26-36 था। वैसे वो पूरी उसकी माँ की तरह दिखती थी और उसकी मम्मी भी उसी की तरह बहुत हॉट सेक्सी थी।

उस समय हमारे पेपर खतम हो चुके थे और हम लोग गर्मियों की छुट्टियाँ मना रहे थे। एक दिन ज़ुबेर को अपने किसी काम की वजह से जबलपुर जाना पड़ा और वो अपने पापा के साथ चला गया, जिसकी वजह से अब आंटी और उसकी बहन सना को अपने घर में अकेले रहना था। दोस्तों पहले में सना को सिर्फ़ अपनी एक दोस्त मानता था और मैंने कभी भी उसके बारे में ऐसा कुछ गलत नहीं सोचा था, लेकिन एक दिन आंटी ने मुझे अपने घर पर बुलाकर कहा कि तुम नहाने का साबुन लाकर सना को दे दो, वो नहाने जा रही है।

फिर में पास की एक दुकान पर साबुन लेने चला गया और में वो साबुन लाकर सना को देने के लिए घर आया तो आंटी ने मुझसे कहा कि वो अब नहाने के लिए चली गई है तुम उसको यह साबुन बाथरूम में जाकर दे दो। उस समय आंटी छत पर अपना कुछ काम कर रही थी और उनके सामने में एक बहुत शरीफ और अच्छा लड़का खड़ा था। फिर उनके कहने पर में नीचे बाथरूम में चला गया, वो बहुत सुंदर गोरी सेक्सी थी और में मन ही मन बहुत पहले से चाहता तो था कि में उसको एक बार नंगा देख लूँ, लेकिन उस दिन मेरी बहुत समय से बंद किस्मत खुल गयी और मुझे वो मिल गया जिसको मैंने कभी सपने में भी नहीं सोच था।

दोस्तों अब मैंने बाथरूम के पास जाकर कहा कि सना यह साबुन ले लो, लेकिन मुझे कुछ देर खड़े रहने पर भी कोई जवाब नहीं मिला और में वैसे ही चुपचाप इंतजार करता रहा, लेकिन तभी अचानक से सना ने चीखना शुरू किया और वो तुरंत दरवाजा खोलकर बाहर आ गई और अब वो मुझसे लिपट गई। उसकी पकड़ मेरे शरीर पर बहुत मजबूत थी जिसकी वजह से उसके बूब्स मेरे बदन से छूकर दब रहे थे और उसकी सांसे बहुत तेजी से चल रही थी। फिर जब मैंने उससे पूछा कि अचानक से तुम्हे ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से तुम इतना डर गई हो और बाहर आकर मुझसे ऐसे लिपट रही हो? तब वो कहने लगी कि बाथरूम के अंदर एक बहुत मोटी छिपकली है, मेरी जब उस पर नजर पड़ी तो वो मेरी तरफ आगे बढ़ने लगी और मुझे उससे बहुत डर लग रहा है और उसने मुझसे कहा कि प्लीज सोनू तुम अंदर जाकर उस छिपकली को वहां से भगा दो, नहीं तो में अंदर नहीं जा सकती।

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फिर मैंने उसके कहने पर ठीक वैसा ही किया और मैंने उस छिपकली को वहां से भगा दिया और फिर वो नहाने बाथरूम में चली गई। फिर बाहर आकर मैंने सोचा कि जब वो मुझसे लिपटी हुई थी तो उसके बूब्स मेरी छाती से दब रहे थे और वो उस समय सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी और अब मेरे दिमाग़ में सिर्फ़ वो सेक्सी सीन चल रहा था और पूरी रातभर में उसके बारे में बहुत कुछ सोच रहा था और ज्यादा जोश में आकर मैंने उसके नाम से दो बार मुठ मारकर अपने लंड को शांत भी किया और उसके बाद में उसको सोचता हुआ गहरी नींद में सो गया। दोस्तों उसके बाद कामदेवता ने मुझसे बहुत ज्यादा खुश होकर तुरंत मुझे वो एक मौका दे दिया जब मेरे सभी घर वाले घूमने के लिए बाहर चले गए और उन्होंने मुझे अपने घर पर अपने पालतू कुत्ते की देख रेख करने के लिए छोड़ दिया और तभी उन सभी के चले जाने के बाद मेरी आंटी ने मुझसे कहा कि वो भी कहीं बाहर जा रही है तो तुम सना को अपने घर में अपने साथ रख लो, वर्ना यह अपने घर में अकेली रहेगी और आंटी को वापस आने में शाम हो जाएगी और फिर वो भी सना को मेरे साथ छोड़कर चली गई।

फिर मैंने सना को अपने कमरे के अंदर बुला लिया और उसके बाद मैंने टीवी पर एक कार्टून लगा दिया जिसको वो बैठकर देखने लगी और में नहाने चला गया। फिर कुछ देर बाद मुझे पता चला कि में अपने साथ टावल लाना भूल गया था इसलिए में बाथरूम से बाहर निकलकर अपने कमरे में टवल लेने आया और तब मैंने देखा कि सना अब उस कार्टून को हटाकर एक चेनल पर एक मस्त सेक्सी फिल्म देख रही है और में कुछ देर उसको देखता रहा। उसका मुझ पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं था और में चुप से अपना काम करके वापस बाहर चला गया, लेकिन मेरा मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा था कि में बाहर जाऊँ।

फिर मैंने कमरे की खिड़की से अंदर झांककर देखा कि वो अब अपनी सलवार में अपना एक हाथ डालकर ऊँगली को चूत के डालकर धीरे धीरे अंदर बाहर करके मज़े ले रही थी और उस समय टीवी पर एक किसिंग का सीन चल रहा था और वो अब ज्यादा गरम होकर सिसकियाँ भर रही थी। अब मैंने जानबूझ कर आवाज़ करना शुरू किया और उसने तुरंत चेनल को बदल दिया उसके बाद मैंने कमरे में अंदर आकर उससे कहा कि मैंने अभी कुछ देर पहले बाहर से सब कुछ देख लिया है कि तुम तब क्या क्या कर रही थी?

दोस्तों वो मेरी इस बात को सुनकर एकदम चकित हो गई और उसके चेहरे का उड़ा हुआ रंग मुझे उसकी परेशानी साफ साफ बता रहा था और वो मुझसे बोली कि प्लीज आप मेरी मम्मी और भाई से कुछ भी मत कहना वर्ना मुझे बहुत मार पड़ेगी। तब मैंने उससे पूछा कि तुम सिर्फ़ यह किस सीन ही देखती हो या कुछ और भी? तो वो बोली कि टीवी पर कभी भी पूरा सीन नहीं आता है, लेकिन उसकी एक बहुत अच्छी पक्की सहेली ने उसको पहले ही सब कुछ बता दिया था कि सुहागरात में क्या होता है?

अब मैंने उससे कहा कि अगर में उसको वो पूरा सीन दिखाऊँ तो क्या तुम देखा चाहती हो वो सब? तब वो बोली कि तुम्हारी मर्ज़ी और इतना कहकर वो शरमा गई। दोस्तों में तुरंत समझ गया कि यह अब जरुर मुझसे पट जाएगी और यह मेरी किसी भी बात को बाहर किसी से नहीं कहेगी, इसलिए मैंने झट से अपने सीडी के बेग में से एक ब्लूफिल्म निकालकर उसे डीवीडी प्लेयर पर लगाकर दिखा दी, जिसकी वजह से वो बहुत गरम हो गई और मेरे ही सामने वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ भरने लगी और अपनी सलवार में हाथ डालकर ऊँगली को डालने लगी।

अब मैंने उसको अपनी बाहों में उठा लिया और मैंने उसको बेड पर लेटा दिया। उसके बाद में उसके होंठो पर किस किया तो उसने भी कुछ देर बाद मेरा पूरा साथ दिया। उसके बाद मैंने सही मौका देखकर उसके सारे कपड़े उतार दिए और मैंने उसको सिर्फ़ ब्रा और पेंट में कर दिया और में उसके बूब्स को चूसने लगा और में उसकी चूत पर पेंटी के ऊपर से ही हाथ रगड़ने लगा था। तभी उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और वो भी मेरा लंड रगड़ने लगी और मैंने जोश में आकर अपने सारे कपड़े उतार दिया और उससे कहा कि अब तुम भी नंगी हो जाओ।

फिर वो भी मेरे कहने पर तुरंत नंगी हो गई और तब मैंने उसकी दोनों गोरी गरम जांघे एक दूसरे से अलग की और उसकी बेचेन कुंवारी चूत में मैंने पहली बार एक ज़ोर का धक्का देकर अपना 6 इंच का लंबा लंड डाल दिया, जिसकी वजह से उसके मुहं से वो ज़ोर की चीख निकल पड़ी और वो मुझसे बोली कि आह्ह्हह्ह प्लीज अब बस करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है प्लीज आईईईई माँ में मर गई, इसको बाहर निकाल दो। फिर मैंने उससे कहा कि पहली बार है इसलिए तुम्हे दर्द हो रहा है, लेकिन कुछ देर बाद तुम्हे बड़ा मज़ा आएगा और तुम्हे इसकी आदत हो जाएगी, लेकिन वो अब भी ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी और उसको बहुत दर्द था।

अब मैंने बिना कुछ परवाह के अपने लंड से उनकी चूत पर दो तीन जोरदार झटके दे दिए और उसके बाद में लगातार धक्के देता रहा और थोड़ी ही देर बाद अब उसको भी मेरे साथ मज़ा आने लगा था और वो बहुत ही कामुक जोश से भरी आवाज़े निकालने लगी थी, जिसकी वजह से में पूरी तरह से जोश में आकर चुदाई करता रहा और फिर कुछ और देर तक धक्के देने के बाद मैंने अपना वीर्य उसकी चूत में निकाल दिया। में उसके ऊपर लेटा रहा और फिर कुछ देर बाद में उसके ऊपर से हट गया। दोस्तों मैंने उसको उस दिन रुक रुककर करीब तीन से चार बार चोदा और मज़े लिए, लेकिन वो अब ज्यादा चुदाई बर्दाश्त नहीं कर आ रही थी। फिर चुदाई खत्म होने के बाद जब वो उठी तो मैंने उसकी गोरी गांड देखी तो मैंने उससे कहा कि अब मुझे तेरी यह गांड भी मारनी है।

फिर वो कहने लगी कि नहीं मुझे बहुत दर्द होगा और में वो काम नहीं करूंगी और ना ही तुम्हे करने दूंगी। दोस्तों तब मैंने उसको बहुत प्यार से समझाया और कहा कि में इस बार बहुत धीरे धीरे से करूँगा, जिसकी वजह से तुम्हे इतना दर्द महसूस नहीं होगा, तो वो मान गई और मैंने अपने हाथ में तेल लिया और उसकी गांड पर लगाकर मसल दिया, जिसकी वजह से वो बहुत चिकनी नजर आ रही थी और उसके बाद मैंने अपने लंड को भी तेल से नहला दिया। उन दोनों के तेल से स्नान के बाद अब मैंने धीरे से अपने अपने लंड को उसकी गांड में डाला और थोड़ा थोड़ा करके मैंने अपना पूरा लंड उनकी गांड में डाल दिया, वो बहुत ज़ोर से चीखने लगी थी।

फिर मैंने उसको समझाकर चुप करवाया और में उसके बूब्स को सहलाने लगा। उसके बाद में अब धीरे धीरे धक्के देकर अपने लंड को उसकी चिकनी गांड में अंदर बाहर करके उसकी गांड मारने लगा और फिर कुछ देर बाद उसको भी अब मेरे साथ मज़ा आ रहा था, क्योंकि उसका वो दर्द कम हो गया था, लेकिन कुछ देर धक्के देने के बाद में झड़ गया और इस बार भी मैंने अपना गरम गरम वीर्य उसकी गांड में डाल दिया था और तब तक शाम के 6 बज गए थे। अब मैंने आख़िरी बार उसको किस किया और में नहाने चला गया।

मेरे पीछे पीछे वो भी बाथरूम में चली आई और हम दोनों एक साथ में ही नहाए और उसने मेरा लंड और मैंने उसकी चूत के अंदर तक पानी डालकर अच्छी तरह से साफ किया। उसके बाद हम बाहर आ गए और दोबारा कमरे में आकर एक दूसरे से चिपककर टीवी देखने लगे। फिर कुछ देर बाद उसके घरवालों के वापस आ जाने के बाद वो उनके साथ घर चली गई और वो मुझसे बोली कि यह सब मेरी जिंदगी का एक बहुत खास दिन था। तुम्हारे साथ बिताया हुआ हर एक पल वो लम्हा मुझे पूरी जिंदगी याद रहेगा। दोस्तों अब जब भी हमे कोई अच्छा मौका मिलता है तो में उसकी बहुत मस्त चुदाई करता हूँ और कभी कभी में उसकी गांड भी मारता हूँ वो हर बार मेरा पूरा पूरा साथ देती है और शायद मैंने उसको अपना दीवाना बना लिया, इसलिए वो मेरे साथ हमेशा खुश रहती है।

दोस्तों यह थी मेरी चुदाई की कहानी अपने दोस्त की उस कुवारी बहन के साथ, जिसने कभी अपनी चूत के ऊँगली के अलावा लंड जैसा कोई अंग अपनी जवानी की उस पहले कदम पर लेने के बारे में नहीं सोचा था और वैसे मुझे भी उसकी चुदाई का ऐसा कोई अंदाजा नहीं था कि वो एक दिन मुझसे चुदेगी और मेरे लंड के लिए पागल हो जाएगी ।।

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दोस्त की बीवी के साथ उसीके घर पर सुहागरात https://sexstories.one/dost-ki-biwi-ke-sath-usike-ghar-pe-suhagraat-xxx/ Sun, 24 Oct 2021 12:02:21 +0000 https://sexstories.one/?p=3100 उनकी चूचियां मेरे पीठपर टकराने लगीं और मेरा लंड एक्ससिटेमेंट में पैंट फाड़ने के लिए तैयार हो गया.. फिर मैं जैसे ही बर्तन के रैक को फिट करके पीछे मुडा तो भाभी पीछे हो खड़ी थी. एक बार फिर आमने-सामने की टक्क्रर हो गयी। इस बार उनकी चूचियाँ मेरे सीने से टकराई...

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Dost ke biwi ki saath Suhagraat XXX kahani ये दास्ताँ है मेरे दोस्त की बीवी की चुदाई की.. मैं उस समय नॉएडा में पोस्टेड था. मेरे ऑफिस में एक प्रोजेक्ट मैनेजर था, सुमन. वो मेरे ही प्रोजेक्ट पर था इसलिए हमारे बिच अच्छी दोस्ती हो गयी थी. मेरे सीनियर था, भाग्य से वो भी मेरे ही सोसाइटी में रहता था. धीरे धीरे उसके घर मेरे आना जाना शुरू हो गया था. उसकी बीवी से भी मेरी खुब पटती थी. शादी नयी नयी हुई थी. इसलिए भाभीजी फुलटू माल थी.. लगभग ५ फुट ५ इंच की हाइट और फिगर ३४-३६-३४ का! गोरी चिट्टी से मस्त आइटम थी….

मेरे दोस्त ने नया नया फ्लैट ख़रीदा था और मैं क्लोज फ्रेंड होने के कारण वह इनवाइटेड था हाउस-वार्मिंग पार्टी में. भाभीजी, जिनका नाम श्वेता था, वो काफी चिपक रही थी.. मेरे दोस्त को कुछ सामान लाना था तो वो बाहर चला गया. उसने कहा तुम इधर ही बैठो. मैं उसके घर पर ही रुक गया और टीवी देख रहा था.. फिर अचानक मैंने सोचा की भाभी की कुछ मदद कर देता हु और मैं किचन में गया… भाभीजी फर्श की सफाई कर रही थी.. वो रेड कलर की मैक्सी पहनी थी और नीचे झुककर सफाई कर रही थी. मैंने जैसे ही उनकी तरफ देखा, वो मुस्कुराने लगी और बोली की क्या बात है देवरजी?

मैंने कहा की मैं खली बैठा था तो सोचा की आपकी ही मदद कर देता हु.. तो वो हंसने लगी..

फिर अचानक ही मेरी नज़र उनके फेस से निचे पहुंची तो मैं अवाक् रह गया.. उनकी मैक्सी के ऊपर का बटन खुला हुआ था और उसके अंदर से उनकी मस्त चूचियाँ दिख रही थी… गोल गोल मक्खन जैसी उजली चूचियाँ देख के मैं अवाक् रह गया… मेरा लंड तनक गया…

Desi porn kahani पडोसन की चूत

भाभीजी शायद ताड़ गयी और उन्होंने अपनी मैक्सी का बटन ठीक कर लिया.. अब उनकी चूचियाँ नहीं दिख रही थी.. फिर वो अचानक से कड़ी हो गयीं और बोटी की आपको मेरी मदद करनी है तो मेरा बर्तन लगा दीजिये.. लेकिन बर्तन वाला रैक भी नहीं लगा था.. मैंने उनसे पुछा की बर्तन का रैक कहाँ है तो उन्होंने बताया के बगल वाले कमरे में है. मैंने कहा ठीक है, मैं ले आता हूँ..

फिर मैं बगल वाले रूम में गया तो भाभीजी भी आ गयीं… बोली – रैक बहुत ऊँचा है.. आप चेयर ले लीजिये… मैं उसको पकड़ लुंगी.. फिर मैं चेयर पर चढ़ कर उनके बर्तन वाला रैक उतरने लगा.. भाभीजी ने चेयर ज़ोर से पकड़ा था सटकर… धीरे धीरे वो मेरे और खरीद सटती जा रही थी.. कुछ देर बाद ही उनकी चूचियाँ मेरे पीठ पर सटने लगीं… दोस्तों मेरा ८ इंच लम्बा लंड खड़ा हो गया.. भाभीजी की चूचियाँ अब पूरी तरह से मेरे पीठ में रगड़ खा रहीं थी.. और मेरी हालत ख़राब हो रही थी… किसी तरह अपने ऊपर कण्ट्रोल करके मैंने बर्तन वाला रैक उतार लिया…

फिर मैं जैसे ही चेयर से उतरने के लिए मुडा तो मेरा पैर स्लिप कर गया और मैं फिसल गया.. भाभी पीछे कड़ी होकर मुझे पकड़े हुए थी तो उन्होंने मुझे बचने की कोशिश की.. मेरे हाथ से बर्तन का रैक छूट कर निचे गिर गया.. भाभी मेरे सामने कड़ी थी तो उन्होंने रोकने की कोशिश की और मैं उनकी बाँहों में हो गिरा… उन्होंने कस कर मुझे पकड़ा ताकि मैं गिरूं नहीं.. इसी कोशिश में मैं उनसे गले मिलने की पोजीशन में आ गया और उनसे पूरी तरह चिपक गया.. उनकी चूचियाँ अब मस्त मुझसे चिपकी हुई थी.. दोस्तों मैं तो जैसे सातवे आसमान पर था.. मेरा लंड जो अभी तक खड़ा था वो भी फुल फॉर्म में आ चूका था…

भाभी ने मुझे ज़ोर से भींच लिया और कहा – राजीव आप ठीक हो?

मैं कहाँ ठीक था यारों.. लेकिन मैंने सर हिलाया… तब भाभी ने पकड़ के मुझे बगल के बेड पर बिठा दिया.. मेरे पूरे शरीर में मानो बिजली दौड़ गयी हो… फिर कुछ देर बाद मैं नार्मल हो गया तो बर्तन का रैक उठाकर उनके किचन में फिट करने चला गया…

जैसे ही मैं कील ठोक कर बर्तन का रैक को फिट करने चला, तो भाभी ने फिर से पीछे से आकर पकड़ लिया और बोला – कहीं आप फिर से ना गिर जाओ…

फिर उनकी चूचियां मेरे पीठपर टकराने लगीं और मेरा लंड एक्ससिटेमेंट में पैंट फाड़ने के लिए तैयार हो गया.. फिर मैं जैसे ही बर्तन के रैक को फिट करके पीछे मुडा तो भाभी पीछे हो खड़ी थी. एक बार फिर आमने-सामने की टक्क्रर हो गयी। इस बार उनकी चूचियाँ मेरे सीने से टकराई और मेरा लंड उनके कमर के निचे.. भाभी ने एक कातिलाना स्माइल दी.. उसके बाद मेरा फ्रेंड आ गया और फाइनली उनकी फंक्शन स्मूथली ख़त्म हो गयी..

लगभग चार दिन के बाद सुमन ने अपने केबिन में मुझे बुलाया और कहा – राजीव, मुझे अर्जेंट काम से बॉम्बे जाना है एक दिन के लिए.. मैं कल यानी गुरुवार को जा रहा हूँ और शनिवार को वापस आ जाऊंगा, तब तक तुम प्रोजेक्ट का ध्यान रखना..

मैंने कहा ठीक है.. फिर जैसे ही मैं उसके केबिन से बाहर निकल रहा था तो उसने कहा – सुन तेरी भाभी भी अकेली रहेगी, उसे भी ऑफिस के बाद मिल लिया करना..

भाभी का नाम सुनते ही मेरे दिल में गुदगुदी होने लगी..

उस दिन रात भाई मैंने श्वेता भाभी के नाम पर ४-५ बार मुठ मारी… फिर मैंने सोचा, कहीं सच में अवसर मिल जाए तो.. तो मैंने सरसो के तेल से अपने लंड की मालिश की और उसको मोटा बना लिया.. उसका साइज थोड़ा बढ़ ही गया था.. लगभग ८. ५ इंच! दूसरे दिन ऑफिस में मेरा मन एकदम नहीं लग रहा था.. मन कर रहा था जल्दी से भाभी के पास पहुँच जाऊं.. आखिरकार शाम को ६:३० में ही मैं ऑफिस से निकल गया…

६:५० तक मैं भाभी के सोसाइटी में था.. मैंने दरवाज़े की बेल बजायी.. ५ मिनट के बाद श्वेता भाभी ने दरवाज़ा खोला.. लोहे के दरवाज़े के पीछे से, मुझे देखते ही खुश हो गयी – अरे राजीव… आइये…

फिर उसने लोहे का जालीदार दरवाज़ा खोला..

Dost ke biwi ki chudayi पानी और चुत

मैं घर में घुसते हो बोला – सर ने आपसे मिलकर पूछने के लिए बोला था, अगर आपको कुछ चाहिए तो..

तो उसने स्माइल देकर कहा – अच्छा ठीक है.. ऑफिस से आ रहे हैं तो थोड़ा आराम कर लीजिये, फिर बताउंगी..

श्वेता भाभी ने एक पिंक कलर का सलवार-कमीज पहन रखा था.. वो पूरा टाइट फिट था.. वो ऊपर से नीचे तक क़यामत लग रही थी..

उसने कहा – आप बैठो, मैं चाय बनती हूँ.. मैंने कहा नहीं भाभी, आप क्यों परेशान होती है… कुछ सामान लाना है तो बता दीजिये, जल्दी से ला दूंगा..

तो श्वेता भाभी ने कातिलाना अंदाज़ में अंगड़ाई लेते हुए कहा – अभी इतना भी क्या जल्दी है देवरजी, अभी तो पूरी रात बाकी है..

मैं अंदर से खुश हो गया. फिर भाभी चाय बनाने चली गयी. लेकिन मेरा एक्ससिटेमेंट से बुरा हाल हो रहा था. मन कर रहा था की बस दबोच के चोद डालूं. लेकिन फिर भी मैंने कण्ट्रोल रखा. मैं उनके बाथरूम में फेसवाश करने गया. हाथ मुंह धोने के बाद मैंने टॉवल ढूंढा तो वो नहीं था..

मैंने निकलकर भाभी से पुछा, तो स्माइल देते हुए बोली – हाँ आज देर से सूखने के लिए डाला है…

और फिर उसने अपना दुपट्टा उतारते हुए कहा – तक तक अप्प इससे काम चला लो.

अब भाभी की चूचियाँ साफ़ दिख रही थी. गोल-गोल और पूरी पुष्ट! मैंने दुपट्टा लेने के लिए किचन में चला गया और उनके बगल में ही अपना मुंह पोछने के बाद खड़ा हो गया. उनके दुपटे को अपने गले में लपेटकर.. अब मैंने और भाभी किचन में खड़े थे, लेकिन वो मुझसे नज़र नहीं मिला रही थी और ज़ोर-ज़ोर से साँस ले रही थी, जिसके कारन उसकी चूचियाँ भी ऊपर नीचे हो रहे थीं… मुझसे अब बर्दास्त नहीं हो रखा था. फिर भाभी कुछ लेने के लिए पलटी तो उनकी चूचियाँ मेरे कंधे से टच हुईं.. अब मैंने एक हाथ से उनको पकड़ लिया.. उन्होंने अपने आप को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन बच बोला नहीं…

मैंने उनको खींच कर अपने और करीब कर लिया.. अब वो पूरी तरह से शांत थी.. कोई प्रतिरोध नहीं था लेकिन आँखें झुकी हुई थी. मैंने उनकी ठुड्डी की पकड़ के उनका चेहरा सीधा किया लेकिन फिर भी वो नज़र नहीं मिला रही थी. फिर मैंने उनको थोड़ा और खरीद खींचने को कोशिश की – तो भाभी ने झट से अपने आप को मेरे बाँहों से अलग कर कहा – ये सब क्या है राजीव?

मैंने कहा – प्यार, मैं आपको बहुत प्यार करने लगा हूँ.

तो वो हांसे लगी, बोला मैं – आपके प्यार के मतलब समझती हूँ, और अभी फ़ोन लगाउंगी आपके भाई को जिसने आपके ऊपर विश्वास करके भेजा है मेरे पास…

यारों, मेरी तो जान ही निकल गयी. लगा मेरे ऊपर किसीने १० घड़ा ठंडा पानी दाल दिया हो. मेरा एक्ससिटेमेंट तो जैसे पल भाई में ही काफूर हो गया. भाभी ने दूसरे रूम में जाकर अपना फ़ोन भी उठा लिया. मैं उनके पीछे गया और बोला – की आप तो बुरा मान गयी.. मेरा कोई गलत इंटेंशन नहीं था. मैं तो आपका बहुत बहुत रेस्पेक्ट करता हूँ.

तो भाभी ने फ़ोन रख दिया… और हँसते हुए बोली – बस एक धमकी में प्यार का भूत उतर गया?

मैं अवाक् रह गया.. एक पल के लिए मतलब नहीं समझ पाया…

Dost ke biwi ka bhosda choda बीवी और डोली भाभी

तब फिर भाभी ने कहा – मैंने तुमको पहले ही दिन समझ गयी थी, जब तू जान बूझकर मेरे ऊपर गिरा था..

फिर मैंने भाभी को बाँहों में उठाकर भींच लिया और उसके होठों को चूसना शुरू कर दिया.. कुछ देर के बाद भाभी भी मेरे होंठों को चूसने लगी और मुझमे और घुसती जा रही थी.. लगभग १५ मिनट तक हम लोगों ने एक दूसरे के होठों को जमकर चूसा.

फिर भाभी बोली – मै तो तुम्हारे लंड की दीवानी हूँ.. उस दिन टच किया था, आज चूसूंगी..

मैंने कहा – सच?

तो भाभी ने बोला – हाँ! आज तेरे लवडे की खैर नहीं..

फिर मैंने भाभी को उठाकर बेड पर रख दिया.. भाभी भी मुझे कर कर भींचे हुए थी और छोड़ने का नाम हो नहीं ले रही थी.. मैंने भाभी के पूरे फेस पर किस करना शुरू किया.. इसी दरमियाँ मैंने भाभी का कमीज भी खिंच कर ऊपर कर दिया था..

फिर मैंने ब्रा का हुक भी खोल दिया और भाभी की मस्त चूचियों से खेलने लगा. यारों! मैं बयान नहीं कर सकता हूँ.. चूचियों की खूबसूरती… पूरी मक्खन.. मैं तो पूरा बच्चा बन गया था.. भाभी के निप्पल्स को मुंह में लेकर चूस रहा था.. और भाभी मदमस्त आवाज़ें निकाल रही थी.. आह्हः… ऊह्ह्ह्ह… यू… फकर.. आहह.. काट खायेगा क्या?

अचानक भाभी ने मुझे पटक दिया और मेरे ऊपर चढ़ गयी.. उसने बारी बारी से मेरे शर्ट के सारे बटन खोल दिए.. मेरी गंजी भी निकाल दी.. फिर वो मुझे चूमने लगी.. माथे से लेकर नाभि तक! जैसे ही वो निचे पहुंची, उसने मेरे पेंट का हुक भी एक झटके से खोल दिया और पेंट बहार निकाल दिया.. अब मैं अंडरवियर में था.. मेरा मोटा लंड अंडरवियर के पीछे से ही फाड़ने के लिए तैयार दिख रहा था..

भाभी ने मेरा अंडरवियर भी एक झटके में निकाल दिया. अब मैं पूरा नंगा था. भाभी ने एक बार फिर से पैर से चूमना शुरू किया.. लंड को उसने हाथ से कसकर पदक हुआ था.. फिर जैसे ही वो लंड के पास आयी, उसने लंड को मुंह में ले लिया.. लेकिन पूरा लंड उसके मुंह में नहीं जा पा रहा था… वहीँ से उसने मेरे लंड को अपने जीभ से चूसना शुरू कर दिया,…

यारों! अब आवाज़ जी बारी थी.. मैं बेड पर उछल था था.. और वो मज़े ले रही थी.. लगभग १० मिनट में मैं भाभी के मुंह में ही झड़ गया… और मेरा लंड छोटा हो गया…

अब भाभी ने एक बार फिर से मेरे होंठों में अपने होंठ दाल दिया और स्मूच करने लगी… इससे लंड तुरंत ही फिर से टाइट हो गया. अब भाभी टाँगे खोल कर मेरे जांघ के नीचे बैठ गयी.. उसने अपने बुर को आगे किया और मेरे लंड को अपने बुर में घुसाना चाहा… लेकिन उसके छेद में मेरा लंड नहीं घुस पा रहा था.. अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था…

मैंने अब भाभी को निचे गिरा दिया और तुरंत उसके ऊपर चढ़ कर उसकी चूचियों को कस कर चूसना शुरू क्या.. ५ मिनट के बाद मैंने भाभी के जांघों को फैला दिया और अपना लंड धक्का देकर घुसाना चाहा.. लेकिन तो कराहने लगी…

भाभी बोली – फट जायेगा…! तेरे नामर्द बॉस का तो ४ इंच का ही है, साला नामर्द…

फिर मैंने अपने मुंह भाभी के बुर के पास ले जाकर ढेर सारा थूक बुर के मुंह के पास लगाया.. उसके बाद मैंने भाभी की दोनों टांगों को अपने दोनों कन्धों पर रखा और ज़ोर से अपना लंड बुर में घुसेड़ा.. इस बार आधा लंड जाने के बाद रुक गया..

भाभी दर्द से बिलबिला उठी – फट जाएगा राजीव!!!

मैंने कहा – कुछ नहीं होगा.. आप थोड़ा पेशेंस रखो.. बहुत मज़ा आएगा…

अब मैं धीरे धीरे अपना लंड अंदर बहार करने लगा. भाभी की हालत ख़राब थी.. उसने अपनी आखें मूँद ली थी और होंठों को दांत से दबा के रखा था.. लगभग ५ मिनट तक लंड आगे-पीछे करने के बाद भाभी की बुर में थोड़ा गीलापन लगने लगा था…

अब दर्द भी पहले से कम था.. इस बार मैंने फिर से शॉट मारा.. तो पूरा लंड अंदर घुस दया.. भाभी दर्द के मारे चीख उठी – आह्ह्ह्हह्ह!!!! फट गया!!!!

सच में, बुर का आगे का हिस्सा बहुत ज़्यादा टाइट था.. वह लंड अच्छे से आगे पीछे नहीं हो पा रहा था,…

मैंने झट से अपना लंड निकाला और भाभी ने बुर में अपने मुंह घुसा दिया.. भाभी अब उछलने लगी.. लगभग १० मिनट तक मैंने भाभी की चुदाई अपने जीभ से की… उसके बाद भाभी ने अपने दोनों जांघो के बिच में मेरा सर जकड लिया.. और अपना पानी छोड़ दिया…

फिर बोली – आज लाइफ में पहली बार मैं झड़ी हूँ.. नहीं तो सुमन मादरचोद को खुद ३-४ बार झड़ जाता है लेकिन मेरा कुछ नहीं कर पाटा है..

अब भाभी का बुर अच्छा ख़ासा गीला हो चूका था. मैं फिर जांघों के पास बैठा और भाभी को पैर फैला कर ज़ोरदार शॉट मारा.. और पूरा लंड अंदर..!!

भाभी बेड से उछाल कर मुझसे चिपक गयी.. उसकी चूचियां लग रहा था जैसे मेरे अंदर घुस जाएंगी और स्मूचिंग तो लगातार जारी था.. इस बार हम लोगों ने जमकर चुदाई की…

भाभी ने भी अपनी कमर उठा उठाकर मेरा भरपूर साथ दिया. लगभग २५ मिनट चुदाई करने के बाद मैं भाभी के बुर में ही झड गया.. लेकिन मेरा लंड अभी वैसे का वैसे ही था.. अब बुर में और पानी हो गया था.. और चुदाई में और ज़्यादा मज़ा आ रहा था.. इसलिए मैंने चुदाई रोकी नहीं और और चोदता था… बिच-बिच में भाभी कभी अपने जांघों को सटा लेती थी.. कभी मैं उसके जांघों को अपने कंधे पर रख लेता था.. ऐसे ही लगभग १ घंटे के बाद मैं फिर से झड़ गया एयर भाभी भी झड़ गयी..

अब लंड महाराज ८.५ इंच से ३ इंच के हो चुके थे.. मैं अपना लंड बुर से बाहर निकाल रहा था तो भाभी ने कहा – इसी में डाले रखो.. बहुत अच्छा लग रहा है..

हम लोग उसे पोजीशन में सो गए..

रात में मेरी जब नींद खुली तो रात के १ बज चुके थे.. भाभी बेसुध हो कर सोयी थी..

मैंने कहा – बहुत रात हो गयी है, मैं अपने घर जाऊं क्या?

तो भाभी ने अपने ऊपर फिरसे खींचकर सुला लिया और बोली – अब तो सुमन के आने के बाद ही तुम यहाँ से जाओगे.. आधे घंटे रुको, मैं खाना बनती हूँ… फिर मैं तुमको फिर से खाउंगी…

दूसरे दिन मैंने ऑफिस से मेडिकल लीव् ले लिया और मैंने और श्वेता भाभी ने जमकर सेक्स का आनंद उठाया..

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जॉब के बहाने चाचा ने बनाया बीवी https://sexstories.one/chacha-ne-choda-aur-banaya-biwi/ Tue, 19 Oct 2021 10:06:35 +0000 https://sexstories.one/?p=3066 हम दोनो दूसरे रेस्टोरेंट मे चले गये और हमने ब्रेकफास्ट किया. फिर उन्होने अपने दोस्त को फोन किया उनके दोस्त ने कहा की बोम्बे से उनके बॉस आने वाले हैं उनके आने के बाद इंटरव्यू होगा. तो चाचू ने मुझसे कहा की जब तक उनके दोस्त के बॉस आए हम दिल्ली घूम लेते हैं...

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Chacha ne choda sex story मेरा नाम गीतांजलि है और मैं हरयाणा की रहने वाली हूँ. मेरी उम्र 26 साल है और मैं अभी तक अनमेरीड हूँ। पर कुँवारी नही। आप लोग समझते होंगे कुँवारी और अनमेरीड मे फर्क. चलो यहाँ पर मैं पहली बार अपनी रियल लाइफ के बारे मे लिख रही हूँ। आज मैं आप लोगों को अपनी चुदाई के बारे मे बताउगी।

मेरा नाम गीतांजलि है और मैं अपनी स्टडी पूरी करने के बाद जॉब ढूंड रही थी. फिर मैं एक स्कूल मे टीचर की जॉब शुरू की। लेकिन मैं उस जॉब से खुश नही थी, मैं और मेरे माता पिता कोई अच्छी जॉब चाहते थे. जैसे बैंक की जॉब। मेरे एक चाचू हैं जो पंजाब मे रहते हैं, उनका नाम रंजीत है और वो बहुत पैसे वाले हैं। इसलिए मम्मी ने उनसे मेरी जॉब के बारे मे बात की तो चाचू ने कहा की ठीक है.. मैं गीतांजलि को जॉब दिला दूँगा.. इसी बैंक मे मेरा जानकार है.. मैं उस से बात करूँगा… फिर 4-5 दिन बाद चाचू का घर पर फोन आया की उन्होने अपने दोस्त से बात की है जॉब के बारे मे, तो उस दोस्त ने मुझे दिल्ली इंटरव्यू के लिए बुलाया है।

मम्मी ने कहा की ठीक है, ये गुरुवार को इंटरव्यू देने चली जाएगी अकेले। फिर मम्मी ने कहा की लड़की का अकेले जाना ठीक नही होगा अगर आप को टाइम हो तो आप चले जाओ साथ. तो चाचू ने कहा मुझे तो काम है मैं नही जा पाउगा.. पर अपने फ्रेंड को फोन कर दूँगा कोई चिंता की बात नही है.. तो मम्मी ने कहा जैसा आप को ठीक लगे… फिर मंगलवार को चाचू का फोन दुबारा आया की उनकी उनके दोस्त से बात हो गयी है.. इंटरव्यू बुधवार को हो जाएगा ओर वो भी मेरे साथ दिल्ली चले जाएँगे…

ये सुनकर मम्मी ने कहा की ठीक है, अच्छा है की आप साथ चले जाएँगे बात भी अच्छे ढंग से हो जाएगी… फिर चाचू ने कहा की वो शाम तक घर आ जाएँगे और दिल्ली के लिए सुबह जल्दी निकल जाएँगे। फिर वो शाम को 9 बजे घर पहुँच गये. फिर सुबह 5 बजे उठकर मैं और चाचू दिल्ली के लिए निकल गये। दिल्ली पहुँच कर चाचू ने मुझे ब्रेकफास्ट के लिए पूछा. मैने कहा भूख तो लगी है फिर हम दोनो एक रेस्टोरेंट मे ब्रेकफास्ट के लिए बैठ गये। फिर मैने देखा की वो तो एक बार था. मैने चाचू से कहा की ये तो बार है तो चाचू ने कहा सॉरी ध्यान नही दिया चलो किसी और रेस्टोरेंट मे चलते हैं।

Desi Incest लौड़े में दम नहीं फिर भी हम किसी से कम नहीं

फिर हम दोनो दूसरे रेस्टोरेंट मे चले गये और हमने ब्रेकफास्ट किया. फिर उन्होने अपने दोस्त को फोन किया उनके दोस्त ने कहा की बोम्बे से उनके बॉस आने वाले हैं उनके आने के बाद इंटरव्यू होगा. तो चाचू ने मुझसे कहा की जब तक उनके दोस्त के बॉस आए हम दिल्ली घूम लेते हैं और इस तरह हम 3 बजे तक दिल्ली घूमते रहे। फिर मेरे कहने पर उन्होने दुबारा अपने दोस्त को फोन किया तो उन्होने कहा की उनके बॉस की फ्लाइट लेट है वो शाम तक आएँगे तो चाचू ने कहा ठीक है हम 7 बजे ऑफीस पहुँच जाएँगे.. दोस्त ने कहा ठीक है।

फिर जब शाम को 7 बजे चाचू और मैं उनके दोस्त के ऑफीस पहुँचे तो वो वहाँ नही था. चाचू ने फोन करके पूछा तो उनके दोस्त ने कहा की उनके बॉस रात को रेस्ट करेंगे यहीं पर तो वो एक रूम बुक करवा दें. तो चाचू ने एक होटल मे पहुँच कर एक रूम बुक करवा दिया. फिर मुझसे बोले अगर फ्रेश होना है तो हो लो. मैने कहा हा ठीक है मैं फ्रेश हो लेती हूँ.. तो हम दोनो उस रूम मे चले गये।

रूम मे पहुँच कर मैं फ्रेश होने बाथरूम मे चली गयी. जब बाहर आई तो चाचू कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे. उन्होने मुझसे कोल्ड ड्रिंक पूछी तो मैने कहा हाँ मुझे भी पीनी है तो उन्होने एक ग्लास मे मुझे भी कोल्ड ड्रिंक डाल कर दी. कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद मुझे नशा सा होने लगा तो चाचू ने कहा की लेट जाओ थोड़ी देर और वो मुझे पकड़ कर बेड के पास ले गये और मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे सिर पर हाथ घुमाने लगे।

फिर धीरे-2 उनका हाथ मेरे गाल पर आ गया और अचानक ही उन्होने मुझे किस किया. मैं हैरान रह गयी मैने कहा ये आप क्या कर रहे हैं चाचू तो उन्होने कहा क्या हूँआ.. कुछ भी तो नही हुआ.. आज कल ये तो आम बात है.. किसी को पता नही चलेगा… मैने कहा नही ये सब मुझे पसंद नही और आप मेरे चाचू हैं तो उन्होने कहा इस से क्या फर्क पड़ता है और ये कह कर वो मेरे पास लेट गये और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगे।

मैने काफ़ी कोशिश की उन्हे रोकने की पर वो नही माने. मुझ पर काफ़ी कमज़ोरी आ गयी थी. उन्होने उसका फायदा उठा कर मेरी शर्ट उतार दी और बोले की ये इंटरव्यू तो बहाना था. मैं तुम्हे दिल्ली इसीलिए लाया था… काफ़ी दिन से मेरी नज़र तुम पर थी.. मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता था पर मौका नही लगा.. जब तुम्हारी मम्मी ने मुझे तुम्हारी जॉब के लिए कहा तब मुझे लगा की ये मौका अच्छा है… ये सुनकर मुझे अपने कान पर विश्वास नही हो रहा था।

ये कहकर उन्होने मेरे बोब्स को आराम-2 से दबाने लगे और बोले गीतांजलि इन्हे चूची कहते हैं और उन्होने ये कह कर मेरे चुचे बहूँत ज़ोर से दबा दिए. फिर उन्होने मेरी ब्रा उतार दी और मेरे चूचे चूसने लगे. और दूसरे चुचे को मसलते रहे।

फिर उन्होने मुझे खड़ा करके मेरे सारे कपड़े उतार दिए और अपने भी. उनका लंड काफ़ी बड़ा था. मैं उनके लंड को देख कर चीख पड़ी तो उन्होने कहा चिंता मत कर गीतांजलि दर्द नही होगा आराम से डालूँगा.. ये कहकर उन्होने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे सारे शरीर को चूमने लगे। उन्होने मेरे पूरे शरीर को उपर से नीचे तक चूमा. उन्होने मेरी चूची को काटा भी. अब हम दोनो नंगे थे और मैं शरमा रही थी पर चाचू ज़बरदस्ती कर रहे थे।

उसने देर ना करते हूँए मेरे बोब्स को दबाने लगा मेरी ब्राउन मोटी निप्पल टाइट हो गई थी वो तो चूसता ही रहा थोड़ी देर बाद मुझे मज़ा आने लगा तो मैने भी अपनी टाँगो को फैलाया फिर वो मेरी चूत चाटने लगा तो मेरे मुँह से आवाज़ निकल गई सस्शह…आअहह…..चाचू ऐसा थोड़ी देर और करो ना… तो वो समज गया की ये भूखी हो रही हे… उसने थोड़ी देर और किया. अब की बार तो उसने अपनी पूरी जबान मेरी चूत के अंदर डाल दी… और चाटने लगा मज़े ले ले कर मैं दर्द के मारे तकिया दबा रही थी। फिर उन्होने अपने लंड पर तोड़ा तेल लगाया और मेरी गांड के पास लाकर मुझे किस करने लगे होठो पर ताकि मैं चिल्ला ना सकूँ.

Parivaar me chudai होने वाली भाभी की बहन

फिर उन्होने अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से धक्के मार कर मेरी गांड मे डाल दिया मैं कुवारी थी इसलिए मेरी चूत बहूत टाइट थी और उसका लंड तो पूरे 7.5″ का है. और मोटा भी जब मेरी गुलाबी चूत मे उसने पहला धक्का मारा तो उसके लंड का टोपा अंदर चला गया तो मैं दर्द के मारे चिल्ला पड़ी धीरे डालो दर्द होता हे… पर उसने मेरी सुनी नही और दूसरा धक्का मार दिया तब ऐसा लगा मेरी जान निकल गई मैं ज़ोर से चीखी ऊऊओ….चाचू तुम पागल हो क्या ? उतने मे मेने एक और जटका मारा तो पूरा लंड अंदर चला गया और मेरी तो आआहह.. क्या बताउ. मार डाला चाचू ने. मैं अब और नही सह सकती थी। फिर उसने कहा तुम्हारा पहली बार हे इसलिए दर्द होगा बाद तुम्हे मज़ा आएगा… और अपना लंड अंदर बाहर करने लगा और मैं दर्द के मारे मरी जा रही थी आह ……श……नही…बस करो… और उस दिन मेरी सील तोड़ दी मेरा खून भी बहुत निकला था।

फिर उसने मेरे उपर चढ़ के चुदाई की 15 मिनट तक…. फिर उसने मेरी गांड पर और अपने लंड पर तोड़ा तेल लगाया और धीरे धीरे मेरी गांड मे डालने लगा. बहूँत मुश्किल से जा रहा था पर जाने लगा… फिर एक ज़ोर का जटका देकर उसने एक ही बार मे पूरा लंड घुसा दिया तो मैं इतनी ज़ोर से चिल्लाई बहुत दर्द हो रहा है.. चाचू मत करो यहाँ पर.. वो नही माना और मेरे और जटके मारने लगा। अब मैं समझ गयी थी की चाचू मुझे आज नही छोड़ने वाले. मुझे दर्द हो रहा था और मेरी आँखो से आँसू निकल गये थे और गांड मे से खून भी निकल गया था।

फिर भी उसने मुझे नही छोड़ा और लगातार मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदता रहा फिर सीधा लेट कर मेरी कमर के नीचे तकिया रखा और मेरी चूत मे अपना लंड डाल के जटका मारा…. मैं दर्द से मरे जा रही थी। मै चिल्लाना चाह रही थी पर उन्होने मेरा मुंह बंद कर रखा था. फिर वो धीरे धीरे अपने लंड को मेरी गांड मे अंदर बाहर करने लगे धीरे धीरे मुझे भी मज़ा आने लगा और मैं भी उछल उछल कर अपनी गांड मे उनका लंड लेने लगी. तो मेरे चाचू ने कहा की मज़ा आ रहा है ना गीतांजलि तो मैने कहा हां.. चाचू अब ठीक है.. फिर उन्होने मुझे लगातार 2 घंटे तक चोदा उसके बाद जब वो तोड़ा थक गये तो बोले तोड़ा आराम कर लो… मैं आराम करने लगी तो मैने देखा की 15 मिनिट बाद ही चाचू ने मेरे पीछे से मेरी चूत मे अपना लंड डाल दिया और मुझे चोदने के लिए तैयार थे।

उस रात उन्होने मुझे 4 बार चोदा. फिर सुबह जब मैने अपने आप को बाथरूम मे जाकर सॉफ किया और आकर बेड पर लेट गयी तो चाचू मुझे किस करते हुये बोले गीतांजलि अब दुबारा कब होगा.. तो मैने कहा जब घर पर कोई नही होगा…
दोस्तों मेरी एक और रियल स्टोरी है वो मैं आपको दूसरी बार बताउंगी.. मैं उस चुदाई को कभी नही भुला सकती। वो मेरी पहली चुदाई थी. लेकिन उसके बाद तो जैसे यह सिलसिला शुरू ही हो गया। चाचू 4-5 दिन मे एक बार मेरे पास ज़रूर आते और जमकर मेरी चुदाई करते. अब तो मुझे भी चुदाई करने मे बड़ा मज़ा आता था…

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चलती ट्रैन में चोदा पूनम को https://sexstories.one/chalti-train-mein-choda-poonam-ko/ Tue, 12 Oct 2021 05:53:42 +0000 https://sexstories.one/?p=4482 मैं पूनम के नज़दीक गया हो उसकी सांसो को महसूस करते हुए उसे किस करने लगा हम दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों मै पकड़ कर स्मूच करने लगे। उसने अपना एक पैर मेरे उपर चड़ा लिया। और में अपने एक हाथ से उसके बाल पकड़ कर और दूसरे हाथ से उसके बूब्स दबा रहा था। और वो मदहोश होती जा रही थी

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Chalti Train Mein Choda Poonam Ko मेरा नाम राहुल है। मेरा रंग गोरा भूरा कद 5.10 फिट है। मै बहुत सुन्दर हूँ। में दिल्ली का रहने वाला हूँ। ये मेरी पहली कहानी है। मैं एक बार दिल्ली से कानपुर ट्रेन के 1st एसी में सफ़र कर रहा रहा था और जैसा आप को पता ही होगा की 1st एसी मैं एक केबिन होता है। जिसमे चार बर्थ होती है। तो में दिल्ली से ट्रेन में बैठा और मेरे अलावा कोई भी उस ट्रेन के केबिन में नही था।

कुछ समय बाद ट्रेन चल पड़ी और ग़ाज़ियाबाद स्टेशन पर पहली बार रुकी। वहाँ से एक सेक्सी औरत ट्रेन मै चड़ी उसकी उम्र 32 साल की होगी फिगर 38-30-38 होंगे। उसने सफेद और गुलाबी कलर की गहरे गले की कुर्ती पहनी थी।

जिसमे से उसकी ब्रा का रंग साफ झलक रहा था। और गुलाबी कलर की पेंट पहने हुई थी वो अंदर आई और अपना सामान रखा और मेरे पास बैठ गयी और वो मुझसे पूछने लगी की आप अकेले है??

और मैने जवाब दिया जी हाँ मै अकेला हूँ। और फिर हमारी जनरल बातचीत शुरु हो गयी। उसने अपना नाम पूनम बताया । कुछ समय बाद ट्रेन चल पड़ी और हम बैठे बाते कर रहे थे। इतने में उनको बाथरूम जाना था वो खड़ी हो गई। और उसी समय अचानक ट्रेन का झटके से ब्रेक लगा और वो एक दम से मेरे उपर आ गिरी और उसके बूब्स जो की आधे खुले हुए थे मेरे मुहँ पर आकर के चिपक गये। वो मुझसे कहने लगी ऊ..सॉरी सॉरी..

मैने उनसे कहा कोई बात नही मेडम वो हंसी और फिर उठ कर बाथरूम करने चली गयी… जब वो वापस आई फिर इतने समय में टीटी आया उसने हम दोनों की टिकट चेक की मैंने उनसे पूछा टीटी साहब कोई इन दोनों उपर वाली बर्थ पर सवारी नहीं आयेगी क्या? उन्होने कहा शायद जिसकी बर्थ थी वो नही आए रिज़र्वेशन उनका दिल्ली से ही था। और फिर पूनम जी उठी उन्होने केबिन लॉक कर दिया।

कुछ समय बाद वापस लोटी तब वो मेरे पास आकर बैठ गयी। हमारी फिर से बातचीत शुरु हो गयी। लेकिन इस बार थोड़ी खुलकर बातें होने लगी। फिर मैने पूछा पूनम तुम क्या करती हो। उसने कहा की वो किसी ऑफिस में काम करती है। लेकिन मेरी नज़र उसके आधे खुले बूब्स पर थी। वो मुझे देख रही थी की मैं उसके बूब्स को ही देख रहा हूँ। एक दम से उसने पूछा अच्छे लग रहे है क्या?? मैने कहा क्या मतलब?? उसने कहा की जो तुम देख रहे हो मेरे बूब्स।

Mast chodayi kahani दूकान में चोदा सेक्सी भाभी को

मेरे तो एक दम से तोते उड़ गये। मैने कहा सॉरी डियर। असल में कुछ सोच रहा था। मेरी नज़र उधर थी पर ध्यान कही और था। पूनम हँसने लगी और कहने लगी इधर भी ध्यान दे दो यार। मैने कहा अब तो पूरा ध्यान दिमाग़ और नज़र सब उधर ही है। इतने मै वो मेरे पास मै आ कर बैठ गयी और मेरा हाथ पकड़ कर मसलने लगी यारो क्या बताउ वो बहुत सेक्सी होती जा रही थी। फिर हम दोनो आखों में आखें डाल कर एक दूसरे को देख रहे थे। उनकी आँखों में पूरा सेक्स का नशा चड़ा हुआ था।

फिर मैं पूनम के नज़दीक गया हो उसकी सांसो को महसूस करते हुए उसे किस करने लगा हम दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों मै पकड़ कर स्मूच करने लगे। उसने अपना एक पैर मेरे उपर चड़ा लिया। और में अपने एक हाथ से उसके बाल पकड़ कर और दूसरे हाथ से उसके बूब्स दबा रहा था। और वो मदहोश होती जा रही थी। मैने उसके लिप्स पर किस कर डाली। फिर उसके आधे ख़ूले बूब्स के बीच मै अपना फेस डाल कर किस करने लगा। और दूसरा हाथ बालो से हटा कर उसकी कुर्ती के अंदर पीछे से डाल कर उसे नशीली मसाज देते हुए उसकी कुर्ती उतार दी।

यारो वो लाल कलर की ब्रा मै खूब लग रही थी। और मैंने अपना चहरा उसके एक दम मखमली सॉफ्ट बूब्स मै लगाये जा रहा था। उसे और मुझे दोनों को बहुत ही मज़ा आ रहा था। फिर मेने उसकी ब्रा निकाल दी उसके बूब्स बहुत बड़े और गोल थे और मे उसके निप्पल चूसने लगा उसके निप्पल एक दम मुलायम थे। उसने एक दम से मेरा पेंट के उपर से मेरा लंड पकड़ लिया। जो की पूरा बड़ा होकर 8 इंच का हो चुका था। और वो चुदने के लिए फड़ फड़ा रहा थी वो बहुत कामुक हो चुकी थी। पूनम ने जल्दी से मेरी पेंट और अंडरवेर को एक साथ उतार फेका। और वो जुट गयी मेरा लंड चूसने और दोनों हाथो से मेरी गांड दबाते हुए कस कस कर चूस रही थी वो मेरे लंड को।

फिर मैने उसकी टाइट पेंट उतारी तो उसके साथ उसकी पेंटी भी उतर गयी। अब हम दोनों एक दम से एक दूसरे के सामने नंगे थे। अब हम 69 मूड में थे। पूनम मेरे उपर थी और वो मेरा लंड मानो एक दम जंगली बिल्ली की तरह चूस रही थी। लेकिन ये मेरा पहला टाइम था मुझे चूत को चूसने मै परेशानी हो रही थी। फिर भी मैने अपनी दो उंगलिया डालते हुए उसे पूरा मज़ा दिया। मैने पूनम को बर्थ पर लेटाया और अपना लंड उसकी गीली चूत पर रगड़ने लगा। पूनम बोली चोद दो मुझे राहुल चोदो मुझे।

मैने अपना लंड जैसे ही उसकी चूत मै अड़ाया और अंदर डालने लगा मेरा पूरा 8 इंच का लम्बा लंड उसकी चूत मैं फिसलता हुआ समा गया। और उसने चीखते हुए अपने लंबे नाख़ून से मेरी पीठ पर निशान कर दिये। अब मै अपना लंड अंदर बाहर कर के उसे चोद रहा था वो मेरे चेहरे को अपनी चुचियो मै दबाते हुए चोदो राहुल……आआहह कह रही थी।

अब मैने पूनम से कहाँ पूनम तुम ऊपर आओ। मैं बर्थ पर लेट गया और पूनम मेरी जाँघो पर बैठ कर मेरा लंड अपनी चूत मै रगड़ रही थी। और चुदाई कर रही थी। फिर उसने लंड अंदर डाल कर धीरे धीरे चुदाई चालू कर दी। और मै एक हाथ से उसकी चूचीयों को दबा रहा था। और दूसरे हाथ की उंगली उसके गांड के छेद मै डालने की कोशिश कर रहा था। फिर अपनी उंगली को उसकी चूत के पानी से गीला कर के उसकी गांड मै डालने लगा। तभी वो बहुत जोर से चिल्लाई राहुल मत करो दर्द हो रहा है। और वो अपनी गांड उठा उठा कर चूत चुदाई कर रही थी। मैने कहा पूनम मुझे तुम्हारी गांड मारनी है।

पहले तो उसने मना करा फिर समझाने पर मान गयी। मैने उसको कुतिया की तरह स्टाईल मै करने को कहाँ वो गांड उठा कर ज़मीन पर घुटनो के बल झुक कर बैठ गयी। मैने अपनी अटेची से सिर मै लगाने वाला तेल निकाला। और बहुत सारा तेल अपने लंड पर और उसकी गांड के छेद पर लगाया। और धीरे से उसकी गांड पर लंड टिकाया। और एक ज़ोर का झटका मारा मेरा थोड़ा सा लंड अंदर गया और वो चीख पड़ी और कहने लगी प्लीज छोड दो मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
थोड़ा समय ठहर कर फिर दूसरा झटका मारा लगभग आधा लंड अंदर गया। उसे बहुत दर्द हो रहा था। थोड़ी देर मैं बिना हिले ही लेटा रहा। उसे कुछ आराम मिला तो आधा ही लंड अंदर बाहर करने लगा। उसे अब मज़ा आने लगा था। वो चुदाई करने में मेरा पूरा साथ दे रही थी। फिर मैने तीसरा ज़ोर का झटका मारा थोड़ा लंड और अंदर गया। अब उसे बहुत मज़ा आने लगा था।

अब मेंरा काम होने वाला था। मेने उसे पूछा वीर्य कहाँ निकालूं। पूनम ने कहाँ की में उसे पीउंगी मैने लंड बाहर निकाला और उसके मुह में दे दिया। और वो अपने हाथो से लंड को पकड़ कर चाटने लगी। मेरा वीर्य निकलने लगा मुझे झटके लगने लगे। उसने पूरा वीर्य मुहँ में भर लिया। और कहने लगी बहुत नमकीन नमकीन है।

फिर सब कुछ साफ कर के हमने अपने कपड़े पहने और एक ही बर्थ पर एक साथ लेट गये फिर रात मै करीब 3:00 बजे हमने दोबारा एक बार से चुदाई की और हम सो गये। सुबह उठ कर पूनम ने पूछा की राहुल तुम करते क्या हो?? मैने कहा में एक स्टूडेंट हूँ। वो मुझे घूर कर शैतानी नज़र से देखने लगी और कहने लगी तुमने बहुत कुछ कर दिया लेकिन अपना चार्ज नही बताया। मैने कहाँ मेडम मैं बहुत खुश हो कर अपना पेमेंट नहीं लेता हूँ।

उसने बताया की उसके पति हमेशा एक ही स्टाइल मै और कई महीने मै 3 या 4 बार ही चोदते है। और उनका लंड भी केवल लगभग 5 इंच का ही है। बिल्कुल मज़ा नही आता पर आज तो तुमने मुझे पूरी तरहा से बहुत मज़ा दिया है। फिर उसने अपने पर्स से मुझे 1000 रू निकाल कर दिए और मेरा सेल नंबर लिया और कहने लगी की अगर दिल्ली या कही भी बुलाउंगी तो तुम आओगे। मैने कहा हाँ मेडम किसी भी समय। और वो चली गयी अब में हर समय उसी को सोचता रहता हूँ। उस दिन के बाद हम लोग कई बार चुदाई का काम कर चुके है।

उसको चोदने में बहुत मज़ा आता है और वो भी बहुत मज़े से चुदवाती है।

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भाई बहन की चुदाई का खेल https://sexstories.one/bhai-bahan-ki-chudai-ka-khel/ Fri, 08 Oct 2021 07:27:16 +0000 https://sexstories.one/?p=4456 थोड़ी देर बाद भाई का लंड फिरसे खड़ा होने लगा, जब उसने मुझे दिखाया तो मैं खुश हो गयी और उसे मूह मे लेकर धीरे धीरे चूसने लगी वो मेरे स्तानो को दबाने लगा. भाई का लंड अब पूरे जोश मे आगेया था, और इस बार मैं उसे मुझमे समाने के लिए बेताब थी. मैं झट से बिस्तर पे लेट गयी और भाई को चढ़ने को कहा.

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Bhai Behan Ki Chudai Ka Khel : ही दोस्तो मेरा नाम ‘निहारिका’ है पर घर मे मुझे सब ‘पूजा’ बुलाते है क्यूंकी मेरा बदन गोरा और गुलाबी सा है. मेरा जन्म होने के बाद एक साल बाद ही मेरे पहले पिता ने मेरी मा को और मुझे छोड़ दिया और किसी और के साथ घर बसलिया. उस समय मै

सिर्फ़ डेढ़ साल की थी. तभी मेरे मामा क दोस्त ने जिनकी बीवी लड़के को पैदा करते हुए मार गयी थी मेरे मा से शादी कर ली. वो लड़का यानी मेरा सौतेला भाई राकेश है. और मैं और मा उनके साथ रहने लगे. राकेश भैया मुझसे 4 साल बड़ा था. पर उसने कभी मुझे सौतेला व्यवहार नही किया.

जब भाई बड़ा हुआ तो पापा ने उसे पढ़ने के लिए दिल्ली भेज दिया. तब वो 1२ वी क्लास मे था और मैं ९ वी मे थी. मैं तब 1४ साल की थी और भाई 1८ साल का था. जब भाई उस साल छूतियो मे घर आया तो बड़ा ही खूबसूरत दिख रहा था, उसे मुंबई रास आ गयी थी. पर वो मुझसे आते ही गुस्सा हो गया क्यूंकी वो जाने के बाद मैने उसका कमरा ले लिया था. पर पापा बोले, ‘राकेश जब तक तू यहा है तब तक पूजा हमारे कमरे मे सो जाएगी.’ वो और मैं दोनो मान गये.

जब उसे रात मैं पापा-मम्मी के कमरे मे सो रही थी तब रात को मुझे मा की कसमसाहट सुनाई दी और मैं जाग गयी पर सिर्फ़ थोडिसी आखें खोलके देखने लगी, और हक्का बक्का हो गयी. पापा और मा दोनो ज़मीन पे बिल्कुल नंगे लेते थे और पापा मा के दोनो बूब्स को बरी बरी छू रहे थे. मैं ये देख के दंग हो गयी, फिर मा ने पापा के लूँगी मे हटा डाला और उनका लंड बाहर निकाला, इतना बड़ा और लाल था वो मैं तो घबरा गयी और फिर पापा ने उसे मम्मी क छूट पर रख के ज़ोर का झटका दिया और मा कसमसा उठी, तब मैने भी मेरे पिशब की जगह (मतलब चूत पे) गीला पन महसूस किया और मुझे कुछ अजीबसा लगने लगा.

सुबह जब बातरूम जाके मैने मेरी पनटी उतरी और उसे हाथ मे पकड़ा तो मुझे वाहा चिपचिपा लगा और उसे नाक से सूंघने पर एक वासना भारी सुगंध आई. मैं तो जैसे बावरी हो गयी. उसे दिन पहली बार मैने खुद को पूरे कपड़े उतार के नंगा देखा और खुदके छोटे छोटे बूब्स को सबारा. हे क्या बतऊ मेरी हालत. उसके बाद मैने चार दिन मा और पापा का वो खेल रोज रात को चुपके से देखा.

Bhai Behan Ki Chudai मोहिनी की स्कूल में चुदाई

अब मैं 16 की होगआई थी और पूरी जवान लगने लगी थी. पर मुझे किसी लड़के ने अभी तक छुआ नही था. मेरा भाई भी अब 20 का हुआ था और स.य.ब्कॉम कर रहा था. मैने भी 10त पास कर लिया था और पापा ने मुझे भी भाई के साथ दिल्ली के उसीके कॉलेज मे 1२वी के लिए भेज दिया. भाई और मैं जब मुंबई पह्ोचे तब जोरो की बारिश चल रही थी और हम दोनो भीग गये थे. भाई तब एक चल मे रहता था जिसमे एक छोटसा कमरा किराए पे लिया था. कमरे मे ही टॉयलेट और बाथरूम था पर बातरूम को दरवाजा नही था. भाई अकेला होने के वजह से उसे तकलीफ़ नही हुए पर अब मुझे वाहा नहाने को परेशानी होगी ये मैने कहा तो उसने कहा, ‘ जब तुम नहाने जाओगी तब मैं कमरे क बाहर चला जौंगा और तुम अंदर नहा लेना, फिर दरवाजा खोलना.’

मैं इस बात पे मान गयी. दूसरे दिन हम कॉलेज पहुचे उसने मेरा दाखिला करा दिया. और हम रोज़ साथ मे ही घर से कॉलेज जाते और साथ ही घर आते. आते आते कभी हम समान बाजार से ले आते और मैं घर मे ही खाना पकाती और भाई भी मुझे हेल्प करता था. इस दौरान ही मुझपे जवानी चढ़ने लगी थी. कॉलेज मे हमे बहुत लोग बाय्फ्रेंड-गर्लफ्रेंड ही समझते थे. मुझे भी वो अछा लगता था. जब कभी भाई मुझे खाना बनाने मे हेल्प करता तो उसका हाथ कभी कभी मेरे स्तानो को छू जाता और मेरे बदन मे एक ही सिरसिरी भर जाती, पर ये वो जानभुज के करता या अंजाने हो जाता ये उसे ही पता. ऐसे ही दो महीने बीत गये.

हमारे घर के पास ही एक मेला लगा, मैने भाई को कहा चलो मेला घूम आते है, भाई भी तैयार हुआ और हम शाम को मेला देखने चले गये. घूमते घूमते हम भाई के एक टीचर मिल गये, उन्हे लगा मैं भाई की पत्नी हू, और वो कुछ सुनने के पहेले ही कह गये, ‘जोड़ा खूब जज्ता है, कुश खबर जल्दीही देना.’ और्र मैं और भाई शरम के मारे पानी पानी हो गये. आयेज हम दोनो आकाश झूले मे बैठे, जैसे झूला उपर जाता मैं भाई को कस क पकड़ लेती थी क्यूंकी मुझे बहोट दर्र लगता है. तब मेरे स्तन भाई के खांडे को चिपक जाते, और जाँघ से जाँघ च्पक गई थी. मेरी आखे बंद थी और मेरे सलवार के उपर से मेरे स्तन दिख रहे थे, भाई उन्हे आखे फाड़ के देख रहा था (ये उसने मुझ बाद मे बताया) जब हम झूले से नीचे उतरे तो भाई मेरी तरफ अलग ही नज़र से देख रहा था.

घर जाते जाते बारिश ने हमे घेर लिया और मैं और भाई पूरी तरह भीग गये. मेरे सलवार सफेद थी और भीगने के कारण मेरी ब्रा क्लियर नज़र आ रही थी जिसे भाई घूर रहा था. जैसे तैसे हम रूम पहुचे और दरवाजा बंद कर लिया. भाई ने कहा, “पूजा तुम कपड़े बदल लो मैं बाहर खड़ा रहता हू.’ तो मैने कहा,’भाय्या रहएने दो आप पीठ कर के खड़े हो जाओ, मैं झट से कपड़े बदलती हू.’ वो मान गया. मैं कपड़े बदल रही थी, जैसे ही मैने मेरा सलवार उतरा मुझे राकेश की हल्की सिसकी सुनाई दी, मैं समझ गयी की वो मुझे देख रहा है. मेरे भी बदन मे एक लेहायर आ गयी और मानो एक सेकेंड मे मेले की बाते और मा-पापा का सेक्स मेरे आखो के सामने आ गया और मुझे नीचे गीला लगने लगा. बाद मे मैने उसके तरफ देखा और कपड़े बदले पर उसने नही देखा. थोड़ी देर बाद उसने उसके कपड़े बदले तब मैं चोरी से उसकी अंडर पंत को देखा तू वो एक तुंबो जैसे लग रही थी. मैं समाज गयी के भाई का लंड खड़ा हो गया है.

उस रात मैं रोज़ की तरह नीचे ज़मीन पे सो रही थी और भाई पलंग पे. वो पलंग पे पेट के बाल सॉयके सोने का नाटक कर रहा था और मेरे उभरो को देखे जेया रहा था. मैने भी उसे उतेज़ित करने के लिए पल्लू निकल दिया था, ताकि उसे मेरे स्तानो क बीच की खाई दिखे. उस रात मैं बहोट देर तक सोचती रही की ये सही है या ग़लत, वो मेरे छूट की खुजली भाई को सोच सोच और ही बढ़ रही थी. वैसे भी वो मेरा सौतेला भाई था और उसके तरफ भी आग लगी थी, पर उसकी हिम्मत नही थी कुछ करने की. फिर मैने ही एक प्लान बनाया.वो ऐसा,

दूसरे दिन सुभह जब मैं नहाने निकली तो भाई बाहर जाने लगा, मैने कहा, ‘राकेश भाय्या, आप यही रूको, जब आप बाहर जाते हो तो बाजू के लोग, बाड़मे मुझे घूरते है.’ तो भाई रुक गया और पलंग पे पीठ कर के बैठ गया. मैने पल्लू का परदा किया और नहाने लगी. नहाते वक़्त मैं गाना गाने लगी, “सजना है मुझे, सजना के लिए…” तो भाई ने देखे और झट से फिर मूड गया. मैने जानबूजके टवल पलंग पे ही रखा था. नहाना होने के बाद मैने भाई को कहा की मुझे टवल देना, तब मैं स्टूल पे बैठ के दोनो पैर के बीच स्तन छुपाके बैठी थी. और मेरा कुर्ता गीला होने के वजह से मेरी पनटी और गीली भारी हुई जंघे दिख रही थी. मैने परदा हल्के से खिछा और टवल लेने के लिए थोड़ी उठी. उठाते ही मेरा लेफ्ट स्तन पूरा भाई को दिखा और उसके मूह से सिसकारी निकले. मैने ऐसा बर्ताओ किया की ये अंजाने मे हुआ और बैठ गयी, बैठते ही उसे मेरी पनटी दिखी. और उसके पंत मे मुझे हलचल दिखी. मैं जान गयी की तीर निशाने पे लगा है.

उस दिन मैं सोचती रही के अब आयेज क्या करना है और उस रात खाना खाने क बाद, मैने भाई से कहा “ तुम सो जाओ मैने सहेली से नोट्स लाए है जो मुझे कंप्लीट करने है.” तो वो सोने की तायारी करने लगा और मैं नीचे बैठ क नोट्स कंप्लीट करने लगी. वो फिरसे पलंग पे पेट क बाल लेट क सो रहा था. मैं नोट्स लिखते वक़्त थोड़ी झुक क लिख रही थी जिससे मेरी स्तानो क बीच की खाई उसे थोड़ी थोड़ी दिख रही थी. मैने सोचा क भाई को गरम करने का ये चान्स छोड़ना नही छाईए इसलिए मैने गर्मी हो रही है ये दिखा क पल्लू निकल दिया और तोड़ा और झुक क लिखने लगी. उसकी थोड़ी सिसकी से मुझे पता चल गया की चिंगारी ने आग पकड़ ली है.

भाई भी सोने का नाटक कर रहा था और मुझे देख रहा था. ऐसे ही 20-25 मिनिट बीट गये. मैने तोड़ा सोचा और एक बार भाई क तरफ देखा तो झट से उसने आखे बंद की और जताया क वो सो रहा है. मैं झट से उठी और मेरा कुर्ता उतार दिया. ये भाई ने कभी सोचा ही नही था क मैं ऐसा कुछ करूँगी. उसे तो जैसे 440वॉल्ट का करेंट ही लग गया. उसने उसकी उक्सुकता थोड़ी कम की और सोने का नाटक चालू रखा. पर यह मेरे छूट से पानी बहना शुरू हो गया था. वो मेरे दोनो द्तानो को घूर रहा था, मैं भी उसका मज़ा ले रही थी. और 10-15 मीं तक मैने कभी मेरे स्तानो पे का पसीना कभी कुर्ते से तो कभी टवल से पोछा जिसे भाई और उत्तेजित हो. मेरा तो बुरा हाल था, उत्तेजना के कारण मेरे दोनो स्तन कड़क हो गये थे और सीधे हो गये थे. मैने सोचा क अब और खिचना बेकार है, और उठकर सस्यू करने क लिए बातरूम गयी, और किसी तरह का परदा नही लगाया और झट से मेरा पंत उतरी और पनटी भी उतरी, ये सब भाई देख रहा है ये सोचके और मुझे पता था क वो ये देख ही रहा होगा. पनटी उतरने के बाद नीचे बैठ कर मूतने लगी ताकि मेरी गांद का घेरा और छेड़ भाई को सॉफ डीके. भाई तो जैसे सातवे आसमान पर था. मैं ज़ोर देके मूतने लगी ताकि मेरे मुतनी की ज़ोर से आवाज़ हो. उस रात के सन्नाटे मे वो आवाज़ कुछ असर कर गयी. मैं बाहर आए और एक त-शर्ट पहें लिया.

मैं सोने क लिए गयी तो बारिश शुरू हो गयी और जहा मैं सोती थी वही से पानी टपकने लगा. और मेरी रज़ाई और चादर भीग गये. पानी की आवाज़ से भाई भी नींद से उठने का नाटक किया और बोला “ कोई बात नही पूजा यहा आजओ उपर.कल छत ठीक कर लेंगे.” मूज़े जैसा चाहिए था वैसा ही हुआ और मैं झट से पलंग पे लेट गयी. भाई से तोड़ा अंतर ले क सोने लगी(वैसे अब हम दोनो सोने का नाटक कर रहे थे) मैने थोड़े देर बाद नींद मे हू ऐसा दिखाते भाई क पेट पर हाथ रख दिया और तोड़ा तोड़ा हाट उपर नीचे करने लगी. जिस से उसका लंड उत्तेजित हो गया और उसके पाजामे मे तंबू बनाने लगा. उसने भी उसका हाथ मेरे छाती पर रख दिया और तोड़ा स्तानो पे फेरने लगा. अब आग पूरी लग गयी थी और बस मंज़िल थोड़ी ही दूर थी. तभी वो तोड़ा उठा और उसका पाजामा निकल के चड्डी भी निकल दी. तब मेरा हाथ उसके जाँघ को चुराहा था. वो मेरे तरफ मुड़ा और मुड़ते ही उसका लंड मेरे हथेली मे आ गया. मैने भी उसे तोड़ा हल्केसे दबाया और उसे मुट्ठी मे ले लिया, और तोड़ा हिलाया. तभी भाई ने झट से मेरे एक स्तन को ज़ोर से दबाया. बस अब हम दोनो क बीच की सब दीवारे टूट गयी और हम एक दूसरे को लिपट गये.

Sexy chudai kahani मेरी चूत मारी गई खेत मे

भाई ने मेरे होतो को चूमा और एक फ्रेंच किस लिया. हे… क्या बतौ वो एहसास. फिर भाई ने धीरे धीरे मेरे स्तन दबाए, मैने भी उसके लंड को धीरे धीरे आयेज पीछे करना शुरू किया. भाई ने मेरा कुर्ता और सलवार उतार दिया अब मैं सिर्फ़ पनटी मे थी . मैने भी भाई का त-शर्ट उतार दिया और उसकी बालो वाली छाती चूमने लगी. भाई मेरे स्तानो को मूह मे लेके चूसने लगा, कभी एक कभी दूसरा. मेरे मुहसे सिसीकिया निकालने लगी, “हे… अफ… आ…और ज़ोर्से…” ये सुनके भाई और ज़ोर्से चूसने लगा. मैं भी उसका लंड हाथ से ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी, जिसके वजह से भाई भी सिसकिया निकालने लगा…

अब मैने उल्टा होकर उसका लंड मूह मे ले लिया और वो मेरी छूट चाटने लगा… हम 69 के पोज़िशन मे थे और मुखमैथून का आनंद ले रहे थे, मेरी छूट झड़ने लगी और भाई ने सारा पानी पी लिया. मैने भी उसका पानी झड़ने के बाद पी लिया… वा क्या स्वाद था उसका… हम दोनो का पानी चाड़ने के वजह से हम थोड़े सुस्त होगआय और एकदुसरे के बहो मे लिपट के लेते रहे.

थोड़ी देर बाद भाई का लंड फिरसे खड़ा होने लगा, जब उसने मुझे दिखाया तो मैं खुश हो गयी और उसे मूह मे लेकर धीरे धीरे चूसने लगी वो मेरे स्तानो को दबाने लगा. भाई का लंड अब पूरे जोश मे आगेया था, और इस बार मैं उसे मुझमे समाने के लिए बेताब थी. मैं झट से बिस्तर पे लेट गयी और भाई को चढ़ने को कहा. भाई ने भी पोज़िशन ली, और मेरे उपर आ गया, पर उसे मेरे छूट का छेड़ मे डालते ही नही आ रहा था. तो मैने मेरे कुल्हो के नीचे तकिया रखा और टांगे फैला दी, जिससे मेरा छेड़ तोड़ा खुल के दिखने लगा. भाई उस पे आया और एक ज़ोर से धक्का लगाया, जिस से उसके लंड का सूपड़ा मेरी छूट चीरता हुआ अंडर चला गया. मैं ज़ोर से चीलाई पर उतने मे भाई ने मेरे होंटो मे उसके होंटो को डालके चूमा. मुझे बहोट दर्द होने लगा और मैं रोने लगी, तो उसने उसका लंड बाहर निकल लिया. जब मैने अपनी नन्ही छूट को देखा तो उससे खून निकालने लगा था, और ऐसा दर्द हो रहा था जैसे किसीने उसे फाड़ दिया हो…

भाई ने मुझे समझाया, “पूजा, ऐसा तो होता ही है. आज तू काली से फूल बन गयी है.” भाई के समझने से मुझमे तोड़ा जोश आया और मैं उसे बोली, “राकेश मुझे बहो मे लेलो.” उसने झट से मुझको लिपट लिया. अब भाई ने मुझे फिरसे लेता दिया और अपनी हाथ के उंगली को मेरी छूट मे डाला और आयेज पीछे हिलाने लगे. इससे मुझे फिर से उत्तेजना होने लगी और मैं तयार होने लगी, थोड़ी देर ऐसे करने के वजह से मेरे छूट से पानी आने लगा और भाई ने उसे पी लिया और मेरी छूट ज़बान से चटकार सॉफ करने लगा. अब मुझेसे रहा नही जेया रहा था. सो मैं ने भाई को उपर आने का आमंत्रण दिया.

वो झट से उपर आया पर इश्स बार धीरे धीरे उसका लंड छूट मे डालने लगा. दो-टीन झटको मे ही उसका आधा लंड मेरी छूट मे चला गया. भाई अब आयेज पीछे हिलने लगा, और एक हाथ से मेरा स्तन दबाने लगा. अब मुझे अच्छा लगने लगा और मैं चिल्लाने लगी, “फाड़ दो इश्स साली छूट को… भैया… अपनी बाहें को सारा सुख दे दो… और ज़ोर्से डालो… और… इश्स… अफ…” मेरे ऐसे कहेने से भाई भी जोश मे आगेया और ज़ोर्से झटके मरने लगा… 5मीं बाद मुझे लगा के मैं झड़ने वाली हूँ, मैं राकेश से बोली “भाई मैं झड़ने वाली हू… तुम भी साथ मे ही झड़ो और मुझमे ही झड़ो, मैं तुम्हारा पूरा रस अपने मे समलेना चाहती हू…” भाई ने वैसा ही किया और हम साथ ही झाडे. वो मेरे बगल मे लेट गया. और हम दोनो को नींद आ गयी.

सुबह जब मैं उठने लगी तो मुझसे उठे नही जा रहा था. बहोट कोशिश करने के बाद मैं खड़ी हुई पर जैसे बातरूम जाने के लिए पैर बढ़ाया लड़खड़ा गयी और नीचे बैठ गयी. मेरी पहेली चुदाई के कारण मुझे बहोट दर्द हो रहा था और इसके वजह से मैं चल नही सकती थी. मैं वही पलंग पे बैठ गयी. भाई ने कहा “पूजा, तुम दो-टीन दिन घर मे ही आराम करो जब ठीक हो जाओ तब ही कॉलेज जाना.” ये कहा और मेरे पास आ के मुझे एक चूमा दे के अपने क्लास के लिए चला गया.

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गांव की एक लड़की को पूरी रात पेला https://sexstories.one/gaon-ki-ladki-ki-chudai/ Mon, 13 Sep 2021 07:00:35 +0000 https://sexstories.one/?p=4295 दोस्तो, मैंने मेरे आफिस में काम करने वाली एक गांव की लड़की की चुदाई की। मेरा नाम रॉकी है और मैं धनबाद का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 27 साल हैं, मैं एक कम्पनी में ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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दोस्तो, मैंने मेरे आफिस में काम करने वाली एक गांव की लड़की की चुदाई की। मेरा नाम रॉकी है और मैं धनबाद का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 27 साल हैं, मैं एक कम्पनी में जॉब करता हूँ. बात आज से तीन महीने पहले की है जब हमारे आफिस में एक नई लड़की ने जॉइन किया था, उसका नाम पूजा था, उसकी उम्र 21 साल थी दिखने में एकदम सीधी सादी, गोरा रंग, कसा हुआ शरीर, लंबे बाल। padhiye sexy gaon ki ladki ki chudai ki kahani.

वो धनबाद के पास ही किसी गांव से यहाँ जॉब करने आयी थी, उसका पहला दिन था आफिस में तो वो किसी से कोई ख़ास बात नहीं कर रही थी.

लंच टाइम हो गया था तो मेरे साथियों ने मुझे बोला उससे बात करने को, तो मैंने उसके पास जाकर उसको लंच के लिए पूछा.

एक बार तो उसने मुझे मना कर दिया किन्तु मेरे कुछ जोर देने पर वो मान गयी, फिर हमने साथ में लंच किया तो बातों बातों में पता चला कि वो यहाँ अकेली रहती थी और उसे धनबाद आये काफी समय हो गया था, और पहले वो कहीं और जॉब करती थी।

वो लंच नहीं लायी थी तो मैंने उससे अपना लंच शेयर किया इसलिए मेरा पेट नहीं भरा.

जब कुछ समय बाद मुझे फिर से भूख लगने लगी तो मैं कुछ खाने के लिए बाहर जाने लगा, मैं अपने केबिन से बाहर निकला तो उसने मुझसे बोला कि उसे भूख लग रही है.

तो मैं उसे भी अपने साथ ले गया और हम पास ही के एक रेस्टोरेंट में जाकर कुछ खाने लगे।

Gaon ki ladki badi sexy hoti hai

उस समय मेरे पूछने पर उसने मुझे अपनी लाइफ के बारे में बताया और ये भी बताया कि उसका कुछ दिन पहले ही उसके बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हुआ है. यह सुनते ही मैं समझ गया कि अब इसे एक कंधे की जरूरत है… तो क्यों ना वो कंधा मेरा ही हो।

और फिर वहाँ हमने अपने फोन नंबर एक दूसरे को दिये।

थोड़ा बहुत खा पीकर फिर हम वापस आफिस में आ गए और अपने अपने काम में लग गए।

फिर हम एक दूसरे से चैट करने लगे, धीरे धीरे फिर हम कॉल पर बात करने लगे, कुछ दिन ऐसे ही बीत गए।

एक रात करीब 11 बजे मुझे उसका कॉल आया, मैंने बात की तो वो रो रही थी. मेरे पूछने पर वो कहने लगी- मुझे तुमसे अभी मिलना है. कैसे भी बस… अभी मिलना है।

मेरा और उसका घर कोई 4-5 किलो मीटर के फासले में होगा, मैं उसके पास गया रात का वक़्त था तो मैंने कार ले जाना ही सही समझा.

मैं उसके घर पहुँचा तो वो बाहर ही खड़ी थी और मैं उससे बात करने के लिए कार से बाहर आया तो वो ‘मुझे यहाँ से चलो!’ कह कर मेरी कार में बैठ गयी।

Ladki gaon ki ho ya shehar ki, chodna chahiye

मैंने कार स्टार्ट की और वहाँ से चल दिए, रास्ते में उसने मुझे बताया कि उसको उसके बॉयफ्रेंड की याद आ रही थी तो इसलिए मुझे बुला लिया थोड़ा टाइम पास करने के लिए।

फिर ऐसे ही कुछ दूर कार चलाते चलाते हम हाईवे पर आ गए और थोड़ी दूर मुझे एक रेस्टोरेंट दिखाई दिया तो मैंने उससे पूछा कि उसे कुछ खाना हैं क्या?

तो उसने बोला- नहीं, खाना कुछ नहीं लेकिन पीना है!

पहले तो मैं उसकी यह बात सुन कर चौंक गया, फिर मैंने उससे पूछा कि पहले कभी पी है?

तो उसने ना में सर हिलाया.

तो मैंने उसे पीने से मना किया, लेकिन वो मुझे पिलाने के लिए जोर देने लगी. कुछ दूर आगे जाकर हमें एक बार दिखाई दिया, वहाँ जाकर हमने बियर पी, कुछ देर बाद उसे चढ़ने लगी।

फिर जब वो अपना होश खोने लगी तो मैं उसे वहाँ से लेकर जाने लगा पर उसे इतनी चढ़ गई थी कि वो सही से चल भी नहीं पा रही थी. मैंने उसे सहारा दिया और हम दोनों वहाँ से चल दिये.

उस समय करीब रात के 12 बज चुके थे, रास्ते में मैंने उससे कहा कि उसे उसके रूम पर छोड़ देता हूं तो उसने मना कर दिया और बोलने लगी कि इतनी रात को घर का गेट कोई नहीं खोलेगा तो अब वो सुबह ही जा सकती हैं।

अब मेरे पास भी कोई जगह नहीं थी उसे ले जाने के लिए तो मैंने उसे रात किसी होटल में गुजरने के लिए बोला और वो फट से मान गयी.

Gaon ki ladki ki gulabi choot chodne ka plan bana mera

फिर कुछ दूर आगे जा कर मुझे एक होटल दिखाई दिया और मैंने गाड़ी रोक कर उस होटल में रूम के लिए बात की और हमें रूम मिल गया।

मैं उसे रूम में ले गया और उसे सुला कर वापस नीचे लॉबी में आ गया, कुछ देर बाद मैं रूम में गया तो वो जग रही थी, मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?

तो उसने मुझे और बियर पीने के लिए बोला.

मैंने वहीं होटल से दो बियर ली और फिर मैं रूम में आ गया।

जब मैं रूम में गया तो मैंने देखा कि उसने अपना टॉप उतार रखा था और वो सिर्फ ब्रा में बैठी टीवी देख रही थी, मैंने उससे पूछा तो कहने लगी गर्मी लग रही थी तो उतार दी, जबकि AC ऑन था।

फिर हमने वो बियर भी पी और कुछ देर बाद वो फिर से होश खोने लगी और उल्टी सीधी हरकते करने लगी, मैं समझ गया इसे चढ़ गई हैं, मैंने उसका नशा कम करने के लिए उसे उठा कर बाथरूम में ले गया और उसे शावर के नीचे खड़ा कर दिया और जैसे ही मैं शावर खोल कर बाहर जाने लगा तो उसने मुझे पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और मुझे कस के जकड़ लिया और हम दोनों ही शावर में भीग गए।

उसके बाद उसने अपने कपड़े उतारे और मैंने अपने और काफी देर तक हम शावर में भीगते रहे, फिर जब मैं उसे बाथरूम से बाहर लाया तो हम दोनों ही पूरे न्यूड थे और जैसे ही हम बाथरूम से बाहर आये तो एक तो हम भीगे हुए ऊपर से AC ऑन होने के कारण हमे बहुत तेज ठंड लगी और वो मुझसे चिपकने लगी.

फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसे कम्बल औढ़ा दिया और मैं भी उसके पास लेट कर टीवी देखने लगा।

gaon me chud gayi

कुछ देर बाद मुझे लगा कि वो ठंड से कांप रही है तो मैंने AC बंद कर दिया. फिर भी उसे शायद ठंड लग रही थी और वो मुझसे चिपके जा रही थी, मुझे समझ नहीं आया कि क्या करूँ तो मैंने उसे बॉडी हीट देने के लिए अपने से चिपका लिया, फिर कुछ देर बाद मुझे लगा कि वो मेरे सीने पर किस कर रही है और धीरे धीरे वो मेरे होंठों की तरफ आने लगी और फिर उसने मुझे लिप किस किया, मैं भी अपना कंट्रोल खो रहा था और मेरा लंड भी अब खड़ा होने लगा था और उसकी जांघों पर छूने लगा था।

फिर उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी, हम अभी तक एक दूसरे को जगह जगह पर किस कर रहे थे फिर मैंने उसे सीधा लिटा दिया और उसके कयामती शरीर को चूमने और चाटने लगा, वो हल्की हल्की सिसकारियां ले रही थी और मैं कभी उसे किस करता कभी उसके बोबे चूसता कभी उनको जोर से दबाता.

फिर धीरे धीरे मैं उसकी चूत तक पहुँचा मैंने देखा कि उसकी चूत पर बाल नहीं थे, शायद उसने आज ही साफ किये थे, उसकी चूत देख कर मैं पागल हो गया एकदम क्लीन और गुलाबी रंग की चूत थी उसकी, और दोस्तो मुझे क्लीन शेव चूत बहुत पसंद है।

मैंने धीरे से उसकी चुत पर अपनी जीभ फिरना शुरू किया वो तो जैसे पागल ही हो गयी और जोर जोर से मेरा नाम ले कर सिसकारने लगी- ओह रॉकी ओह रॉकी

उसके मुंह से ये सब सुन कर मुझे भी काफी मजा आ रहा था और मैं अपनी पूरी जीभ उसकी रसीली चुत की गहराइयों में ले जा रहा था।

धीरे धीरे उसका शरीर अकड़ने लगा और वो मेरे मुंह को अपनी चुत पर दबाती हुई चिल्लाती हुई झड़ गयी। उसके चेहरे पर एक सुकून वाली खुशी थी जैसे कि उसे वो चीज मिल गयी हो जिसके लिए वो काफी समय से तड़प रही हो।
फिर हमने बहुत देर तक एक दूसरे को किस किया, मैं उसके ऊपर था और वो अपने पैरों को फैलाये हुए थी और मेरा लंड उसकी चुत को छू रहा था, फिर कुछ देर बाद उसने मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चुत पे रख कर कहने लगी- कुणाल, अब प्लीज इसे अंदर डाल दो!

उसकी चुत एकदम गीली थी और मैंने भी देर न करते हुए एक जोरदार धक्के के साथ मेरा लंड उसकी चुत में डाल दिया लेकिन एक धक्के में लंड पूरा अंदर नहीं गया और उसे दर्द भी हुआ तो वो जोर से चिल्लाई और उसने मुझे रुकने को बोला.

Gaon me ladki ko chod diya

फिर कुछ देर मैं उसे फिर से किस करने लगा, उसके बोबे दबाने लगा, थोड़ी देर बाद उसने अपने कूल्हों को हिलाया और मुझे अपनी तरफ दबाने लगी, मैं समझ गया कि अब इसका दर्द कम हो गया है और अब इसे चुदना है।
मैंने फिर धीरे धीरे धक्के देना शुरू कर दिया और अपना 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड पूरा उसकी चुत में डाल दिया, कुछ ही देर में उसे मजा आने लगा और वो उम्म्ह… अहह… हय… याह… करने लगी और मुझे और जोर से करने के लिए बोलने लगी.

मैं अभी ठीक से गर्म भी नहीं हुआ था कि वो फिर से अकड़ने लगी और कुछ देर बाद वो जोर जोर से आहें भरते हुए एक बार फिर झड़ गयी. लेकिन मैं अभी रुकने वाला नहीं था. फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से उसकी चुत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा.

अब वो मुझे जगह जगह काटने लगी, अपने नाखून मेरे शरीर पर चुभाने लगी जिस वजह से मुझे और भी मजा आने लगा।

दोस्तो, जब कोई लड़की मुझे लव बाइट्स देती हैं तो मुझे बहुत मजा आता हैं।

उसके बाद करीब काफी देर तक मैं उसे चोदता रहा और जब मेरा निकलने वाला था तो मैंने उससे पूछा- कहाँ निकालूँ?

तो वो बोली- मेरी चुत के अंदर ही निकाल दो, मैं दवाई ले लूंगी.

फिर हम दोनों साथ ही झड़ गए। हम ऐसे ही एक दूसरे से चिपके हुए कुछ देर तक लेटे रहे, फिर मैं उठा और सिगरेट पीने बालकॉनी में चला गया. वो शायद थक गयी थी इसलिए वही लेटी रही. कुछ देर बाद मैं रूम में आया और उसे अपनी बाहों में लेकर लेट गया और हम दोनों एक दूसरे के अंगों से खेलते रहे, फिर हमारा वापस मूड़ बन गया और इस तरह मैंने उस रात उसकी 4 बार दमदार चुदाई की. हमें सुबह के 6 बज गए थे और फिर 10 बजे हमे चेकआउट करना था तो हमने थोड़ी देर सोना ही ठीक समझा और 10 बजे चेकआउट करके हम वहाँ से निकल गए.

एक देसी मां की सच्ची कहानी – 2

फिर जब हम आफिस में मिले तो वो बिल्कुल नार्मल थी और जैसे वो रोज मुझसे बाते करती थी वैसे ही बात कर रही थी।

उस दिन के बाद हम 4 बार और उसी होटल में गए और उसी रात की तरह हमने बियर पी और पूरी रात चुदाई के मजे लिए।

लेकिन अब वो वापस अपने गांव जा चुकी हैं शायद उसकी शादी होने वाली है, मुझे नहीं लगता कि अब हम दोबारा मिल पाएंगे।

दोस्तो, ये मेरी पहली कहानी थी. अगर मुझसे कोई गलती हुई हो तो प्लीज माफ करना और अपनी राय मुझे आप मेल भी कर सकते हैं.

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चूत में लवड़ा डाल कर हिला दिया https://sexstories.one/chut-me-lavda/ Wed, 30 Dec 2020 15:10:45 +0000 https://sexstories.one/%e0%a4%b2%e0%a5%8c%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%a6/ नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप लोग | दोस्तों मैं आप लोगो के जीवन की मंगल कामना की दुवा करता हूँ जिससे की आप लोग रोज सेक्सी कहानियों पर अपना पूरा ध्यान दें | दोस्तों मेरा ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप लोग | दोस्तों मैं आप लोगो के जीवन की मंगल कामना की दुवा करता हूँ जिससे की आप लोग रोज सेक्सी कहानियों पर अपना पूरा ध्यान दें | दोस्तों मेरा नाम राहुल मिश्र है और मैं बिहार का रहने वाला हूँ | मेरी फॅमिली एक छोटी फॅमिली है जिसमे मेरे मम्मी-पापा और एक छोटा भाई रहता है | chut me lavda

दोस्तों मैं आप लोगो के लिए रोज एक नयी कहानी लिखता हूँ | mami ki chut me lavda

जिसे पढके आप लोग या तो मुठ मारते होगे या फिर जिसके पास चूत का प्रबंध है वो अपनी चूत की चुदाई करता होगा |

दोस्तों मैं आज आप लोगो को एक नयी कहानी बताऊंगा जो की मेरे ही जीवन पर आधारित है | इस कहानी में मैंने अपनी मामी जी की चूत को चोदा है और अपने लंड का माल उन्ही की चूत में छोड़ दिया है |

तो आइये दोस्तों मैं अपनी ज्यादा बकवास न करते हुए सीधा आप लोगो को कहानी की और ले चलता हूँ |

तो मेरे प्रिय भाइयों और बहनों ये बात उस समय की है.. chut me lavda

जब मैं अपनी पढाई अपने ही शहर में करता था | मैंने हाई स्कूल तक की पढाई अपने ही घर से नजदीकी स्कूल से की थी | मेरा स्कूल मेरे घर से लगभग 4-5 किलोमीटर की दूरी पर था | मैं अपने स्कूल अपनी स्कूटी से जाया करता था | एक मेरा दोस्त था सत्यम वो मेरे ही घर के पास में रहता था | वो भी मेरे ही साथ मेरी ही क्लास में पढता था | हम लोग अपने स्कूल अपने घर से एक ही साथ में निकलते थे |

मैंने अपने छोटे भाई को अपने साथ ले जाता था और वो अपनी छोटी बहन को अपने साथ स्कूटी पर बैठाल कर ले जाता था | हम लोगो की घर से लगा कर स्कूल तक में बहुत अच्छी दोस्ती थी | एक दिन मैं और मेरा दोस्त तैयार होकर अपने-अपने घर से स्कूल के लिए निकले | हम लोग बाहर स्कूटी लेके खड़े थे और अपने-अपने भाई और बहनों का वेट कर रहे थे वो अभी तक तैयार नही हो पाए थे |

हम लोग बाहर खड़े होकर बात कर रहे थे | sexy mami ki chut me lavda

तभी मेरे दोस्त सत्यम ने कहा की भाई आज स्कूल जाने का तो मन नही है | आज साला मैथ का टीचर हमारी कांपियां चेक करेगा और काम पूरा नही है | मैंने भी अपना दिमाक लगाया और कहा की भाई बात तो ठीक है पर किया क्या जाये | मेरे दोस्त ने अपना दिमाक लगाया की आज हम लोग स्कूल से बंक मारते हैं और भूल भुलैया चलते हैं | मैने उसे हाँ कर दी , हम लोग अपने भाई-बहन को बैठाल कर स्कूल ले गये और स्कूल के बाहर ही छोड़ दिया और भूल भुलैया चले गये |

हमारे कॉलेज से लगभग 12-13 किलोमीटर की दूरी पर भूल भुलैया थी जो की पुराने ज़माने में वहां के राजा विक्रम जीत सिंह ने बनवाई थी | हम लोग वहां पहुंचे अपनी-अपनी स्कूटी खड़ी की और वहां टहलने लगे | वहां हम लोगो के जैसे बहुत लड़के आते जाते थे | भूल भुलैया एक प्रकार से बक्चोद लडको का अड्डा बन गया था | वहां लड़के लडकियो को भी ले के आते थे और उनकी वहीँ भूल भुलैया में चुदाई करते थे |

एक प्रकार से भूल भुलैया में सब काम होते थे नशे से लगाकर चुदाई तक | chut me lavda

हम लोग वहां दुसरी बार गये हुए थे | हम लोग थोडा टहले और वहां एक अच्छी सी जगह पर बैठ कर वहां के नज़ारे ले रहे थे | हम लोगो को वहां अपने स्कूल की टाइमिंग तक रुकना था | इसलिए हम लोग अपने खाने-पीने का सामान अपने साथ में ले गये थे | वहां हम लोग बैठ कर कोल्डड्रिंक और चिप्स खा-पी रहे थे | तभी मेरी नज़र मेरी ही साइड में बैठे एक लड़के और लड़की पर पड़ी |

वो लोग आपस में चिपक कर बैठे हुए थे और बाते कर रहे थे | bur me lund

हम ओग अपने बैठकर खा रहे थे और उनकी बातो को सुनकर एन्जॉय कर रहे थे | थोड़ी देर तक उन लोगो ने बाते की और फिर लड़का लड़की को लेके पास के गन्ने के खेत में ले गया | हम लोग अपना खाना पीना खत्म किया और वहीँ बाहर बैठकर यह देख रहे थे की वो अन्दर क्या करने गये हैं |

थोड़ी देर तक हम लोग बाहर बैठे रहे और फिर अंदर गन्ने से जोर-जोर से लड़की की आह्ह आह्ह आह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्हा हाहा हाहाह हाह आह्ह आह्ह अहह आह्ह आह्ह्ह हहहः उन्ह उन्ह उन्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह इह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह उन्ह उन्ह उन्ह की सिस्कारियां निकल रही थी | हम लोग बाहर बैठकर मौज ले रहे थे | थोड़ी देर के बाद वो बाहर निकले |

लड़की के बाल उलझे हुए थे और लड़के के घुटनों ने मिटटी लगी हुई थी | desi boor

हम लोग थोड देर तक बैठे और फिर अब हम लोगो के स्कूल में छुट्टी होने वाली थी और हम लोगो को अपने-अपने भाई-बहन को भी लेना था | हम लोग वहां से चल दिए और अपने स्कूल के बाहर खड़े हो गये | हम लोगो ने अपने-अपने भाई–बहन को लिया और घर चले आये | और जब रात हुयी तब मैं और मेरा दोस्त छत्त पर आये और साथ में मिलकर मुठ मारा | मेरा दोस्त बहुत जल्दी झड गया था और मैं लगभग 10 मिनट तक अपने लंड को हिलाया था तब कहीं जाके झडा था |

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धीरे-धीरे हम लोगो के एग्जाम हुए और पापा ने मेरा एडमिशन मेरा मामा जी के वहां करवा दिया था और मैं वहीँ रहता था | मामा जी घर पर रहते नही थी वो पुलिस में थे और मामी जी और उनकी एक छोटी लड़की घर पर अकेली रहती थी | इसलिए पापा-मम्मी ने मेरा एडमिशन मामा जी के वहां करवा दिया था | मुझे मेरे मामा जी के वहां रुकते-रुकते 6-7 महीने हो गये थे |

मैं सुबह अपने कॉलेज अपने मामा जी की लड़की को साथ में लेके जाता था | chut me lavda

और शाम को उसको अपने साथ ही लेके आ जाता था | दोस्तों जो मेरी मामी जी थी वो बहुत ही मस्त और सेक्सी थी | उनकी मेरे मामा जी के साथ नयी-नयी शादी हुयी थी | एक दिन मैं और मामी जी घर से बाहर घूमने के लिए गये | हम लोगो ने पहले तो मूवी देखि और फिर बाद में एक अच्छे से रेस्टोरेंट में खाना खाया और घर पे चले आये | मैं अपने कमरे में आराम से लेता हुआ था | तभी मुझे मेरी मामी जी ने आवाज लगे |

मैं उठकर उनके कमरे में गया तो देखा वो थी नहीं बाथरूम से आवाज आ रही थी | मैंने सोंचा की वो सायद अंदर होंगी और मैं मामी जी के कमरे में बैठकर मामी का वेट करने लगा | मैं मामी के बेड पर लेटा हुआ था और तभी मेरी नज़र बेड के साइड में टेबल पर रखी एक बुक पर गया | मैंने वो बुक उठाई और खोल के तो देखा वो सेक्सी कहानियों की थी | जो की मामी जी पढ़ती थी , मामी जी अभी आयी नही ही थी |

मैं उसे खोल के पढने लगा | chut me lavda

थोड़ी देर तक मैंने उस बुक को पढ़ा और जब मैं पढ़ते-पढ़ते गरम हो गया तब मैंने अपना हाँथ अपने पैन्ट के अन्दर डाल कर अपने लंड को सहला रहा था | मैं अपने लंड को सहलाने में इतना मगन हो गया था की कब मेरी मामी जी बाथरूम से आ गयी मुझे पता ही नही चला | वो मुझे खड़े होके देखे जा रही थी और मैं अपने लंड को सहलाने में बिजी था | थोड़ी देर तक मामी जी खड़ी रही और जब उनसे भी नही बर्दास्त हुआ तब वो आके मेरे पास बेड पर बैठ गयी और मेरे पैन्ट को खोलने लगी |

मामी जी ने जैसे ही मेरी पेंट को हाँथ लगाया मैं एकदम चौंक कर बैठ गया और अपना हाँथ अपनी पेंट से निकाला | मामी जी भी गरम थी और मैं भी गरम हो गया था | मेरा लंड एकदम फूला के तना हुआ था | मैं थोडा घबराया और बेड पर ही बैठा रहा | मामी जी ने मूझसे कहा की इतना शरमा क्यों रहे हो , मैं समझ सकती हूँ तुम्हारी फीलिंग को और फिर अपना हाँथ मेरी पेंट में डाल कर मेरे लंड को सहलाने लगी |

मैं चुप-चाप बेड पर बैठा था | chudas mami ki chudai

थोड़ी देर तक मामी ने मेरे लंड को पेंट के अन्दर सहलाया और फिर मेरी पेंट को खोल कर मेरा लंड अपने मुह में रख कर चूसने लगी | वो इतने अच्छे से मेरे लंड को चूस रही थी की मेरे मूह से आह आह आह आह आहा आह आह्ह आहा आह्ह अहह आह्ह अह्ह्ह औंह उन्ह उन्ह ऊंह उन्ह ओह्ह ओह्ह की सिस्कारिया निकल रही थी | फिर उसके बाद मामी ने मी और अपने सारे कपडे उतार दिए और जाके मामी जी बेड पर लेट गयी |

मैं भी अब अपनी शर्म कम कर चूका था और पूरी तरह से मामी के सामने खुल चूका था | मैंने मामी की दोनों पैरों को फैला दिया और अपना लंड मामी की चूत में डाल कर उनके ऊपर लेट गया | मैं मामी की चूत में धक्के देते-देते मामी जी के बूब्स को अपने मुह में रख कर पी रहा था और मामी जी भी अपने मुह से आह आह आह आः आह आः आह आहा आहा आह आः आह आः उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह आह आह इह्ह इह्ह इह्ह की सिस्कारिया निकाल रही थी |

थोड़ी देर तक मैंने मामी जी की चूत में धक्के दिए और फिर जब मैं झड़ने वाला था तब मूझे इतना मजा आ रहा था की मैंने अपना लंड मामी जी की चूत में हिला कर अपने लंड का माल छोड़ दिया था |

तो दोस्तों ये थी मेरी कहानी इस तरह से मैंने अपनी मामी जी की चूत को चोदा और अपना लंड उनकी चूत में हिला कर अपने लंड का माल उनकी चूत में छोड़ दिया |

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विर्य बहुत पसंद है काजल दो को https://sexstories.one/%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a4-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/ Thu, 19 Nov 2020 16:32:43 +0000 https://sexstories.one/?p=1539 दीदी की चुत में लंड डालने का मेरा मन तो पहले से ही था, एक दिन मेरी वो ख्वाहिश भी पूरी हो गयी. अब आपको कहानी के तरफ ले चलता हूँ। एक बड़ी वाली बबिता ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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दीदी की चुत में लंड डालने का मेरा मन तो पहले से ही था, एक दिन मेरी वो ख्वाहिश भी पूरी हो गयी. अब आपको कहानी के तरफ ले चलता हूँ। एक बड़ी वाली बबिता दी है और उनकी ऐज २८ इयर्स है और छोटी काजल दी. जोकि बहुत ही खुबसूरत है और उनकी ऐज २५ इयर्स है. रिलेशनशिप में सिस्टर होने की वजह से मैं कभी भी उनके बारे में कभी कुछ गलत नहीं सोचता था. विर्य

अब मैं स्टोरी पर आता हु. बात पिछले साल अक्टूबर की है.

जब बबिता दी की शादी गुडगाँव से फिक्स हो गयी थी. लड़के वालो ने डिमांड रख दी, कि हम लोगो को गुडगाँव आकर शादी के अरेंजमेंट करने होंगे और शादी वहीँ से होगी. जिस कारण मामी और मामा जी बबिता दी की शादी से २ हफ्ते पहले ही वहां के लिए रवाना हो गये. ताकि वो सारे आरंगेमेंट अच्छे से कर सके.

मुझे ऑफिस का काम था. जिसके कारण मैं जमशेदपुर से शादी के २ दिन पहले गुडगाँव पहुचने वाला था. तो मेरे खाने पीने की कोई दिक्कत ना हो. इसलिए काजल दी मेरे साथ ही रुक गयी. दिन यू ही बीत रहे थे और मैं रोज़ सुबह ऑफिस चले जाता था और देर शाम को घर आता. फिर मैं और काजल दी साथ में डिनर कर के अपने – अपने रूम में सोने चले जाते थे. नेक्स्ट दिन, सन्डे होने की वजह से मैं लेट से जागा.

Behan ki chudaiजवान लड़की से सेक्स करने की चाहत

तो देखा कि काजल दी वाशिंग मशीन में कपड़े धो रही थी. विर्य

उनका टॉप और लेग्गिंग पानी से सराबोर था. क्या नजारा था. उनके निप्पल टॉप में से बाहर आते हुए दिख रहे थे. वो मानो मुझे चिड़ा रहे थे, कि अगर हिम्मत है और आकर निचोड़ लो मुझे. चीस कर उस संतरे का जूस पी जाओ. ये क्या लेगिनिंग में से चुतड का उभार साफ़ दिख रहा था. उनकी लटकती हुई गांड मुझे अपने पास ललचा कर बुला रही थी. मैं तो सिर्फ उनको एकटक निहार रहा था, कि तभी मेरे कानो में आवाज़ पड़ी.. साहिल.. साहिल.. अभी भी सपने में खोये हुए हो क्या? ये मधुर आवाज़ काजल दी की थी.

उन्होंने मुझ से कहा – जल्दी से फ्रेश हो जाओ. मैंने टेरेस पर कपड़े डाल कर आती हु. फिर ब्रेकफास्ट बना दूंगी. मैं फ्रेश होने बाथरूम में चला गया. अचानक से १० मिनट के बाद मुझे काजल दी के चिल्लाने की आवाज़ आई.. साहिल… मैं दौड़ा – दौड़ा गया. देखा तो काजल दी सीढियों से फिसल गयी थी और उनके घुटनों में काफी चोट लगी थी. उनको खून भी आने लगा था.

मैंने उन्हें जल्दी से अपने कंधे का सहारा देते हुए बैठाया और फिर बेडरूम में लेकर आ गया. चोट लगने की वजह से और ब्लड को देख कर वो बेहोश हो गयी थी और मैंने उनको हिला कर उठाने की कोशिश की. तो वो बस हूँ… की आवाज़े निकाल रही थी और फिर से बेहोश हो गयी. मुझे समझ नहीं आ रहा था, कि मैं क्या करू? मैंने फर्स्ट ऐड बॉक्स से कॉटन लेकर उनके घुटनों को साफ़ करना चाह.

बट दी के लेगिंग पहने होने की वजह से वो पॉसिबल नहीं था. विर्य

लेकिन उनके ब्लड को देख कर उनके घुटनों को साफ़ करना बहुत जरुरी था. फिर मैंने दी की कमर को उठाते हुए, उनकी लेगिंग को खीच कर अलग किया और उनके घुटनों को साफ़ करके एंटीसेप्टिक क्रीम लगा कर पट्टी कर दी.

अब जब मैं फर्स्ट ऐड बॉक्स रख कर वापस आया. तो दी अभी भी बेहोशी की हालत में पड़ी हुयी थी. ना चाहते हुए भी मेरी नज़र उनकी गेहुए रंग की चमकती हई जांघो पर जा रहा था. मैं अपने आखो से उसके जिस्म का जायजा ले रहा था. दी प्रीटी जिंटा की तरह दिखती है. उनके गालो पर जब वो मुस्कुराती है, तो गद्दे पड़ते है और डिंपल के निशान आते है.

गुलाब की भांति कोमल गुलाबी सुर्ख लाल होठ, सुराही जैसी गर्दन और टॉप में खड़े हिमालय जैसे कड़क – कड़क चुचक. जिसमे से निप्पल की कड़ाई का साफ़ अनुभव हो रहा था. शायद दी ने कपड़े धोते समय दी ने ब्रा निकाल दी थी. सपाट से पेट मनमोहक खुले और दोनों मांसल जांघो के बीच में ट्रायंगल शेप में ब्लैक थोंग तो अपनी एक अलग ही खूबसूरती बिखेर रही थी.

बहुत ही गजब लग रही थी काजल दी. विर्य

इतना सब कुछ देख कर मेरा लंड मुझ से बगावत कर बैठा और मेरे लिए अब बर्दाश्त करना मुश्किल होने लगा था. मैंने धीरे – धीरे आगे बढ़ना शुरू किया और आहिस्ते से उनके पेरो के नजदीक जाकर बैठ गया. मैंने दी की तरफ उतेजना भरी नजरो से देख रहा था. काजल दी अभी तक नींद में ही थी.

पता नहीं कहाँ से मुझ में आ गयी और मैंने उनकी कमर पर बंधी हुई डोर खोल दी और उनकी पेंटी खोल गयी. उनकी चूत देख कर मुझे चूत की खूबसूरती का अहसास हुआ और समझ में आ गया, कि क्यों सारी दुनिया चूत के पीछे पागल है. अच्छी में बहुत ही खूब सूरत चीज़ है. उनकी चूत डबल रोटी की तरह फूली हुई थी. एकदम गोरी – गोरी.. हलके – हलके काले बाल गजब ढा रहे थे.

ऐसा लग रहा था, जैसे फसल २ – ४ दिन पहले ही साफ़ की गयी हो. चूत की दोनों फांक आपस में सटे हुए थे और उनके नीच में मटर के दाने के माफिक गुलाबी घंटी दोनों फानको के बीच में बॉर्डर लाइन का काम कर रही थी. मैं हल्का सा झुका उनकी चूत की खुशबु लेने के लिए.. क्या मस्त मद कर देने वाली खुश्बु थी. मैंने एक लम्बी सी सांस खिची , ऐसा लगा जैसे मेरा दिमाग सुन्न हो गया हो.

ऐसी नशीली खुशबु मैंने जिन्दगी में पहले कभी नहीं ली थी. विर्य

मैं किसी और ही दुनिया में खो गया था. और मुझे पता ही नहीं चला, कि कब नाक की जगह मेरी जीभ ने ले ली और मैं उनकी चूत की लाइन को अपने जीभ की नोक से टच करने लगा था. मेरी जीभ उनकी चूत की दोनों फानको को खोलने की कोशिश कर रही थी और पता नहीं कब मैं ने कुते की तरह उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया था.

मैंने उनके चूत के छेद पर अपनी जीभ को घुमाना शुरू कर दिया था और नीचे से ऊपर जीभ से चूत को चाट रहा था. तभी मुझे चूत में गीलपन महसूस हुआ और मैं और भी जोर से चूत को चाटने लगा. मुझे उसका स्वाद हल्का कैसला और नमकीन लगा. लेकिन उस से भी कहीं ज्यादा नमकीन नशा लगा. ऐसा लगा, कि मानो मैंने १०० बोटल दारू की लगा ली हो और मुझे उनके बराबर का नशा हो गया हो.

मेरा नशा तब टुटा, जब दी ने अहहाह अहः की. विर्य

मेरी तो गांड ही फट गयी. मैं जल्दी से उठ कर रूम से बाहर आ गया. अभी भी मेरे मुह में चूत का रस लगा हुआ था. जो हलका चिपचिपा था और जिस से मैं मेरी जीभ से होठो से चाट रहा था. लेकिन तभी मुझे याद आया, कि मैंने दी की पेंटी को लगाया ही नहीं. ऐसे में दी को पक्का पता चल गया होगा, कि मैं क्या कर रहा था और क्या करने वाला था. अब मुझे मानो काटो तो खून नहीं. जो हलक अभी दी के चूत के रस से तरबतर था.. वो अब डर के मारे सूखने लगा था. मुझे अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी. तभी अप्रोक्स १० मिनट के बाद दी की आवाज़ आई.. साहिल… साहिल…

मैंने कहा – जी दी.

दी – ये सब क्या है?

मैं – दी, वो आपके पैर में चोट लगी थी. इसलिए बेंडेज करने के लिए मुझे मजबूरन आपके लेगिंग को उतारना पड़ा.

दी – वो तो ठीक है. लेकिन मेरे घुटनों में लगा थी चोट. ना की यहाँ… उन्होंने अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए कहा. तुम्हे जरा भी शर्म नहीं आई. अपनी बड़ी बहन के साथ ऐसा करते हुए. छि छि.. कैसे गंदे लड़के हो तुम. ऐसे गन्दी जगह को चाट कर मज़े ले रहे थे और उसको चूस भी रहे थे. मुझे तुम से घिन्न आ रही है. तुम चलो गुडगाँव.. तुम्हारी सारी कारस्तानी पापा को बताती हु और बेज्ज़त होकर तुम यहाँ से दफा होंगे. दी ने ये सारी बातें एक सांस और गुस्से में कह दी.

मेरी आँखों में रोना आ गया और मैं उनको सॉरी बोलने लगा और रोने लगा. विर्य

नीचे से दी अभी भी नंगी थी और जैसे मैं पेंटी को खोल कर गया था.. वो अभी भी वैसे ही खुली हुई थी और वो पूरी नंगी कमर को बेड के सहारे से लगाये हुए, बेड पर अध्लेटी हुई थी. बहुत तकलीफ

दी – तुम्हारे इस मगरमच्छी के आंसू का मुझ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.. साला.. कुत्ता हरामी.. गन्दी नाली का सुवर. अपनी बहन पर नज़र रखता है. बहुत शौक है ना इसे चाटने का (अपनी ऊँगली से वो अपनी चूत की तरफ इशारा करने लगी).. चाट रे हरामी… मैं भी तो देखू, कि क्तिनी देर तक चाटता है.

और उन्होंने मुझे खीच कर बेड पर पटक दिया और मेरे मुह को अपने दोनों जांघो के बीच में ला कर मेरे सिर के बाल को नोचने लगी और मुझे अपनी चूत में घुसते हुए, मेरे मुह को अपनी चूत पर रगड़ने लगी..उसके द्वारा मेरे बाल खीचने पर मुझे बहुत तकलीफ हो रही थी.

फिर मैंने कहा – दी अब तो मैं लगतार चाटूनगा, जब तक मेरा मन नहीं भरेगा. विर्य

दोस्तों… आगे की कहानी अगले पार्ट में… तो दोस्तों.. मुझे बताना जरुर, कि आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी…

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