chodayi kahani Archives - Antarvasna https://sexstories.one/tag/chodayi-kahani/ Hindipornstories.org Mon, 18 Oct 2021 08:13:56 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.1 पड़ोस वाली आंटी की गांडमस्ती https://sexstories.one/aunty-ki-gand-chudai-ki-kahani/ Mon, 18 Oct 2021 08:12:56 +0000 https://sexstories.one/?p=3063 मेरे लंड को चाटने के बाद उसने मेरे लंड को अपने मुंह डाल लिया और चूसने लगी तो मेरे मुंह से आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा....

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Aunty ki gand chudai ki kahani – Hindi Porn kahaniya हेल्लो फ्रेंड्स मेरा नाम अतुल है और मैं जमनादास कॉलोनी में रहता हूँ | मेरी उम्र 25 साल है रंग गोरा है | हाईट 5 फुट 8 इंच है | बाप का नाम जगन और मम्मी का नाम पार्वती है | बड़े भाई का नाम अनुज है और छोटे वाले भाई का नाम प्रत्युष है | मैं सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा हूँ | ऐसा नही लग रहा है जैसे मैं किसी जॉब के लिए अप्लाई कर रहा हूँ हाहाहा ! सॉरी यार मुझे ना मुहचोदी करने में बड़ा मजा आता है | दोस्तों, आज मैं पहली कहानी लिखने जा रहा हूँ क्यूंकि इससे पहले तो लिखी नहीं है |

ये जो मेरी कहानी है ये एक बहुत ही बड़ी चुदक्कड़ औरत की कहानी पर बेस है | मैं बताता हूँ कि इस चुदक्कड़ औरत की गंडमस्ती को कैसे उतारा | आप लोग बोर तो नहीं हुए न | अगर हो भी गए तो लौड़ा मुझे उससे क्या कौन सा सब यहाँ प्रवचन देने आते हैं | चलो दोस्तों, अब मैं ले चलता हूँ आप सभी को चुदाई की दुनिया में |

ये कहानी 2 साल पहले की है | मेरे घर के बाजू में एक औरत रहती है जिसका नाम तो मिनाक्षी है पर लौड़ी है बहुत बड़ी चुदक्कड़ | उसका पति कलकत्ता में जॉब करता है और साला मादरचोद खसुआ है लौंडो से गांड मरवाता है और उनका लंड चूसता है | अब हुआ यूँ कि ये तो चुदाई करता नहीं था अपनी बीवी की और वो साली रंडी कभी उसके पति के दोस्तों से तो कभी किसी से भी अपनी चूत की प्यास बुझा लेती थी | एक दिन की बात है दोस्तों, मैं छत में मुठ मार रहा था | मुठ मारते मारते मैने देखा कि वो रंडी दूध वाले के साथ छत पर चुदाई कर रही थी |

Aunty ki chudai चाची की जबरदस्त चुदाई

मैं भी लाइव ब्लू फिल्म देख कर मुठ मारने लगा | मैं मुठ मारते हुए सोचने लगा कि क्यूँ ना मैं भी इसके चूत के दर्शन कर लू और इसकी चूत को चोद के अपने लंड को तृप्त कर लूं | मैंने तुरंत अपना मोबाइल निकाला और उन दोनों का वीडियो बना लिया | एक दिन मम्मी ने मुझे सब्जी लेने के लिए मार्किट भेजा | मैं जब मार्किट गया तो देखा कि मिनाक्षी रंडी भी सब्जी ले रही थी | मैंने सोचा मौका सही है चौका मार ही देता हूँ | मैंने उनसे कहा नमस्ते आंटी आप भी सब्जी लेने आई हैं ? तो उन्होंने कहा कि नमस्ते बेटा हाँ मैं सब्जी लेने आई हूँ |

मैंने कहा अच्छा अरे सुनिए ना आपसे कुछ बात करनी है | तो उन्होंने कहा हाँ बोलो न ! तो फिर मैंने उनसे कहा कि कल जब आप दूधवाले के साथ चुदाई कर रहे थे तो मैंने आप दोनों का वीडियो बना लिया | उनकी ये सुन कर गांड फट गयी | वो बोलने लगी क्या बकवास कर रहा है तू मैंने कुछ नहीं किया समझा |

फिर मैंने कहा कि अरे आंटी चुदाई करते हो तो बोल दो न डरते क्यू हो ? वो कुछ नहीं बोली तो मैंने उन्हें वीडियो दिखा दिया | वो पसीना पसीना हो गयी | फिर उन्होंने कहा कि तू चाहता क्या है ? तो मैंने कहा कि देखो आंटी तुम तो दूसरो से अपनी चूत कि मरम्मत करवा लेती हो | मेरे लंड का भी स्वाद चख लो | ये सुन के उन्होंने कहा कि बेटा तू अभी बच्चा है कितना बड़ा है तेरा लंड जो तू मुझे चोदेगा ? अरे आंटी जिस दिन मेरा लंड लोगी ना तो और किसी का लंड लेने में मजा नही आयगी | तब उन्होंने बोली बहुत बोल रहा है चल आज आना तू शाम को 4 बजे | मैंने भी कह दिया ठीक है आ जाऊंगा | उसके बाद हम अलग अलग अपने घर चले गये |

मैं शाम को 4 बजे आंटी के घर गया और दरवाजा खटखटाया | उन्होंने दरवाजा खोला और अन्दर आने को कहा | मैं अन्दर गया तो उन्होंने तुरंत दरवाजे की कुंडी लगा ली | मैंने कहा हाँ आंटी कहाँ चुदना चाहोगी ? तो उसने कहा कि तू पहले अपना लंड दिखा जो तू खूब पकर पकर कर रहा था | मैंने कहा ओके और अपना जीन्स उतारा और फिर अंडरवियर भी | मेरा लंड सोये हुए भी 4 इंच का था | ये देख कर वो बोल पड़ी तेरा लंड तो सच में अच्छा है कितना लम्बा लंड है तेरा तो मैंने कहा इसको खड़ा कर खुद समझ जायगी ( मेरी बात करने की टोन बदल चुकी थी ) |

वो मेरे पास आई तब मैंने अपनी टी-शर्ट भी उतार दिया | अब वो मेरे लंड को पकड के हिलाने लगी | मुझे बहुत अच्छा लग रहा था उसका टच करना | जब मेरा लंड खड़ा हो गया तो वो अपनी जीभ से चाटने लगी और मैं आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ की आवाज़े निकालने लगा | वो मेरे लंड को किस करते हुए अपनी जीभ से चाटने लगी तो मैंने भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए उसके दूध दबाने लगा कपड़ो के ऊपर से ही |

मेरे लंड को चाटने के बाद उसने मेरे लंड को अपने मुंह डाल लिया और चूसने लगी तो मेरे मुंह से आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ की सिस्कारिया निकलने लगी | वो मेरे लंड को बहुत मन लगा कर चूसने लगी तो मैंने पूछा कि कैसा है मेरा लंड तो उसने कहा कि तेरा लंड तो मस्त है ऐसा लग रहा है कि इसको अपनी चूत में डाले रहू और कभी ना निकालू |

Antaravasna नौकरानी की बेटी को चोदा

फिर वो चूसने लगी मेरे लंड को | उसके बाद उसने अपने कपडे उतारने चालू कर दिया | मै बड़े ध्यान से देख रहा था | खेर मैं तो वैसे भी उसे नंगा देख चुका था इसलिए मेरे लिए कोई नयी बात नहीं थी उसको नंगा देखना | जब वो नंगी हो गयी तो मैंने उसके होंठ में अपने होंठ रख दिया और चूमने लगा | वो भी मुझे चूम रही थी और मेरे लंड को हाँथ से पकड के हिला रही थी | कुछ देर किस करने के बाद मैं उसके दूध को दोनों हाँथ से पकड़ के दबाने लगा तो वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करने लगी | अब मैंने उसके दूध को दबाते हुए चूसने लगा तो वो आँखे बंद कर के आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करने लगी |

मैं समझ गया था कि इसको अच्छा लगने लगा है | तो मैं अब जोर जोर से उसके दूध को दबाने और चूसने लगा तो वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए मेरे सिर को सहलाने लगी | कुछ देर उसके दूध पीने के बाद मैंने उसे लेटा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा तो वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए कह रही थी कि और चाटो मेरी चूत को |

मैं उसकी चूत की अपनी जीभ से चुदाई भी कर रहा था और चटाई भी और वो बस आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ बेचैन हो रही थी मेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए | उसके बाद मैंने अपने लंड को धीरे धीरे अन्दर डालते हुए उसकी चूत में पूरा घुसेड दिया | अब मैं उसकी चूत को चोदने लगा जोर जोर से और वो भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए अपने दूध को मसलने लगी |

मैं उसकी चूत की जोर जोर से चुदाई करते हुए उसके दूध को दबाने लगा तो वो भी आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ मेरे सीने पर हाँथ फेरते हुए सहलाने लगी | उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड डाल के चोदने लगा और वो आआहाआ ऊऊन्न्ह ऊऊम्म्ह ऊउम्म ऊउन्न्ह अहहाआअहाअ अहहहा हहहाआअ अहहहाआ ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह ऊनंह ऊउम्म्म्ह अहहहाआआअ आहाआआउन्ह ऊउन्न्ह ऊउम्म्ह आहा आआआहा ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह आअहाआअ करते हुए अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए चुदवाने लगी | कुछ देर चुदाई करने के बाद मैंने अपनी धात उसके मुंह में गिरा दिया और उसने पी लिया |

मैंने उसे तबियत से खूब चोदा था | वो अब सिर्फ मेरे ही लंड से चुदती है और किसी के लंड को उसको पसंद नहीं आते है | जब भी उसको चुदाई का मन होता है तो वो छत से इशारे कर देती है | दोस्तों, ये थी मेरी एक सच्ची दास्ताँ | आशा है आप लोगों को पसंद आई होगी | कमेंट करके अपने अपने विचार जरुर व्यक्त कीजियेगा |

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मोहिनी की स्कूल में चुदाई https://sexstories.one/mohini-ki-school-me-chudai/ Mon, 04 Oct 2021 07:53:10 +0000 https://sexstories.one/?p=4429 फिर सर ने मेरी पैंटी उतर दी। मेरी चुत से पानी आ रहा था। मैं जाने के करन खादी भी नहीं हो पा रही थी। फ़िर उन्होन मेरा ब्लाउज़ खोला। और मेरे बड़े बड़े बूब्स सर के सामने आ गए थे। सर उन्हे देख कर फर्ले से ज्यादा उत्तेजित हो गए और अब उन से रहा नहीं जा रहा था।

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School me chudai ki anokhi story padhiye antarvasna sex website par. Hello mera naam Mohini hai. Mera figure 36-26-36 hai aur age 39 saal hai, jese mujhe dekh kar kisi ka bhi lund turant hi khada ho jata. Mujhe har koi apni hawas ka shikaar banana chahata hai. Mujhe bhi badi body (body builder) wale mard bohut pasand hai, main unhe dekh kar turant hi lar tapkane lagti hoon.

Mere ek pati hai jinka naam raj hai. Unki age 47 age hai. Vo mujhe bistar par santusht nhi kar pate hai. Vo mujhe aksar hi garm karke chod dete hai jisse meri sex ki bhookh badti hi jaa rahi hai. Sath hi vo berojgar hai jesse ki mujhe hi school mein teacher ki job karni padhti rahi hai. Mere 2 bacche bhi hai.

Main ek school mein teacher hoon, jaha mujhe saree phen ke jana hota hai aur main akasar bade blouse aur transparent saree phen kar jati hoon Jesse ki school ke ladke aur male teachers mujhe har apni hawas mein khoo jate hai. Kai baar ladke mujhe dekh kar apna lund tak sehlane lagte hai.

Male(purus) teacher aur humare principal sir mere sath bohut masti karte hai. Kabhi mere kamar pakad lete toh kabhi meri gand pe maar ke hasne lagte hai, main bhi yeh sub majak mein leti hoon. Aur main yah bhi janti hoon ki yeh sub mere sath apna bistar garm krana chahate hai.

Ek baar mujhe paiso ki zarurat thi. Toh maine school khatm hone ke baad principal sir se baat karne unke cabin mein gai.

Sir mein baithne ke liye bola

Fir sir ne unka hath mein pen liya aur fir usko janbujh kar neche gira diya aur mujhe uthne bola, jese hi main neche jhuki toh meri saree ka pallu neche ho gaya aur vo mere boobs ke taraf dekhne lage. Fir maine sir ko bola ki mujhe paiso ki bohut jarurat hai toh toh unhone kaha ki abhi toh mushkil hai, par main aapki help kar sakta hoon lekin aapko bhi kuch karna hoga mere liye. Main sir ka ishara samjh gai thi. Sir dekhne mein toh average se aadmi hi the but ab jarurat inshan ko majbur bana deti hai. Aur main fir phucha kya sir, toh sir ne bola aapko mujhe santusht karna hoga.

Main mann gai, sir bola aap fresh ho kar aa jao, main fresh hone gai is doran sir ne apna mobile ka camera chalu karke upper rakh diya taki vo video bana sake.

Sir ke saath school me chudai karne wali thi main…

Fir jab main aai toh sir ne bola aao Mohini meri jaan meri godh mein baith jao. Main sir ki godh mein baith gai. Mujhe sir ka lund apni gand par mehsus ho raha tha. Fir sir ne apna ek hath mere boobs par rakh diya aur usko zor zor se dabane lage. Mere muh se siskiyan nikal rahi thi Aaaaaaa aaa aaram se sir. Fir sir ne ek dusre hath se mere baal pakad liye aur kiss karne lage. Aur mujhe bohut deep kiss kiya. Mujhe chut puri taraf se gili ho gai thi.

Fir sir mujhe unki godh se uthaya aur mere saaree kholne lage. Main sharm se lal ho rahi thi. Fir sir ne meri puri saare utar di, main ab sirf blouse aur paticot par thi. Fir sir ne mere blouse mein sir ne apna hath dala aur aur unke taraf kicha. Main unse chipak gai thi, aur aur unhone meri kamar pakad li aur kiss karne lage. Main bhi sir ka pura sath de rahi thi. Meri chut se bohut sara pani aa raha tha. Tabhi sir ne unka mera peticot ka nada khol diya aur fir mera blouse ka hook khol diya.

Ab main ek gir mard ke samne red panty aur red bra mein khadi thi. Sir ne bola randi tumne toh apni panty gili kar li, tujh mein toh bohut hawas hai aaja teri pyaas bhujha deta hoon. Aur yeh bol kar vo meri taraf aaye aur meri panty mein hath daal diye aur meri chut mein sir ne apni ungli daal di aur zor zor se unki fingers ko meri chut mein hilane lage aur main siskiya lene lagi aaaa aaaa uiii aaaa aa.

Antarvasna sex school me chudai ki stories

Jis se ki main aur garam ho rahi thi. Aur fir hone mujhe kiss kiya aur 5 minute baad hi main sir ke hath se jhad gai.

Fir sir ne meri panty utar di. Meri chut se pani aa raha tha. Main jadne ke karan khadi bhi nhi ho paa rahi thi. Fir unhone mera blouse khola. Aur mere bade bade boobs sir ke samne aa gaye the. Sir unhe dekh kar phrle se zyada uttejit ho gaye the aur ab un se raha nhi jaa raha tha. Sir turant unke kapde khol diya aur fir sir ne apna lund bahar nikala. Sir ka lund bohut bada tha jese dekha kar main lar tapkane lagi aur madhos si hone lagi ki, aaj itna bada meri chudai karega.

Fir sir ne bola ki neche baitho, aur main jese hi neche baithi toh main maine dekha ki sir ka lund bohut hi ganda ho raha tha. Us par sir ka phele cum lga utha tha aur badboo aa rahi thi. Maine bola main isko ander nhi lungi, aur tabhi sir ne mera muh unke hath se khol diya aur pura lund mere muh mein bhar diya. Vo mere gale tak aa gaya tha. Aur fir honr aage pheche karna suru kiya. Aur mujhe toh thik se saas bhi nhi lete ban rahi thi. Fir kuch der baad sir ne unka lund mere muh se nikala, unka pura lund meri lar se gila ho gaya tha. Fir sir ne us gile lund ko mere muh par rub kiya. Main sub ko chup chap seh rahi thi.

Kahani padhna na bhulein – माँ को बरसात में चोदा

Fir unhone mujhe nevhe leta diya aur vo ab mere aa gaye the. Fir unhone unke lund ko meri chut par set kiya aur pir mere boobs ko chusne lage. Jiske karan maim siskiyaan bharne lagi. Mere muh se awaj aaaa aaaa aaaaaa ki chike nikal rahi rahi. Tabhi sir ne unka lund ek hi baar mein meri chut mein daal diya. Aur zor zor se mujhe chodne lage. Vo mujhe bilkul beh rehmi se chod rahe the.Mere muh se aaaaaa aaaaaa ki awaj nikal rahi thi. Aur yeh awaj unko aur uttejit kar rahi thi.

Kareeb 30 min baad sir aur main apne charam sima par aa chuke the, ab na sir se rah jaa raha tha na mujhe aur sir ne apni chodne ki speed badai aur hum dono ne sath charamsukh liya.
Sir ne apna sara garam maal meri chut mein daal diya. Mujhe bhi bilkul hos nhi tha.

School me chut chudai ki mast kahaniyan padhie free mein

Aaj main puri santusht thi. Fir sir ne wapas unka lund mere mein muh mein daal diya aur bola ki randi chal ab usko saaf kar. Aur main sir ka lund apni jeeb se chat chat kar saaf kiya.

Fir sir ne mujhe 10000 de diye. Fir jab maine kapde phene aur sir ko bola ki ab main jati hoon sir, tabhi sir ne muskurate hue bola Mohini jane se phele tumara video toh dekh lo, aur tabhi unhone apna mobile nikala aur mujhe dekhaya ki unhone meri chudai pura video bana liya hai. Aur mujhe bola ki mohini aaj se tum meri rand ho gai ho. Yeh 10000 mein maine tumne Zindagi bhar ke liye khareeda liya. Ab main tumko apni raad bana ke rakhunga.

Abhi yeh toh bas suru waat hai aage aage toh aur bhi bohut kuch hoga.

Aaj ke itna hi…..

Your mohini

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एक देसी मां की सच्ची कहानी https://sexstories.one/desi-maa-ki-interfaith-xxx-chudai/ Tue, 07 Sep 2021 07:49:27 +0000 https://sexstories.one/?p=4255 सभी को नमस्कार मेरा नाम अनिरुद्ध नायर है और यह मेरी कहानी नहीं है, बल्कि यह एक सच्ची कहानी है जिसे कोई बेहतर नहीं बता सकता है और यह एक ऐसी कहानी है जिसे बताने ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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सभी को नमस्कार मेरा नाम अनिरुद्ध नायर है और यह मेरी कहानी नहीं है, बल्कि यह एक सच्ची कहानी है जिसे कोई बेहतर नहीं बता सकता है और यह एक ऐसी कहानी है जिसे बताने की जरूरत है। यह कहानी एक घटना के इर्द-गिर्द घूमती है, जो 2008 में हुई थी और मैं उस साल सिर्फ 18 साल की थी और अपनी 12वीं कक्षा में थी। मैं अपने माता-पिता और एक छोटे भाई के साथ मुंबई के बोरीवली में रहता था जो मुझसे 8 साल छोटा है। desi interfaith xxx stories

हम एक हाउसिंग कॉलोनी में 1 बीएचके अपार्टमेंट में रहते थे। मेरे माता-पिता और मेरा छोटा भाई बेडरूम में सोते थे जबकि मैं हॉल में गद्दा लगाकर जमीन पर सोता था। मेरे पिता मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक में भौतिकी के प्रोफेसर थे और मेरी माँ ने एक बैंक में क्लर्क के रूप में काम किया था।

मेरे पिता का नाम विष्णु नायर है, वे एक योग्य इंजीनियर हैं और उन्होंने एम.टेक पूरा करने के बाद मेरी माँ से शादी की और उन्होंने अरेंज मैरिज की और 1988 में शादी कर ली, उन्होंने 1991 में मुझसे शादी की और 2000 में मेरा छोटा भाई अभिषेक हुआ। नाम प्रतिभा है और वह केरल के कालीकट में पैदा हुई और पली-बढ़ी। उसने केरल में ही मलयालम माध्यम में अपनी 12 वीं कक्षा की परीक्षा पूरी की और बैंक में नौकरी कर ली। 24 साल की उम्र में ही मेरे पिता से शादी कर ली।

अब मैं आप सभी को अपने बारे में कुछ बता दूं। आप में से अधिकांश लोगों की तरह और मैंने भी बहुत कम उम्र में पोर्न देखना शुरू कर दिया था। मैं अपने सीनियर बैच की लड़कियों के बारे में सोचकर स्कूल में हस्तमैथुन करता था।

मैंने नेट पर सर्फिंग और अमेरिकी किशोर पोर्न मॉडल आदि की तस्वीरों पर हस्तमैथुन करने में बहुत समय बिताया। मैं अपने तरीकों से बेहद दृश्यरतिक था और दृश्यरतिक चित्रों को क्लिक करने और साझा करने और ऑनलाइन भूमिका निभाने में बहुत समय बिताया। मैंने बहुत सारे ऑनलाइन चैट मित्र बनाए थे, उनमें से ज्यादातर मेरे जैसे साथी सींग वाले पुरुष थे और हम केवल अपनी कल्पनाओं को साझा करते थे, कभी-कभी उनमें से कुछ जो भाग्यशाली होते थे, वे अपने प्यार करने वाले सत्र की तस्वीरें और वीडियो साझा करते थे।

Interfaith xxx kahani – पति के पास चोदने का वक्त ही नहीं था

और मैं उस पर काम करूंगा और मैं बेहद सींग का बना हुआ था और मैंने वह सब कुछ किया जो मेरे चैट दोस्तों ने मुझसे करने के लिए कहा था, जिसमें उनकी मां और बहनों की तस्वीरें संपादित करना शामिल था क्योंकि मैं फोटो शॉप में अच्छा था। मैंने अपने ऑनलाइन दोस्तों के साथ इतना विश्वास बनाया था कि वे अपनी मां, चाची, बहनों, शिक्षकों की तस्वीरें मेरे साथ साझा करेंगे और मुझे किसी भी वयस्क साइट पर साझा किए बिना इसे उनके लिए मॉर्फ करने के लिए कहेंगे और मैं हमेशा उनका पालन करूंगा दिशानिर्देश।

मैं ऑनलाइन बहुत समय बिताता था और विभिन्न लोगों से कम से कम पांच मित्र अनुरोध प्राप्त करता था, उनमें से अधिकतर अनाचार प्रेमी थे जो मेरे पास ऑनलाइन विभिन्न दृश्यरतिक और सेलिब्रिटी नकली धागे देखते थे। मैं बहुत सावधान था कि मैं उनमें से किसी के साथ अपने व्यक्तिगत विवरण साझा न करूं, हालांकि लंबे समय से मेरे हुसैन के ऑनलाइन मित्र ने मेरे निजी जीवन के बारे में मेरी जांच की।

मैं हुसैन को लगभग एक साल से जानता था और मैं उनसे व्यक्तिगत रूप से कभी नहीं मिला था, लेकिन उनके साथ ऑनलाइन चैट करने में बहुत समय बिताया। वह एक अनाचार प्रेमी था और अक्सर अपनी मां राफिया के बारे में कल्पनाएं साझा करता था। वह मुझे विभिन्न पुरुषों के साथ विभिन्न सेक्स पोजीशन में मॉर्फ करने के लिए अपनी मां की तस्वीरें भेजता था। वह उन कुछ लोगों में से एक थे जिनके साथ मेरे अच्छे संबंध थे।

हालाँकि, उस दिन जब हुसैन ने मुझसे मेरे जीवन के बारे में पूछताछ की, तो मुझमें कुछ बदल गया।

यह थी हमारी बातचीत:

Sexyboy hussain: यार, तुम मुझसे हमेशा मेरी माँ के बारे में पूछते हो, तुम मुझे अपनी माँ के बारे में क्यों नहीं बताते कि क्या वह बड़ी है? उसकी ब्रा का आकार क्या है? क्या आपने उसे अपने पिता के अलावा किसी के द्वारा चोदते हुए देखा है? मुझे उसकी तस्वीर दिखाओ यार। मैंने तुरंत लॉग आउट किया और हुसैन को अपनी मित्र सूची से हटा दिया लेकिन उस दिन मेरे साथ कुछ अटक गया।

मैं उन सवालों में से किसी के लिए जवाब नहीं था, मुझे नहीं पता था कि मेरी माँ की ब्रा आकार था, मैं भी उसके अपने पिता द्वारा चूमा जा रहा है, एक दूर का सपना देख रहा है उसे एक और आदमी द्वारा गड़बड़ हो रही किया गया था नहीं देखा है। मैंने अपनी माँ को कभी भी एक कामोत्तेजक वस्तु के रूप में नहीं देखा था, और न ही उसके लिए कभी कोई यौन भावनाएँ रखी थीं। हो सकता है कि मैं इसके बारे में सोचने से भी डर गया था, लेकिन उस रात मेरे अंदर कुछ बदल गया क्योंकि मैं अपने गद्दे पर छत की तरफ देख रहा था।

मेरे दिमाग में मेरी मां प्रतिभा के चित्र चल रहे थे। प्रतिभा नायर 42 साल की थीं, दो मलयाली महिलाओं की मां, जो विष्णु नायर से शादी करने के बाद मुंबई चली गईं। वह एक बैंक में १५ साल से अधिक समय से काम कर रही थी, उसका बड़ा बेटा मैं १२वीं कक्षा में विज्ञान की पढ़ाई कर रहा था, जबकि उसका छोटा बेटा चौथी कक्षा में था।

प्रतिभा अपने दो बच्चों की देखभाल करने वाली माँ और अपने प्रोफेसर पति की देखभाल करने वाली पत्नी थी। प्रतिभा एक ठेठ दक्षिण भारतीय महिला थी, वह घर पर मलयालम बोलती थी, शुरुआत में उसकी हिंदी बहुत खराब थी, लेकिन बाद में मुंबई में रहने के बाद बेहतर हो गई, हालांकि उसका उच्चारण सस्ता था, वह औसत अंग्रेजी बोलती थी लेकिन वह अपने दोनों से मेल नहीं खाती थी। इस विभाग में बच्चे और पति भले ही वह एक कामकाजी महिला थीं।

वह घर के सारे काम करती थी, हालाँकि उसके पास कपड़े धोने के लिए कपड़े धोने की मशीन थी। प्रतिभा पिछले 15 वर्षों से बॉम्बे लोकल ट्रेन में काम कर रही थी, पिछले कुछ वर्षों में उसने कुछ दोस्त बनाए जो उसके साथ महिला विशेष में नियमित थे, इसके अलावा कार्यालय में उसकी कुछ महिला मित्र थीं। उनका जीवन पूरी तरह से उनके परिवार के इर्द-गिर्द घूमता था। यहां अजीब शादी में शिरकत करने के अलावा उनका ज्यादा सामाजिक जीवन नहीं था। और वहाँ जैसे ही मेरे दिमाग में छवियां दौड़ीं, मैंने देखा कि मैंने एक हड्डी विकसित कर ली है। मैं अपराध बोध और शर्म से भस्म हो गया था, लेकिन मैंने जाने देने का फैसला किया।

मैं अपनी माँ से प्यार करता था, लेकिन मुझे यकीन था कि बाकी सभी ने भी किया, यहाँ तक कि जिसने अपनी माँ के बारे में नेट पर कहानियाँ लिखीं और जिन्होंने मेरे साथ अपनी तस्वीरें साझा कीं। मैंने अपनी मां को एक महिला के रूप में देखने का फैसला किया, न कि केवल अपनी मां के रूप में।

Bangla Choti Stories – অন্ধকারে শ্বশুরের চোদা খাওয়া

मैं अपने गद्दे से उठा और अपने माता-पिता के बेडरूम से जुड़े बाथरूम में चला गया। वे तीनों गहरी नींद में थे, मैंने लाइट ऑन की और देखा कि मेरी माँ का इस्तेमाल किया हुआ अंडरवियर और ब्रा उसकी नाइटी के नीचे पड़ी थी, जो धोने के लिए रखी गई थी। मैंने अपने मुक्केबाजों को नीचे खींच लिया और मुझे मुर्गा बाहर जाने दिया, मैंने माँ की ब्रा अपने हाथ में ली और प्याले को मेरे डिक से रगड़ना शुरू कर दिया, मैंने उसका भूरा गंदा अंडरवियर लिया और उसे सूँघना शुरू कर दिया।

मेरी माँ ने 36 सी ब्रा पहनी थी, जैसे ही मैंने अपने डिक को उसकी ब्रा के खिलाफ रगड़ा, मैं उसके अंडरवियर के माध्यम से उसकी योनि की गंध को सूंघ सकता था, एक अजीब तरह का करंट मेरे अंदर से बह गया। मैं उसके ब्रा कप में आया और यह सोचने के लिए बैठ गया कि पिछले २० मिनट में क्या हुआ था जब मैंने पहली बार अपनी माँ को एक महिला के रूप में सोचा था, और मैं हैरान था कि मेरी कल्पनाएँ मुझे कहाँ ले जा सकती हैं।

मेरी माँ एक बहुत ही सुंदर मलयाली ब्राह्मण थीं, उनका रंग दूधिया सफेद था, और कूल्हों तक लंबे काले बाल थे। वह लगभग 5 फीट 2 इंच लंबी थी और मोटे दक्षिण भारतीयों की तरह थोड़ी भारी थी। उसने बहुत ही मध्यम कपड़े पहने और फैशन की एक बहुत ही रूढ़िवादी समझ थी, जो अन्य कारणों में से एक है, शायद मैंने उसे कभी इस तरह से क्यों नहीं देखा, वह बाहर और सेक्सी नहीं थी, लेकिन वह सेक्सी हो सकती थी यदि आप उसे अतीत में देख सकते थे सलवार कमीज.

वह आमतौर पर काम करने के लिए पहनती थी, या उसकी सुस्त रातें जो उसने घर पर पहनी थीं। वह पूजा, शादी या किसी त्योहार जैसे खास मौकों पर साड़ी पहनती थीं। वह साड़ियों में तेजस्वी दिखती थी, हालाँकि उसने वास्तव में बहुत अधिक त्वचा नहीं दिखाई थी, उसकी पीठ की त्वचा और छोटी पेट की त्वचा आपको उसके बारे में कल्पना करने के लिए पर्याप्त थी। यह सोचना असंभव था कि मेरी मां ने यौन संबंध बनाए हैं या इसके करीब किसी भी चीज में लिप्त हैं, वह बेहद धार्मिक और बहुत रूढ़िवादी थीं।

वह अन्य पुरुषों से बात करने में अजीब महसूस करती थी, और मेरे या उसकी कुछ महिला मित्रों की कंपनी के बिना अन्य पुरुषों के आसपास रहने से बचती थी। जब घर पर कोई नहीं होता तो वह प्लम्बर को घर में घुसने देने से भी डर जाती थी, इसलिए मेरे लिए वास्तव में मेरी माँ को चोदना असंभव था। मुझमें अपनी मां से संपर्क करने या उनके प्रति कोई भी कदम उठाने की हिम्मत नहीं थी, खासकर तब नहीं जब पिताजी आधे समय घर पर हों।

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पति के पास चोदने का वक्त ही नहीं था https://sexstories.one/gair-mard-se-chudai-karwai/ Mon, 06 Sep 2021 09:42:43 +0000 https://sexstories.one/?p=4247 रजत अपने ऑफिस के काम से कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर जा रहे थे तो मैंने रजत को कहा कि मुझे कुछ पैसे चाहिए थे रजत ने मुझे कहा कि ठीक है मैं ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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रजत अपने ऑफिस के काम से कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर जा रहे थे तो मैंने रजत को कहा कि मुझे कुछ पैसे चाहिए थे रजत ने मुझे कहा कि ठीक है मैं कल तुम्हें जाने से पहले पैसे दे दूंगा। अगले दिन सुबह जब रजत गए तो उन्होंने मुझे जाने से पहले पैसे दे दिए थे रजत और मेरी शादी को 10 वर्ष हो चुके हैं रजत और मेरा शादीशुदा जीवन अच्छे से चल रहा है। रजत ने हमेशा ही मुझे खुश रखने की कोशिश की है उन्होंने मुझे कभी किसी चीज की कोई कमी महसूस नहीं होने दी रजत और मैं एक दूसरे से जब भी बात करते हैं तो हमें बहुत ही अच्छा लगता। रजत कुछ दिनों के लिए घर से बाहर थे इसलिए मैं अपने आपको काफी अकेला महसूस कर रही थी वह अक्सर अपने काम के सिलसिले में बाहर जाते रहते थे। मैंने उस दिन सोचा कि मैं क्यों ना अपनी दोस्त सुमन के घर चली जाऊं और फिर मैं अपनी सहेली सुमन से मिलने के लिए चली गई। सुमन हमारे घर के पास ही रहती है और काफी दिनों बाद मैं सुमन से मिलने के लिए गई थी।

उस वक्त करीब 11:00 बज रहे थे मैं अपने घर का सारा काम कर के सुमन से मिलने के लिए गई और जब मैं सुमन के घर पहुंची तो सुमन घर पर ही थी सुमन ने मुझे देखते ही कहा कि राधिका तुम कितने दिनों बाद मुझसे मिलने के लिए आ रही हो। मैंने सुमन को कहा कि हां सुमन मैं तुमसे काफी दिनों बाद मिल रही हूं। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे कि तभी मैंने देखा कि सुमन के घर पर कोई मेहमान भी आए हुए थे सुमन ने मुझे बताया कि वह उसके चाचा जी हैं सुमन ने मुझे अपने चाचा जी से मिलवाया। थोड़ी देर हम उनके साथ ही बैठे रहे और सुमन रसोई में चाय बनाने के लिए चली गई थी। सुमन चाय लेकर आई और हम लोग साथ में बैठे हुए थे तो सुमन के चाचा जी भी अब चाय पीकर रूम में चले गए। सुमन ने मुझे बताया कि उसके चचेरे भाई का सिलेक्शन हुआ है और वह कुछ दिनों के लिए हमारे साथ ही रहने वाला है लेकिन उस वक्त वह घर पर नहीं था क्योंकि वह अपने ऑफिस गया हुआ था।

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सुमन ने मुझे बताया कि उसके चाचा जी कल रोहतक चले जाएंगे सुमन और मैं काफी देर तक साथ में बैठे रहे करीब दोपहर के 1:00 बज रहे थे तो मैंने सुमन से कहा कि मैं अब चलती हूं और मैं अपने घर चली आई। मैं जब घर आई तो उस वक्त मुझे रजत का फोन आया और रजत के साथ मैं फोन पर बात करने लगी रजत के साथ मैंने फोन पर काफी देर तक बात की। मैंने रजत से कहा कि आप वापस कब लौट रहे हैं तो उन्होंने कहा कि मैं बस दो दिनों बाद वापस लौट आऊंगा। उसके बाद मैं भी खाना बनाने की तैयारी करने लगी थी क्योंकि बच्चे भी थोड़ी देर बाद स्कूल से आने वाले थे। मैंने खाना बनाया ही था कि बच्चे भी घर पहुंच चुके थे बच्चे घर पहुंचते ही शरारत करने लगे मेरी सासू मां मुझे आवाज देते हुए कहने लगी कि राधिका बेटा जरा इन बच्चों को देखना। वह मेरी सासू मां को काफी ज्यादा परेशान कर रहे थे इसलिए मैं उन्हें उनके कमरे से बाहर ले आई और फिर उन्हें मैंने खाना खिलाया।

खाना खाने के बाद वह लोग कुछ देर आराम करने लगे फिर शाम के वक्त मैं उन्हें छोड़ने के लिए ट्यूशन चली गई मेरे दोनों ही बच्चे पड़ोस में ट्यूशन पढ़ने के लिए जाते हैं। मैं उन्हें लेने के लिए करीब 6:00 बजे गई, जब मैं उन्हें लेकर घर आ रही थी तो सुमन से मैंने कुछ देर बात की और फिर मैं अपने घर लौट आई। रजत भी दो दिन बाद वापस लौट आए थे रजत उस दिन घर पर ही थे तो मैंने रजत को कहा कि क्या आज आप ऑफिस नहीं जा रहे हैं तो रजत ने मुझे बताया कि नहीं आज वह ऑफिस नहीं जा रहे हैं। मैं और रजत एक दूसरे से बात कर रहे थे तो रजत ने मुझे कहा कि राधिका तुम मेरे लिए चाय बना देना मैंने रजत के लिए चाय बनाई। रजत अखबार पढ़ने में इतने व्यस्त थे कि वह मेरी तरफ देख ही नहीं रहे थे और उन्होंने जब अखबार पढ़ कर एक किनारे रखा तो मैंने रजत को कहा कि क्या आज हम लोग साथ में समय बिता सकते हैं? रजत कहने लगे क्यों नहीं। काफी समय बाद रजत मुझे और बच्चों को शॉपिंग कराने के लिए ले गए थे मुझे याद है करीब 6 महीने पहले हम लोग साथ में शॉपिंग करने के लिए गए थे।

उस दिन जब हम लोग साथ में थे तो हमें काफी अच्छा लगा बच्चे भी काफी खुश थे और जब हम लोग घर लौटे तो उस वक्त शाम हो चुकी थी शाम के करीब 7:00 बज रहे थे और हम लोग घर लौट आये थे। मैं रसोई में खाना बनाने की तैयारी करने लगी थी मैं खाना बनाकर करीब एक घंटे बाद फ्री हुई और 9:00 बजे के आसपास हम लोगों ने डिनर कर लिया था हम लोगों ने डिनर किया। रजत कहने लगे कि राधिका मुझे कल जल्दी ऑफिस जाना है मैंने रजत को कहा कि कल आप कितने बजे तक हो ऑफिस जाएंगे तो रजत कहने लगे कि मैं कल सुबह 8:00 बजे ही घर से निकल जाऊंगा। मैंने रजत से कहा ठीक है मैं आपके लिए सुबह नाश्ता बना दूंगी और अब रजत और मैं सो चुके थे। उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी और मेरे अंदर एक अलग ही बेचैनी सी हो रही थी। मैंने रजत को कहा कि मुझे आज आपके साथ सेक्स करना है तो रजत मुझे कहने लगे राधिका आज मेरा बिल्कुल भी मन नहीं है मैं तुम्हारे साथ सेक्स नहीं कर सकता। उस रात रजत ने मेरी तड़प अधूरा ही रखी जो कि मैं अगले दिन पूरा करवाने के लिए सुमन के घर चली गई। जब मैं सुमन के घर पर गई तो मैंने देखा कि उस दिन उसका चचेरा भाई संजय भी घर पर ही था संजय से मैं पहली बार ही मिली थी मुझे नहीं पता था कि संजय से मैं अपनी चूत की खुजली को मिटा दूंगी।

संजय को मैंने अपने बदन के मायाजाल में पूरी तरीके से फंसा लिया था और संजय मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुका था। मैंने उसे उस दिन अपने घर पर बुलाया वह भी घर पर आ गया वह घर पर आया तो संजय के लंड को मैं अपनी चूत में लेना चाहती थी मेरी सासू मां अपने कमरे में सो रही थी अब संजय और मैं ही मेरे रूम में थे हम दोनों बेडरूम में थे। मैंने संजय से कहा तुम अपने लंड को तो दिखाओ संजय ने मुझे अपने लंड को दिखाया। संजय का मोटा लंड देखते ही तुरंत उसे अपने हाथ में ले लिया जब मैंने उसे अपने हाथों में लेकर हिलाना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। मैं संजय के लंड को बड़े अच्छे तरीके से अपने हाथों में लेकर हिला रही थी और मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था लेकिन अब मेरे अंदर की गर्मी बढ़ चुकी थी। मैंने उसके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और उसे तब तक मैं चूसती रही जब तक संजय के लंड से मैंने पानी बाहर नहीं निकाल दिया। संजय पूरी तरीके से तड़पने लगा था और उसकी तड़प को मैंने इतना अधिक बढ़ा दिया था कि वह जल्दी से मेरी चूत मारने के लिए तैयार हो चुका था।

मैंने भी अपने बदन से कपड़े उतार दिए और जब मैंने अपने बदन के कपड़े उतारे तो उसने मेरी तरफ देखा और कहने लगा मैं आपकी चूत मारने के लिए तैयार हूं। मेरी चूत भी उसके मोटे लंड को लेने के लिए बेताब हो रही थी मैंने उसके सामने अपने पैरों को चौड़ा कर लिया जब उसने मेरी चूत की तरफ देखा तो उसने मेरी चूत के अंदर अपनी उंगली को घुसाया और काफी देर तक उसे वह अंदर बाहर करता रहा उसकी उंगली जब मेरी चूत के अंदर जा रही थी तो मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कि किसी का मोटा लंड मेरी चूत में जा रहा हो। उसने जब मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया तो मुझे और भी अधिक मज़ा आने लगा मुझे इतना अधिक मज़ा आने लगा था कि मैं उसके मोटे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए बड़ी बेताब थी।

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उसने भी मेरी चूत पर अपने लंड को सटाया और धीरे धीरे अंदर की तरफ डलाना शुरू किया जैसे ही उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर घुसा तो मुझे बहुत ही मजा आया मैंने अपनी चूतडो को थोड़ा सा ऊपर उठाया तो उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर तक चला गया था अब मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था। वह मुझे बड़ी तीव्रता से चोद रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि उसका मोटा लंड मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा। यह पहला ही मौका था जब मैंने किसी गैर पुरुष के साथ संभोग किया था इससे पहले रजत ने ही मेरी चूत मारी थी और रजत ने ही मेरी इच्छा को पूरा किया था लेकिन अब मुझे संजय के साथ अपनी चूत मरवाने में मजा आ रहा था। संजय जिस प्रकार से मुझे धक्के देता उस से मेरी गर्मी में भी बढ़ोतरी होती जा रही थी और मेरी सिसकारी इतनी अधिक बढ़ने लगी थी कि संजय कहने लगा कि कहीं आपकी सासू मां ना सुन ले।

मैंने उसे कहा कोई बात नहीं तुम मुझे धक्के देते रहो। अब वह लगातार मुझे बड़े अच्छे से चोद रहा था और काफी देर तक उसने मेरी चूत का आनंद लिया लेकिन जब मुझे एहसास होने लगा कि मैं झड़ने वाली हूं तो मैंने उसे अपने दोनों पैरों के बीच में जकडना शुरू किया जब मैंने उसे अपने दोनों पैरों के बीच में जकड़ लिया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। अब मेरी चूत कुछ ज्यादा ही टाइट हो गई थी इसलिए वह मुझे कहने लगा आपकी चूत बहुत ही ज्यादा टाइट हो चुकी है। मैंने उसे कहा कि तुम अपने माल को मेरी चूत के अंदर ही गिरा दो तो उसने भी अपने माल को मेरी चूत के अंदर ही गिरा दिया। जब उसने अपने माल को गिराया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा उस दिन संजय से अपनी चूत मरवाकर मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी और वह भी बड़ा खुश था।

उसके बाद भी जब मेरा मन होता तो मैं उसे बुला लिया करती और वह मेरी इच्छा को पूरा कर दिया करता मेरे लिए तो बहुत ही अच्छी बात थी कि मै उसके साथ संभोग कर पाती थी क्योंकि रजत तो अक्सर अपने काम से थक जाते थे और उनके पास मुझे चोदने का वक्त ही नहीं होता था।

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भाभी और ननद की सेक्सी चुदाई https://sexstories.one/bhabhi-aur-nanad-ki-jordar-chodayi/ Fri, 03 Sep 2021 09:30:04 +0000 https://sexstories.one/?p=4223 मेरी उम्र छब्बीस साल है और मैं सरकारी दफ़्तर में ऑडिटिंग ऑफिसर हूँ और हमारे दफ़्तर की शाखायें पूरे देश में हैं और अक्सर मुझे काम के सिलसिले में दूसरे शहरों की शाखा*ओं में कुछ ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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मेरी उम्र छब्बीस साल है और मैं सरकारी दफ़्तर में ऑडिटिंग ऑफिसर हूँ और हमारे दफ़्तर की शाखायें पूरे देश में हैं और अक्सर मुझे काम के सिलसिले में दूसरे शहरों की शाखा*ओं में कुछ महीनों के लिये जाना पड़ता है। मैं शादीशुदा नहीं हूँ इसलिये मुझे इसमें को*ई दिक्कत नहीं होती है। अपनी पिछली कहानी में जैसे कि मैंने आपको बताया था कि कैसे लखन*ऊ पोस्टिंग के दौरान मैंने अपनी सहकर्मी रूबिना को चोदा।

इस बार दफ़्तर के काम से मेरी पोस्टिंग चंडीगढ़ हुई थी। वहाँ मैंने अपने सह-कर्मचारी की मदद से एक जगह पेइंग-गेस्ट के तौर पे कमरा किराये पर ले लिया। उस मकान में मकान मालिक रशीद अहमद थे जो कि चालीस वर्षीय थे और सेना में मेजर थे। फिलहाल वो एक महीने के लिये छुट्टी पर आये थे। उनकी बीवी नज़ीला करीब पैंतीस के ऊपर थीं और स्कूल में टीचर थीं। नज़ीला भाभी का जिस्म काफी मस्त और सुडौल था। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ और गोल-गोल चूतड़ थे। जब वो ऊँची हील के सैंडल पहन कर गाँड मटका कर चलती थी तो उन्हें देख कर किसी का भी लंड अपने आप खड़ा हो जाता था।

उनकी कोई औलाद नहीं थी। रशीद जी और नज़ीला भाभी दोनों बहुत मिलनसार थे और खुले विचारों वाले थे। मियाँ-बीवी में खूब जमती थी। वो लोग मुझसे घर के सदस्य की तरह ही बर्ताव करते थे, कभी मुझे पराया नहीं समझते थे। जब तक रशीद जी की छुट्टी रही हम दोनों हर शुक्रवार और शनिवार को जम कर पीते थे और नज़ीला भाभी भी हमारा साथ देती थी। उस वक्त उनकी अदा काफी सैक्सी और अलग लगती थी।

एक बार रशीद जी और नज़ीला भाभी सुबह सो रहे थे। मैंने नहा-धोकर सोचा की काम वाली नौकरानी तो आयी नहीं है और नज़ीला भाभी भी अभी उठी नहीं है तो चाय कौन पिलायेगा। इसलिये मैं खुद ही रसोई में केवल टॉवल लपेट कर चाय बनाने चला गया। जब चाय बन कर तैयार हो गयी तो देखा नज़ीला भाभी रसोई में खड़ी-खड़ी मुझे देख रही थी।

Antarvasna sex kahani – तमन्ना कॉलेज की

वो बोली, “दीनू! मुझे उठा लिया होता तो मैं ही चाय बना देती।”

मैंने कहा, “आप लोगों की नींद खराब ना हो इसलिये मैंने आप को नहीं जगाया और सोचा जब चाय बन जायेगी तो आप लोगों को जगा दुँगा।”

इतने में वो मेरे पास आकर खड़ी हो गयी। तब मैं चाय को छलनी से छान रहा था कि पता नहीं कैसे मेरा टॉवल खुल कर नीचे गिरा और मैं बिल्कुल नंगा हो गया क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं पहना था। मुझे नंगा देख कर वो अवाक रह गयी और सिर झुका कर खड़ी हो गयी। मैंने तुरंत चाय का बर्तन नीचे रखा और टॉवल उठा कर लपेट लिया। जब तक मैंने नंगे जिस्म को टॉवल में कैद नहीं किया वो तिरछी नज़र से मेरे मोटे और लंबे लौड़े को घूर रही थी।

मैंने कहा, “सॉरी भाभी!”

वो बोली, “कोई बात नहीं… तुमने जानबूझ कर तो नहीं किया… ये सब अचानक हो गया!”

फिर वो चाय की ट्रे लेकर अपने कमरे में चली गयी। मैं भी तैयार होकर दफ़्तर चला गया। शाम को जब सात बजे घर आया तो साथ में व्हिस्की लेकर आया क्योंकि शुक्रवार था और शनिवार और रविवार को मेरी छुट्टी रहती है।

घर आकर फ्रैश होके करीब पौने-नौ बजे रशीद जी और मैं पीने बैठे। अभी हमारा एक पैग भी खतम नहीं हुआ था की रशीद जी ने नज़ीला भाभी को बुलाया और कहा, “डार्लिंग तुम भी आ जाओ और हमें कंपनी दो।”

नज़ीला भाभी भी एक ग्लास लेकर आयी और पैग बना कर रशीद जी के बगल में बैठ कर पीने लगी। मैं और रशीद जी बरमुडा और टी-शर्ट पहने हुए थे और नज़ीला भाभी ने पारदर्शी नाइटी पहनी थी जिस में से उनकी काली रंग की ब्रा और पैंटी साफ़ दिख रही थी। दो पैग पीते ही हम तीनों को थोड़ा-थोड़ा नशा होने लगा।

अपना जाम उठा कर पीते हुए रशीद जी बोले, “यार दीनू! मेरी छुट्टी तो खतम हो रही है, और मंडे की सुबह मुझे आसाम के लिये रवाना होना है। अब मैं छः महीने बाद आऊँगा… तुम घर का और नज़ीला का खयाल रखना।”
मैंने कहा, “डोंट वरी मेजर साहब! ऑय विल टेक केयर! मैं भी यहाँ करीब छः महीने के लिये ही हूँ!”

वो बोले, “यार अब दो दिन बचे हैं… जम कर मौज करेंगे!”

फिर उन्होंने नज़ीला भाभी के कंधे पर हाथ रख दिया। हम सब बातों में मशगूल थे की अचानक मेरी नज़र नज़ीला भाभी पर पड़ी। मैंने देखा कि रशीद जी जाम पीते-पीते नज़ीला भाभी की बायीं चूची को दबा रहे थे। ये देख कर मेरा लंड अपनी हर्कत में आ गया लेकिन मैं अंजान बना रहा।

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फिर भी मेरी नज़र बार-बार नज़ीला भाभी की चूचियों पर जा रही थी। जब मेरी और नज़ीला भाभी की नज़र चार हुई तो वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी।

खैर पीने का प्रोग्राम खतम करके हम लोगों ने खाना खाया और अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। मुझे नींद नहीं आ रही थी। करीब साढ़े-बारह बजे मैं उठ कर पेशाब करने गया और वापस आते हुए देखा कि रशीद जी के कमरे की लाईट जल रही थी। मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि खिड़की से झाँक कर देखूँ कि वो क्या कर रहे हैं। मैंने खिड़की से झाँख कर देखा तो वो दोनों बिल्कुल नंगे थे और रशीद जी नज़ीला भाभी की चूत चटाई कर रहे थे। नज़ीला भाभी उनका सिर पकड़ कर उनका चेहरा अपनी चूत में दबा रही थी।

तभी नज़ीला भाभी बोली, “डार्लिंग मैंने दीनू का लंड देखा है… उसका लंड बहुत मोटा और लंबा है!”

रशीद जी बोले, “जानू! क्या तुम उसके लंड से चुदवाना चाहती हो?”

वो बोली, “डार्लिंग! क्यों नहीं? जबसे पिछला पेईंग-गेस्ट छोड़ कर तंज़ानिया वापस गया है तबसे कोई नया लंड नहीं लिया… दीनू का लंड तो उस नीग्रो से भी ज्यादा मोटा और लंबा है… उसे सिड्यूस करके उसके लंड से ज़रूर चुदवाऊँगी!”
रशीद जी बोले, “तुम बाज़ नहीं आओगी डार्लिंग! उस नीग्रो लड़के के साथ भी खूब ऐश करी थी तुमने… चलो ऑल द बेस्ट!”

फिर रशीद जी उठ कर उनकी चूत में लंड डाल कर फचाफच चोदने लगे। उनकी ये बातें सुन कर मैं हैरान हो गया और जब उनकी चुदाई खतम हुई तो मैं अपने कमरे में आकर सो गया लेकिन मेरे दिमाग में बार-बार उनकी बातें और चुदाई का खयाल घूम रहा था।

खैर सुबह करीब दस बजे मैं उठा और नहा धोकर जब नाश्ता करने लगा तो देखा रशीद जी घर पर नहीं थे। मैंने नज़ीला भाभी से पूछा, “भाभी! मेजर सहाब कहाँ हैं?”

नज़ीला भाभी बोली, “अपने दोस्त के घर गये है और दोपहर को करीब एक बजे आयेंगे।”

जब मैं नाश्ता कर रहा था तो देखा नज़ीला भाभी की नज़र बार-बार मेरे बरमूडे पर जा रही थी। जब हमारी नज़र चार हुई तो मैंने नज़ीला भाभी से पूछा, “भाभी क्या देख रही हो?”

नज़ीला भाभी बोली, “दीनू जब से मैंने तुम्हारा देखा है मैं हैरान हूँ… क्योंकि ऐसा मैंने आज तक किसी का ही देखा!”

मैं बोला, “क्या नहीं देखा भाभी?”

वो बोली, “दीनू ज्यादा अंजान मत बनो… कल जब तुम्हारा टॉवल गिरा तो मैंने तुम्हारी कमर के नीचे का हिस्सा नंगा देखा और दोनों टाँगों के बीच जो वो लटक रहा था… उसे देख कर मैं हैरत-अंगेज़ हूँ।”

नज़ीला भाभी की ये बातें सुन कर मैं उत्तेजित हो गया और हिम्मत कर के अपना लंड बरमूडे से निकाल कर उन्हें दिखाते हुए बोला, “नज़ीला भाभी… आप इसकी बत कर रही हो?”

वो बोली, “हाँ.. बिल्कुल इसी की बात कर रही हूँ!”

मैं बोला, “कल तो आपने दूर से देखा था… आज करीब से देख लो!” और उनका हाथ पकड़ कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया।

नज़ीला भाभी मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर बोली, “हाय अल्लाह! कितना मोटा और लंबा है!” और लंड की चमड़ी को पीछे करके सुपाड़े पर एक चुम्मा दे दिया।

फिर मैंने कहा, “नज़ीला भाभी अब आपकी भी तो दिखा दो!” तो वो मेरे लंड को बरमूडे में डाल कर बोली, “दीनू आज नहीं! मेजर साहब के जाने के बाद दिखा दुँगी।”

फिर हम दोनों उठ कर खड़े हो गये। वो अपने काम में लग गयी और मैं टीवी देखने लगा। रविवार रात तक हम तीनों ने खूब जाम कर शराब पी और सोमवार की सुबह रशीद जी टैक्सी लेकर रेलवे स्टेशन चले गये। मैं उठा तो सुबह के करीब सात बज रहे थे। नज़ीला भाभी भी स्कूल जाने के लिये तैयार हो चुकी थी। मैंने नज़ीला भाभी से कहा, “भाभी! अब तो मेजर सहाब चले गये… अब तो आपकी दिखा दो!”

नज़ीला भाभी ने अदा से मुस्कुराते हुए तुरंत अपनी सलवार नीचे खिसका कर अपनी चूत दिखा दी। उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, लगता है की हेयर रिमूवर से नियमित अपनी चूत साफ करती थी। मैं उनकी चूत पर हाथ रख कर थोड़ी देर सहलाया और फिर उनकी चूत पर चुम्मा लिया।

वो बोली, “अब बस दीनू! रात को और दिखा दुँगी। अभी स्कूल के लिये लेट हो रहा है!” फिर वो स्कूल चली गयी और उसके बाद मैं भी नहाकर दफ़्तर चला गया। दफ़्तर में मेरा मन नहीं लग रहा था और शाम होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।

शाम को जब घर पहुँचा तो नज़ीला भाभी को देखकर बस देखता ही रह गया। उन्होंने घुटनों तक की छोटी सी मैरून रंग की नाइटी पहनी हुई थी। उनकी नाइटी इतनी पारदर्शी थी कि काली ब्रा और पैंटी में उनका पूरा हुस्न मेरी आँखों के सामने नंगा था। साथ में काले रंग के ही ऊँची हील वाले सैंडल पहने हुए थे जो उनके सैक्सी फिगर में चार चाँद लगा रहे थे। खुली ज़ुल्फें और मैरून लिपस्टिक लगे होंठों पर कातिलाना मुस्कुराहट कयामत ढा रही थी। मैंने नज़ीला भाभी को बाँहों में लेना चाहा तो वो बोली, “इतनी भी क्या बेसब्री है… पहले फ्रेश तो हो जाओ… मैं कहीं भगी तो नहीं जा रही हूँ… फिर जी भर के मेरे हुस्न का जाम पीना!”

फिर मैं बाथरूम में जा कर नहाया और बरमूडा और टी-शर्ट पहन कर बाहर आया तो कमरे में रोमैन्टिक संगीत बज रहा था और नज़ीला भाभी हम दोनों के लिये पैग बना रही थी। हम दोनों बैठ कर शराब पीने लगे और बातें करने लगे। नज़ीला भाभी के होंठों पर वही शरारती मुस्कुराहट थी।

नज़ीला भाभी मुझे छेड़ते हुए बोली, “तो जनाब और कितनों के हुस्न का मज़ा ले चुके हैं!”

“आप से झूठ नहीं बोलुँगा भाभी… मैंने कईयों के साथ ऐश की है…!” मैं बोला।

“सुभान अल्लाह! दिखते तो बड़े सीधे हो!” नज़ीला भाभी आँखें नचाते हुए बोली।

“वैसे भाभी कम तो आप भी नहीं हो… क्यों सही कह रहा हूँ ना?”मैंने भी वापस उन्हें छेड़ा।

“तुम्हें कैसे पता?” नज़ीला भाभी आँख मारते हुए बोली।

“बस ऐसे ही अंदाज़ा लगा लिया… बताओ ना भाभी सच है कि नहीं?”मैं ज़ोर देते हुए बोला।

हम दोनों इसी तरह शराब पीते हुए बातें करते रहे। नज़ीला भाभी ने बताया कि वो बेहद चुदासी हैं और ज़िंदगी में पचासियों लौड़े अपनी चूत में ले चुकी हैं। पेईंग-गेस्ट भी इसी मक्सद से रखती हैं ताकि मेजर-साहब की गैर-हाज़री में भी उनकी चूत प्यासी ना रहे। बातें करते-करते हमने काफी शराब पी ली थी और नज़ीला भाभी की तो आवाज़ भी बहकने लगी थी।

फिर वो बोली, “दीनू अपने कमरे में चलो… मैं भी दो मिनट में आती हूँ!”

मैंने पहले बाथरूम में जा कर पेशाब किया और फिर अपने कमरे में चला गया। नज़ीला भाभी भी नशे में झुमती हुई मेरे कमरे में आयी और आते ही अपनी नाइटी उतार कर कर बोली, “दीनू देख लो दिल भर कर मेरा शबाब!”
नज़ीला भाभी अब काली ब्रा-पैंटी और हाई हील के सैंडल पहने हुस्न की परी की तरह मेरे सामने खड़ी थीं। मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भरते हुए कहा, “सिर्फ देखने से दिल नहीं भरेगा भाभी!”
“तो फिर कैसे…?”वो शरारती अंदज़ में बोली।

“अब तो आपके हुस्न की झील में डूब के ही करार मिलेगा!” कहते हुए मैं अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। फिर मैंने उनकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी और उन्हें बेड पर लिटा कर उनकी गीली चूत को चाटने लगा और वो भी मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी। जब मेरा लंड चुदाई के लिये तैयार हो गया तो मैं नज़िला भाभी टाँगें फैला कर लंड के सुपाड़े को उनकी चूत पर रगड़ने लगा।

मेरे लंड की रगड़न से वो उतेजित हो कर मुँह से सिसकरी भरने लगी और कुछ ही देर में उनका जिस्म अकड़ने लगा और वो पहले चूत चटाई से अब लौड़े की रगड़न से झड़ गयी। फिर मैंने अपने सुपाड़े पर थूक लगा कर नज़िला भाभी की चूत पर रख कर एक कस के धक्का मरा तो आधे से ज्यादा लंड उनकी चूत में घुस गया। लंड घुसते ही उनके मुँह से “ऊऊऊईईईई ऊफ़फ़फ़” सिसकरियाँ निकलने लगी और वो लंबी-लंबी साँसें लेने लगी। नज़ीला भाभी सिसकते हुए बोली, “दीनू ऐसे ही डाले रहो कुछ करना नहीं!”

मैं कुछ देर तक बिना हिले-डुले आधे से ज्यादा लंड उनकी चूत में फसाये पड़ा रहा और उनकी दोनों चूचियों को अंगूठे और उंगली के बीच पकड़ कर मसलता रहा। कुछ ही देर में वो ज़रा नॉर्मल हुई तो मैंने कमर उठा कर थोड़ा लंड चूत से बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का मारा। मेरा लंड पूरा का पूरा उनकी चूत की गहरायी में घुस कर उनकी बच्चेदानी पर छू गया।

नज़ीला भाभी फिर चिल्ला पड़ीं, “ऊऊऊऊईईईई अल्लाहहऽऽऽ मार डाला रे तेरे ज़ालिम लंड ने… प्लीज़ दीनू… हिलना डुलना नहीं!”

मैं ऐसे ही लंड डाले पड़ा रहा। मेरे लंड पर उनकी चूत की दिवारें कस कर जकड़ी हुई थी। जब वो फिर नॉर्मल हुई तो मैं धीरे-धीरे अपना लंड नज़ीला भाभी की चूत के अंदर-बाहर करने लगा। जब मेरा लंड उनकी चूत के दाने को रगड़ता हुआ अंदर-बाहर होने लगा तो नज़ीला भाभी को भी जोश आ गया और बोली, “दीनू मॉय डार्लिंग! कीप फकिंग हार्ड… बेहद मज़ा आ रहा है! आआआहहह आआआईईई!”

फिर उन्होंने अपनी टाँगें और फ़ैला दीं और मेरी कमर पर कस दीं।

नज़ीला भाभी की सिसकारियों से मुझे भी जोश आ गया और मैं तेजी के साथ कस-कस कर चुदाई करते हुए लंड को अंदर-बाहर करने लगा। कुछ ही देर में उनकी चूत की सिकुड़न मुझे अपने लंड पर महसूस हुई। मैं समझ गया की वो झड़ रही थी लेकिन मैंने अपनी स्पीड नहीं रोकी बल्कि और बढ़ा दी। नज़िला भाभी की चूत गीली होने से अब मेरा लौड़ा आसानी से ‘पुच-पुच’ की आवाजें करता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था और पूरे कमरे में चुदाई की आवाजें गूँजने लगी।

उनके झड़ने के बाद मैं करीब पंद्रह -मिनट तक चोदता रहा। फिर मेरा लंड भी नज़ीला भाभी की चूत में झड़ गया। लंड का पानी जब पूरा उनकी चूत में गिर गया तो मैंने लंड को बाहर निकाला।उनकी चूत खुल कर अंदर की गहरायी दिखा रही थी। हम दोनों जोर-जोर से साँसें ले रहे थे। फिर हम दोनों लिपट कर सो गये।

करीब तीन बजे मेरी आँख खुली तो नज़ीला भाभी सिर्फ सैंडल पहने बिल्कुल नंगी मुझसे लिपटी हुई सो रही थीं।

मैंने फिर से उनकी चुदाई की और सुबह भी दफ़्तर जाने से पहले उनकी चुदाई की।

अब तो ये रोज़ का सिलसिला हो गया। हम रोज रात को शराब के एक-दो पैग पी कर चुदाई करने लगे। नज़ीला भाभी तो मेरे लंड पर फ़िदा हो चुकी थीऔर वो बेहद चुदासी थीं। हर वक्त चुदाई के मूड में रहती थीं। हम दोनों हर रात एक ही बिस्तर पर नंगे सोते और अलग-अलग तरह से चुदाई करते। कईं बार तो स्कूल के लिये निकलने वाली होती तो जाते-जाते भी अपनी सलवार और पैंटी नीचे खिसका कर झटपट चोदने को कहतीं।हर दूसरे दीन मैं उनकी गाँड भी मारता था। जब भी हम दोनों में से किसी को चुदाई का मन होता, घर के किसी भी हिस्से जैसे कि किचन, बाथरूम, ड्राइंग रूम में कहीं भी चुदाई शुरू हो जाती।

शुक्रवार और शनिवार को तो हम जम कर शराब पीते और नशे में धुत्त होकर खूब चुदाई करते।

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Bhabhi Aur Nanad Ki Jordar Chudai https://sexstories.one/bhabhi-aur-nanad-ki-jordar-chudai-2/ Fri, 26 Mar 2021 12:44:51 +0000 https://sexstories.one/?p=3221 Bhabhi Aur Nanad Ki Jordar Chudai – मेरी उम्र छब्बीस साल है और मैं सरकारी दफ़्तर में ऑडिटिंग ऑफिसर हूँ और हमारे दफ़्तर की शाखायें पूरे देश में हैं और अक्सर मुझे काम के सिलसिले ... >> पूरी कहानी पढ़ें

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Bhabhi Aur Nanad Ki Jordar Chudai – मेरी उम्र छब्बीस साल है और मैं सरकारी दफ़्तर में ऑडिटिंग ऑफिसर हूँ और हमारे दफ़्तर की शाखायें पूरे देश में हैं और अक्सर मुझे काम के सिलसिले में दूसरे शहरों की शाखा*ओं में कुछ महीनों के लिये जाना पड़ता है। मैं शादीशुदा नहीं हूँ इसलिये मुझे इसमें को*ई दिक्कत नहीं होती है। अपनी पिछली कहानी में जैसे कि मैंने आपको बताया था कि कैसे लखन*ऊ पोस्टिंग के दौरान मैंने अपनी सहकर्मी रूबिना को चोदा।

इस बार दफ़्तर के काम से मेरी पोस्टिंग चंडीगढ़ हुई थी। वहाँ मैंने अपने सह-कर्मचारी की मदद से एक जगह पेइंग-गेस्ट के तौर पे कमरा किराये पर ले लिया। उस मकान में मकान मालिक रशीद अहमद थे जो कि चालीस वर्षीय थे और सेना में मेजर थे। फिलहाल वो एक महीने के लिये छुट्टी पर आये थे। उनकी बीवी नज़ीला करीब पैंतीस के ऊपर थीं और स्कूल में टीचर थीं। नज़ीला भाभी का जिस्म काफी मस्त और सुडौल था।

उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ और गोल-गोल चूतड़ थे। जब वो ऊँची हील के सैंडल पहन कर गाँड मटका कर चलती थी तो उन्हें देख कर किसी का भी लंड अपने आप खड़ा हो जाता था। उनकी कोई औलाद नहीं थी। रशीद जी और नज़ीला भाभी दोनों बहुत मिलनसार थे और खुले विचारों वाले थे। मियाँ-बीवी में खूब जमती थी। वो लोग मुझसे घर के सदस्य की तरह ही बर्ताव करते थे, कभी मुझे पराया नहीं समझते थे। जब तक रशीद जी की छुट्टी रही हम दोनों हर शुक्रवार और शनिवार को जम कर पीते थे और नज़ीला भाभी भी हमारा साथ देती थी। उस वक्त उनकी अदा काफी सैक्सी और अलग लगती थी।

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एक बार रशीद जी और नज़ीला भाभी सुबह सो रहे थे। मैंने नहा-धोकर सोचा की काम वाली नौकरानी तो आयी नहीं है और नज़ीला भाभी भी अभी उठी नहीं है तो चाय कौन पिलायेगा। इसलिये मैं खुद ही रसोई में केवल टॉवल लपेट कर चाय बनाने चला गया। जब चाय बन कर तैयार हो गयी तो देखा नज़ीला भाभी रसोई में खड़ी-खड़ी मुझे देख रही थी।

वो बोली, “दीनू! मुझे उठा लिया होता तो मैं ही चाय बना देती।”

मैंने कहा, “आप लोगों की नींद खराब ना हो इसलिये मैंने आप को नहीं जगाया और सोचा जब चाय बन जायेगी तो आप लोगों को जगा दुँगा।”

इतने में वो मेरे पास आकर खड़ी हो गयी। तब मैं चाय को छलनी से छान रहा था कि पता नहीं कैसे मेरा टॉवल खुल कर नीचे गिरा और मैं बिल्कुल नंगा हो गया क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं पहना था। मुझे नंगा देख कर वो अवाक रह गयी और सिर झुका कर खड़ी हो गयी। मैंने तुरंत चाय का बर्तन नीचे रखा और टॉवल उठा कर लपेट लिया। जब तक मैंने नंगे जिस्म को टॉवल में कैद नहीं किया वो तिरछी नज़र से मेरे मोटे और लंबे लौड़े को घूर रही थी।

मैंने कहा, “सॉरी भाभी!”

वो बोली, “कोई बात नहीं… तुमने जानबूझ कर तो नहीं किया… ये सब अचानक हो गया!”

फिर वो चाय की ट्रे लेकर अपने कमरे में चली गयी। मैं भी तैयार होकर दफ़्तर चला गया। शाम को जब सात बजे घर आया तो साथ में व्हिस्की लेकर आया क्योंकि शुक्रवार था और शनिवार और रविवार को मेरी छुट्टी रहती है।

घर आकर फ्रैश होके करीब पौने-नौ बजे रशीद जी और मैं पीने बैठे। अभी हमारा एक पैग भी खतम नहीं हुआ था की रशीद जी ने नज़ीला भाभी को बुलाया और कहा, “डार्लिंग तुम भी आ जाओ और हमें कंपनी दो।”

नज़ीला भाभी भी एक ग्लास लेकर आयी और पैग बना कर रशीद जी के बगल में बैठ कर पीने लगी। मैं और रशीद जी बरमुडा और टी-शर्ट पहने हुए थे और नज़ीला भाभी ने पारदर्शी नाइटी पहनी थी जिस में से उनकी काली रंग की ब्रा और पैंटी साफ़ दिख रही थी। दो पैग पीते ही हम तीनों को थोड़ा-थोड़ा नशा होने लगा।

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अपना जाम उठा कर पीते हुए रशीद जी बोले, “यार दीनू! मेरी छुट्टी तो खतम हो रही है, और मंडे की सुबह मुझे आसाम के लिये रवाना होना है। अब मैं छः महीने बाद आऊँगा… तुम घर का और नज़ीला का खयाल रखना।”

मैंने कहा, “डोंट वरी मेजर साहब! ऑय विल टेक केयर! मैं भी यहाँ करीब छः महीने के लिये ही हूँ!”

वो बोले, “यार अब दो दिन बचे हैं… जम कर मौज करेंगे!”

फिर उन्होंने नज़ीला भाभी के कंधे पर हाथ रख दिया। हम सब बातों में मशगूल थे की अचानक मेरी नज़र नज़ीला भाभी पर पड़ी। मैंने देखा कि रशीद जी जाम पीते-पीते नज़ीला भाभी की बायीं चूची को दबा रहे थे। ये देख कर मेरा लंड अपनी हर्कत में आ गया लेकिन मैं अंजान बना रहा। फिर भी मेरी नज़र बार-बार नज़ीला भाभी की चूचियों पर जा रही थी। जब मेरी और नज़ीला भाभी की नज़र चार हुई तो वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी।

खैर पीने का प्रोग्राम खतम करके हम लोगों ने खाना खाया और अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। मुझे नींद नहीं आ रही थी। करीब साढ़े-बारह बजे मैं उठ कर पेशाब करने गया और वापस आते हुए देखा कि रशीद जी के कमरे की लाईट जल रही थी। मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि खिड़की से झाँक कर देखूँ कि वो क्या कर रहे हैं। मैंने खिड़की से झाँख कर देखा तो वो दोनों बिल्कुल नंगे थे और रशीद जी नज़ीला भाभी की चूत चटाई कर रहे थे। नज़ीला भाभी उनका सिर पकड़ कर उनका चेहरा अपनी चूत में दबा रही थी।

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तभी नज़ीला भाभी बोली, “डार्लिंग मैंने दीनू का लंड देखा है… उसका लंड बहुत मोटा और लंबा है!”

रशीद जी बोले, “जानू! क्या तुम उसके लंड से चुदवाना चाहती हो?”

वो बोली, “डार्लिंग! क्यों नहीं? जबसे पिछला पेईंग-गेस्ट छोड़ कर तंज़ानिया वापस गया है तबसे कोई नया लंड नहीं लिया… दीनू का लंड तो उस नीग्रो से भी ज्यादा मोटा और लंबा है… उसे सिड्यूस करके उसके लंड से ज़रूर चुदवाऊँगी!”

रशीद जी बोले, “तुम बाज़ नहीं आओगी डार्लिंग! उस नीग्रो लड़के के साथ भी खूब ऐश करी थी तुमने… चलो ऑल द बेस्ट!”

फिर रशीद जी उठ कर उनकी चूत में लंड डाल कर फचाफच चोदने लगे। उनकी ये बातें सुन कर मैं हैरान हो गया और जब उनकी चुदाई खतम हुई तो मैं अपने कमरे में आकर सो गया लेकिन मेरे दिमाग में बार-बार उनकी बातें और चुदाई का खयाल घूम रहा था।

खैर सुबह करीब दस बजे मैं उठा और नहा धोकर जब नाश्ता करने लगा तो देखा रशीद जी घर पर नहीं थे। मैंने नज़ीला भाभी से पूछा, “भाभी! मेजर सहाब कहाँ हैं?”

नज़ीला भाभी बोली, “अपने दोस्त के घर गये है और दोपहर को करीब एक बजे आयेंगे।”

जब मैं नाश्ता कर रहा था तो देखा नज़ीला भाभी की नज़र बार-बार मेरे बरमूडे पर जा रही थी। जब हमारी नज़र चार हुई तो मैंने नज़ीला भाभी से पूछा, “भाभी क्या देख रही हो?”

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नज़ीला भाभी बोली, “दीनू जब से मैंने तुम्हारा देखा है मैं हैरान हूँ… क्योंकि ऐसा मैंने आज तक किसी का ही देखा!”

मैं बोला, “क्या नहीं देखा भाभी?”

वो बोली, “दीनू ज्यादा अंजान मत बनो… कल जब तुम्हारा टॉवल गिरा तो मैंने तुम्हारी कमर के नीचे का हिस्सा नंगा देखा और दोनों टाँगों के बीच जो वो लटक रहा था… उसे देख कर मैं हैरत-अंगेज़ हूँ।”

नज़ीला भाभी की ये बातें सुन कर मैं उत्तेजित हो गया और हिम्मत कर के अपना लंड बरमूडे से निकाल कर उन्हें दिखाते हुए बोला, “नज़ीला भाभी… आप इसकी बत कर रही हो?”

वो बोली, “हाँ.. बिल्कुल इसी की बात कर रही हूँ!”

मैं बोला, “कल तो आपने दूर से देखा था… आज करीब से देख लो!” और उनका हाथ पकड़ कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया।

नज़ीला भाभी मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर बोली, “हाय अल्लाह! कितना मोटा और लंबा है!” और लंड की चमड़ी को पीछे करके सुपाड़े पर एक चुम्मा दे दिया।

फिर मैंने कहा, “नज़ीला भाभी अब आपकी भी तो दिखा दो!” तो वो मेरे लंड को बरमूडे में डाल कर बोली, “दीनू आज नहीं! मेजर साहब के जाने के बाद दिखा दुँगी।”

फिर हम दोनों उठ कर खड़े हो गये। वो अपने काम में लग गयी और मैं टीवी देखने लगा। रविवार रात तक हम तीनों ने खूब जाम कर शराब पी और सोमवार की सुबह रशीद जी टैक्सी लेकर रेलवे स्टेशन चले गये। मैं उठा तो सुबह के करीब सात बज रहे थे। नज़ीला भाभी भी स्कूल जाने के लिये तैयार हो चुकी थी। मैंने नज़ीला भाभी से कहा, “भाभी! अब तो मेजर सहाब चले गये… अब तो आपकी दिखा दो!”

नज़ीला भाभी ने अदा से मुस्कुराते हुए तुरंत अपनी सलवार नीचे खिसका कर अपनी चूत दिखा दी। उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, लगता है की हेयर रिमूवर से नियमित अपनी चूत साफ करती थी। मैं उनकी चूत पर हाथ रख कर थोड़ी देर सहलाया और फिर उनकी चूत पर चुम्मा लिया।

वो बोली, “अब बस दीनू! रात को और दिखा दुँगी। अभी स्कूल के लिये लेट हो रहा है!” फिर वो स्कूल चली गयी और उसके बाद मैं भी नहाकर दफ़्तर चला गया। दफ़्तर में मेरा मन नहीं लग रहा था और शाम होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।

शाम को जब घर पहुँचा तो नज़ीला भाभी को देखकर बस देखता ही रह गया। उन्होंने घुटनों तक की छोटी सी मैरून रंग की नाइटी पहनी हुई थी। उनकी नाइटी इतनी पारदर्शी थी कि काली ब्रा और पैंटी में उनका पूरा हुस्न मेरी आँखों के सामने नंगा था। साथ में काले रंग के ही ऊँची हील वाले सैंडल पहने हुए थे जो उनके सैक्सी फिगर में चार चाँद लगा रहे थे। खुली ज़ुल्फें और मैरून लिपस्टिक लगे होंठों पर कातिलाना मुस्कुराहट कयामत ढा रही थी। मैंने नज़ीला भाभी को बाँहों में लेना चाहा तो वो बोली, “इतनी भी क्या बेसब्री है… पहले फ्रेश तो हो जाओ… मैं कहीं भगी तो नहीं जा रही हूँ… फिर जी भर के मेरे हुस्न का जाम पीना!”

फिर मैं बाथरूम में जा कर नहाया और बरमूडा और टी-शर्ट पहन कर बाहर आया तो कमरे में रोमैन्टिक संगीत बज रहा था और नज़ीला भाभी हम दोनों के लिये पैग बना रही थी। हम दोनों बैठ कर शराब पीने लगे और बातें करने लगे। नज़ीला भाभी के होंठों पर वही शरारती मुस्कुराहट थी।

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नज़ीला भाभी मुझे छेड़ते हुए बोली, “तो जनाब और कितनों के हुस्न का मज़ा ले चुके हैं!”

“आप से झूठ नहीं बोलुँगा भाभी… मैंने कईयों के साथ ऐश की है…!” मैं बोला।

“सुभान अल्लाह! दिखते तो बड़े सीधे हो!” नज़ीला भाभी आँखें नचाते हुए बोली।

“वैसे भाभी कम तो आप भी नहीं हो… क्यों सही कह रहा हूँ ना?”मैंने भी वापस उन्हें छेड़ा।

“तुम्हें कैसे पता?” नज़ीला भाभी आँख मारते हुए बोली।

“बस ऐसे ही अंदाज़ा लगा लिया… बताओ ना भाभी सच है कि नहीं?”मैं ज़ोर देते हुए बोला।

हम दोनों इसी तरह शराब पीते हुए बातें करते रहे। नज़ीला भाभी ने बताया कि वो बेहद चुदासी हैं और ज़िंदगी में पचासियों लौड़े अपनी चूत में ले चुकी हैं। पेईंग-गेस्ट भी इसी मक्सद से रखती हैं ताकि मेजर-साहब की गैर-हाज़री में भी उनकी चूत प्यासी ना रहे। बातें करते-करते हमने काफी शराब पी ली थी और नज़ीला भाभी की तो आवाज़ भी बहकने लगी थी।

फिर वो बोली, “दीनू अपने कमरे में चलो… मैं भी दो मिनट में आती हूँ!”

मैंने पहले बाथरूम में जा कर पेशाब किया और फिर अपने कमरे में चला गया। नज़ीला भाभी भी नशे में झुमती हुई मेरे कमरे में आयी और आते ही अपनी नाइटी उतार कर कर बोली, “दीनू देख लो दिल भर कर मेरा शबाब!”

नज़ीला भाभी अब काली ब्रा-पैंटी और हाई हील के सैंडल पहने हुस्न की परी की तरह मेरे सामने खड़ी थीं। मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भरते हुए कहा, “सिर्फ देखने से दिल नहीं भरेगा भाभी!”

“तो फिर कैसे…?”वो शरारती अंदज़ में बोली।

“अब तो आपके हुस्न की झील में डूब के ही करार मिलेगा!” कहते हुए मैं अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। फिर मैंने उनकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी और उन्हें बेड पर लिटा कर उनकी गीली चूत को चाटने लगा और वो भी मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी। जब मेरा लंड चुदाई के लिये तैयार हो गया तो मैं नज़िला भाभी टाँगें फैला कर लंड के सुपाड़े को उनकी चूत पर रगड़ने लगा।

मेरे लंड की रगड़न से वो उतेजित हो कर मुँह से सिसकरी भरने लगी और कुछ ही देर में उनका जिस्म अकड़ने लगा और वो पहले चूत चटाई से अब लौड़े की रगड़न से झड़ गयी। फिर मैंने अपने सुपाड़े पर थूक लगा कर नज़िला भाभी की चूत पर रख कर एक कस के धक्का मरा तो आधे से ज्यादा लंड उनकी चूत में घुस गया। लंड घुसते ही उनके मुँह से “ऊऊऊईईईई ऊफ़फ़फ़” सिसकरियाँ निकलने लगी और वो लंबी-लंबी साँसें लेने लगी। नज़ीला भाभी सिसकते हुए बोली, “दीनू ऐसे ही डाले रहो कुछ करना नहीं!”

मैं कुछ देर तक बिना हिले-डुले आधे से ज्यादा लंड उनकी चूत में फसाये पड़ा रहा और उनकी दोनों चूचियों को अंगूठे और उंगली के बीच पकड़ कर मसलता रहा। कुछ ही देर में वो ज़रा नॉर्मल हुई तो मैंने कमर उठा कर थोड़ा लंड चूत से बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का मारा। मेरा लंड पूरा का पूरा उनकी चूत की गहरायी में घुस कर उनकी बच्चेदानी पर छू गया।

नज़ीला भाभी फिर चिल्ला पड़ीं, “ऊऊऊऊईईईई अल्लाहहऽऽऽ मार डाला रे तेरे ज़ालिम लंड ने… प्लीज़ दीनू… हिलना डुलना नहीं!”

मैं ऐसे ही लंड डाले पड़ा रहा। मेरे लंड पर उनकी चूत की दिवारें कस कर जकड़ी हुई थी। जब वो फिर नॉर्मल हुई तो मैं धीरे-धीरे अपना लंड नज़ीला भाभी की चूत के अंदर-बाहर करने लगा। जब मेरा लंड उनकी चूत के दाने को रगड़ता हुआ अंदर-बाहर होने लगा तो नज़ीला भाभी को भी जोश आ गया और बोली, “दीनू मॉय डार्लिंग! कीप फकिंग हार्ड… बेहद मज़ा आ रहा है! आआआहहह आआआईईई!”

फिर उन्होंने अपनी टाँगें और फ़ैला दीं और मेरी कमर पर कस दीं। नज़ीला भाभी की सिसकारियों से मुझे भी जोश आ गया और मैं तेजी के साथ कस-कस कर चुदाई करते हुए लंड को अंदर-बाहर करने लगा। कुछ ही देर में उनकी चूत की सिकुड़न मुझे अपने लंड पर महसूस हुई। मैं समझ गया की वो झड़ रही थी लेकिन मैंने अपनी स्पीड नहीं रोकी बल्कि और बढ़ा दी। नज़िला भाभी की चूत गीली होने से अब मेरा लौड़ा आसानी से ‘पुच-पुच’ की आवाजें करता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था और पूरे कमरे में चुदाई की आवाजें गूँजने लगी।

उनके झड़ने के बाद मैं करीब पंद्रह -मिनट तक चोदता रहा। फिर मेरा लंड भी नज़ीला भाभी की चूत में झड़ गया। लंड का पानी जब पूरा उनकी चूत में गिर गया तो मैंने लंड को बाहर निकाला।उनकी चूत खुल कर अंदर की गहरायी दिखा रही थी। हम दोनों जोर-जोर से साँसें ले रहे थे। फिर हम दोनों लिपट कर सो गये।

करीब तीन बजे मेरी आँख खुली तो नज़ीला भाभी सिर्फ सैंडल पहने बिल्कुल नंगी मुझसे लिपटी हुई सो रही थीं। मैंने फिर से उनकी चुदाई की और सुबह भी दफ़्तर जाने से पहले उनकी चुदाई की।

अब तो ये रोज़ का सिलसिला हो गया। हम रोज रात को शराब के एक-दो पैग पी कर चुदाई करने लगे। नज़ीला भाभी तो मेरे लंड पर फ़िदा हो चुकी थीऔर वो बेहद चुदासी थीं। हर वक्त चुदाई के मूड में रहती थीं। हम दोनों हर रात एक ही बिस्तर पर नंगे सोते और अलग-अलग तरह से चुदाई करते। कईं बार तो स्कूल के लिये निकलने वाली होती तो जाते-जाते भी अपनी सलवार और पैंटी नीचे खिसका कर झटपट चोदने को कहतीं।हर दूसरे दीन मैं उनकी गाँड भी मारता था। जब भी हम दोनों में से किसी को चुदाई का मन होता, घर के किसी भी हिस्से जैसे कि किचन, बाथरूम, ड्राइंग रूम में कहीं भी चुदाई शुरू हो जाती। शुक्रवार और शनिवार को तो हम जम कर शराब पीते और नशे में धुत्त होकर खूब चुदाई करते।

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